जानिए कैसा रहा सुषमा स्वराज का राज‍‍नीतिक जीवन....

बुधवार, 7 अगस्त 2019 (11:51 IST)
पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मंगलवार रात नई दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि 67 वर्षीय सुषमाजी को दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरा देश शोक में डूब गया। 
 
प्रारम्भिक जीवन - सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 को हरियाणा राज्य की अम्बाला छावनी में हरदेव शर्मा तथा लक्ष्मी देवी के घर हुआ था। उनके पिता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख सदस्य रहे थे। स्वराज का परिवार मूल रूप से लाहौर के धरमपुरा क्षेत्र का निवासी था, जो अब पाकिस्तान में है। उन्होंने अम्बाला के सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत तथा राजनीति विज्ञान में स्नातक किया। 
 
सन 1970 में उन्हें अपने कालेज में सर्वश्रेष्ठ छात्रा के सम्मान से सम्मानित किया गया था। वे 3 वर्ष तक लगातार एस. डी. कालेज छावनी की एन सी सी की सर्वश्रेष्ठ कैडेट और 3 साल तक राज्य की श्रेष्ठ वक्ता भी चुनी गईं थीं। इसके बाद उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, चण्डीगढ़ से विधि की शिक्षा प्राप्त की। पंजाब विश्वविद्यालय से भी उन्हें 1973 में सर्वोच्च वक्ता का सम्मान मिला था। 
 
सन 1973 में ही सुषमा जी भारतीय सर्वोच्च न्यायलय में अधिवक्ता के पद पर कार्य करने लगी। 13 जुलाई 1975 को उनका विवाह स्वराज कौशल के साथ हुआ, जो सर्वोच्च न्यायालय में उनके सहकर्मी और साथी अधिवक्ता थे। कौशल बाद में 6 साल तक राज्यसभा में सांसद रहे, और इसके अतिरिक्त वे मिजोरम प्रदेश के राज्यपाल भी रह चुके हैं। स्वराज दम्पत्ति की एक पुत्री है, बांसुरी, जो लंदन के इनर टेम्पल में वकालत कर रही हैं।

राजनीतिक जीवन - 70 के दशक में ही सुषमा जी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गई थी। उनके पति, स्वराज कौशल, सोशलिस्ट नेता जॉर्ज फर्नान्डिस के करीबी थे, और इस कारण ही वे भी 1975 में फर्नान्डिस की विधिक टीम का हिस्सा बन गई। आपातकाल के समय उन्होंने जयप्रकाश नारायण के सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। आपातकाल की समाप्ति के बाद वह जनता पार्टी की सदस्य बन गई।

सन 1977 में उन्होंने अम्बाला छावनी विधानसभा क्षेत्र से हरियाणा विधानसभा के लिए विधायक का चुनाव जीता और चौधरी देवी लाल की सरकार में से 1977 से 79 के बीच राज्य की श्रम मन्त्री रह कर 25 साल की उम्र में कैबिनेट मन्त्री बनने का रिकॉर्ड बनाया था। 1979 में 27 वर्ष की उम्र में ही सुषमा जी हरियाणा राज्य में जनता पार्टी की राज्य अध्यक्ष बनी। 
 
80 के दशक में भारतीय जनता पार्टी के गठन पर वह भी इसमें शामिल हो गई। इसके बाद 1987 से 1990 तक पुनः वह अम्बाला छावनी से विधायक रही और भाजपा-लोकदल संयुक्त सरकार में शिक्षा मंत्री रही। 1990 में उन्हें राज्यसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित किया गया, जहाँ वह 1996 तक रही। 1996 में उन्होंने दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीता, और 13 दिन की वाजपेयी सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री रही। मार्च 1998 में उन्होंने दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र से एक बार फिर चुनाव जीता। 
 
