Publish Date: Mon, 09 Feb 2026 (13:09 IST)
Updated Date: Mon, 09 Feb 2026 (13:12 IST)
Mohan Bhagwat on BJP: क्या भाजपा बिना आरएसएस के चुनाव जीत सकती है? 2024 चुनाव के दौरान उठे इस विवाद पर अब सरसंघचालक मोहन भागवत ने 'बड़ी लकीर' खींच दी है। राम मंदिर आंदोलन से लेकर भाजपा के विस्तार तक, भागवत ने साफ कर दिया है कि संगठन की वैचारिक शक्ति ही सत्ता की असली नींव है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भाजपा के अच्छे दिन आरएसएस की वजह से ही हैं। जानिए, संघ प्रमुख ने क्यों कहा कि संघ के विचार पर चलने वालों को ही फायदा मिलता है।
क्या कहा था जेपी नड्डा ने?
दरअसल, 2024 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक साक्षात्कार में कहा था कि भाजपा अब एक बड़ा और सक्षम संगठन बन चुकी है और अपनी चुनावी राजनीति व अन्य कार्यों को खुद संभालने में सक्षम है। उन्होंने कहा था कि भाजपा को अब संघ की जरूरत नहीं है। तब माना गया था कि इस बयान के बाद संघ ने लोकसभा चुनाव में पूरी ताकत से भाजपा की मदद नहीं की थी। यही कारण था कि 400 पार का नारा देने वाली भाजपा 240 सीटों पर सिमट गई थी।
भाजपा को मिला राम मंदिर आंदोलन का लाभ
संघ के प्रमुख के ताजा बयान को नड्डा के पुराने बयान से ही जोड़कर देखा जा रहा है। भागवत ने याद दिलाया कि भाजपा के 'अच्छे दिन' की नींव में संघ का ही पसीना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राम मंदिर आंदोलन संघ के नेतृत्व में चला और इसका राजनीतिक लाभ उन लोगों को मिला जिन्होंने इस विचार का साथ दिया। भागवत ने स्पष्ट किया कि भाजपा एक स्वतंत्र पार्टी है, लेकिन उसका वैचारिक ऑक्सीजन आज भी आरएसएस ही है।
भाजपा को स्पष्ट संदेश
माना जा रहा है कि यह बयान उन कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए है जो चुनाव के दौरान हाशिए पर महसूस कर रहे थे। इसके अलावा संघ प्रमुख भागवत का यह बयान भाजपा नेतृत्व के लिए भी एक संदेश है कि भले ही पार्टी का विस्तार हो गया है, लेकिन उसका वैचारिक आधार अब भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही है। दरअसल, संघ और भाजपा के संबंधों को लेकर अकसर सवाल उठते रहे हैं। संघ की ओर से भी भाजपा में किसी भी तरह के फैसले लेने के दावों को हमेशा खारिज किया जाता रहा है।
Edited by: vrijendra Singh Jhala