दुनिया के इन इस्‍लामिक देशों में नहीं है कोई Waqf Board, फिर भारत में इतना हंगामा क्‍यों?

वेबदुनिया न्यूज डेस्क
बुधवार, 2 अप्रैल 2025 (16:43 IST)
भारत में वक्‍फ बोर्ड बिल विधेयक को लेकर जमकर हंगामा हो रहा है। मोदी सरकार बिल में संसोधन करना चाहती है तो मुस्‍मिल इस बिल को अपने खिलाफ मानकर इसका विरोध कर रहे हैं। बता दें कि इस वक्त देश में अलग-अलग प्रदेशों के करीब 32 वक्फ बोर्ड हैं, जो वक्फ की संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन, देखरेख और मैनेजमेंट करते हैं। बिहार समेत कई प्रदेशों में शिया और सुन्नी मुस्लिमों के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड हैं।

बुधवार को बिल लोकसभा में पेश करने के बाद दिन भर इसे लेकर बहस होती रही है। वहीं आम मुस्‍लमानों ने भी इसका विरोध किया। हालांकि सरकार बिल में कुछ जरूरी संसोधन ही कर रही है। इस बीच आपको जानकर हैरान होगी कि भारत में जिस विधेयक में संसोधन को लेकर इतनी बहस हो रही है, वो दुनिया के कई मुस्‍लिम देशों में है ही नहीं। जानते हैं वे कौन कौन से मुस्‍लिम देश हैं, जहां वक्‍फ बोर्ड का कोई अस्‍तित्‍व ही नहीं है।
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कहां कहां नहीं है वक्‍फ बोर्ड : बता दें कि तुर्की, लीबिया, मिस्र, सूडान, लेबनान, सीरिया, जॉर्डन, इराक और ट्यूनीशिया जैसे इस्लामिक देशों में वक्फ बोर्ड नहीं है। भारत ही ऐसा देश है, जहां वक्फ बोर्ड बनाकर मुसलमानों को जमीनें दी गईं। वह भी वक्फ अगर किसी जमीन पर दावा कर दे तो कोई व्यक्ति इसे किसी कोर्ट में चुनौती नहीं दे सकता था। ऐसे में प्रॉपर्टी गंवाना तय था।

यूपी में वक्फ की सबसे ज्यादा जमीनें : बता दें कि भारत के हर राज्य में एक वक्फ बोर्ड होता है, जो वक्फ की संपत्तियों का नियंत्रण करता है। देश के पांच राज्यों में वक्फ के पास सबसे ज्यादा संपत्तियां हैं जिनमें उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। हैदराबाद में ही वक्फ के पास 77,000 प्रॉपर्टीज हैं, इसीलिए इस शहर को भारत की वक्फ राजधानी कहा जाता है। तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में वक्फ के पास 1.2 लाख संपत्तियां हैं। तेलंगाना का वक्फ बोर्ड देश का सबसे अमीर वक्फ बोर्ड है। पहले नंबर पर उत्तर प्रदेश आता है। जहां उसके पास 1.5 लाख वक्फ संपत्तियां हैं।

क्‍या है नए वक्फ बिल में : मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने सहयोगी दलों की मांग को स्वीकार करते हुए नए बिल में कई परिवर्तन किए हैं, जैसे 5 साल तक इस्लाम धर्म का पालन करने वाला ही वक्फ को अपनी संपत्ति दान कर सकेगा। दान की जाने वाली संपत्ति से जुड़ा कोई विवाद होने पर उसकी जांच के बाद ही अंतिम फैसला होगा। इसके साथ ही पुराने कानून की धारा 11 में संशोधन को भी स्वीकार कर लिया गया है, जिसमें कहा गया है कि वक्फ बोर्ड के पदेन सदस्य चाहे वह मुस्लिम हों या गैर मुस्लिम, उसे गैर मुस्लिम सदस्यों की गिनती में शामिल नहीं किया जाएगा। इसका अर्थ यह कि वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की संख्या बढ़ सकती है।

वक्फ का मतलब क्या है : बता दें कि 'वक्फ' अरबी भाषा के 'वकुफा' शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है, ठहरना या रोकना। कानूनी शब्दों में समझने की कोशिश करें तो वक्फ उसे कहते हैं, ‘इस्लाम में कोई व्यक्ति जब धार्मिक वजहों से या ईश्वर के नाम पर अपनी प्रॉपर्टी दान करता है तो इसे प्रॉपर्टी को वक्फ कर देना यानी रोक देना कहते हैं। फिर वो चाहे कुछ रुपये हों प्रॉपर्टी हो, बहुमूल्य धातु हो या घर मकान या जमीन। दान की गई इस प्रॉपर्टी को ‘अल्लाह की संपत्ति’ कहा जाता है और अपनी प्रॉपर्टी वक्फ को देने वाला इंसान ‘वकिफा’ कहलाता है।

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