एक बार फिर से उन्होंने वाजपेयी सरकार में दूरसंचार मंत्रालय के अतिरिक्त प्रभार के साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में शपथ ली थी। 19 मार्च 1998 से 12 अक्टूबर 1998 तक वह इस पद पर रही। इस अवधि के दौरान उनका सबसे उल्लेखनीय निर्णय फिल्म उद्योग को एक उद्योग के रूप में घोषित करना था, जिससे कि भारतीय फिल्म उद्योग को भी बैंक से कर्ज मिल सकता था। 
अक्टूबर 1998 में उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया, और 12 अक्टूबर 1998 को दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। हालांकि 3 दिसंबर 1998 को उन्होंने अपनी विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया, और राष्ट्रीय राजनीति में वापस लौट आई। सितंबर 1999 में उन्होंने कर्नाटक के बेल्लारी निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के विरुद्ध चुनाव लड़ा। अपने चुनाव अभियान के दौरान, उन्होंने स्थानीय कन्नड़ भाषा में ही सार्वजनिक बैठकों को संबोधित किया था। हालांकि वह 7% के मार्जिन से चुनाव हार गई। 
 
सन 2000 में वह उत्तर प्रदेश के राज्यसभा सदस्य के रूप में संसद में वापस लौट आईं। 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश के विभाजन पर उन्हें उत्तराखण्ड में स्थानांतरित कर दिया गया। उन्हें केन्द्रीय मंत्रिमंडल में फिर से सूचना और प्रसारण मंत्री के रूप में शामिल किया गया था, जिस पद पर वह सितंबर 2000 से जनवरी 2003 तक रही। 2003 में उन्हें स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और संसदीय मामलों में मंत्री बनाया गया, और मई 2004 में राजग की हार तक वह केंद्रीय मंत्री रही। 
 
सन 2006 में सुषमा जी को मध्य प्रदेश राज्य से राज्यसभा में तीसरे कार्यकाल के लिए फिर से निर्वाचित किया गया। इसके बाद 2009 में उन्होंने मध्य प्रदेश के विदिशा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से 4 लाख से अधिक मतों से जीत हासिल की। 21 दिसंबर 2009 को लालकृष्ण आडवाणी की जगह 15वीं लोकसभा में सुषमा स्वराज विपक्ष की नेता बनी और मई 2014 में भाजपा की विजय तक वह इसी पद पर आसीन रही। वर्ष 2014 में वे विदिशा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से दोबारा लोकसभा की सांसद निर्वाचित हुई हैं और उन्हें भारत की पहली महिला विदेश मंत्री होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। 
रिकॉर्डों की झड़ी - भाजपा में राष्ट्रीय मन्त्री बनने वाली पहली महिला सुषमा के नाम पर कई रिकॉर्ड दर्ज हैं। वे भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता बनने वाली पहली महिला हैं, वे कैबिनेट मन्त्री बनने वाली भी भाजपा की पहली महिला हैं, वे दिल्ली की पहली महिला मुख्यमन्त्री थीं और भारत की संसद में सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार पाने वाली पहली महिला भी वे ही हैं। वे दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री और देश में किसी राजनीतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता बनने की उपलब्धि भी उन्हीं के नाम दर्ज है। 

पति-पत्नी का राजनीतिक साथ - सन 2014 के लोकसभा चुनाव में वे मध्य प्रदेश की विदिशा सीट से लोकसभा की सदस्या चुनी गई थी। 1975 में उनका विवाह स्वराज कौशल के साथ में हुआ था। कौशल जी 6 साल तक राज्यसभा में सांसद रहे इसके अलावा वे मिजोरम प्रदेश के राज्यपाल भी रहे। स्वराज कौशल अभी तक सबसे कम आयु में राज्यपाल का पद प्राप्त करने वाले व्यक्ति हैं। 
सुषमा स्वराज और उनके पति की उपलब्धियों के ये रिकॉर्ड लिम्का बुक ऑफ व‌र्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करते हुए उन्हें विशेष दम्पत्ति का स्थान दिया गया है। स्वराज दम्पत्ति की एक पुत्री है जो वकालत कर रही हैं। हरियाणा सरकार में श्रम व रोजगार मन्त्री रहने वाली सुषमा अम्बाला छावनी से विधायक बनने के बाद लगातार आगे बढ़ती गई और बाद में दिल्ली पहुँचकर उन्होंने केन्द्र की राजनीति में सक्रिय रहने का संकल्प लिया जिसमें वे अंत तक सक्रिय थीं।
 
 
 
 
 

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