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हड़ताल से परेशान वैष्‍णोदेवी के हजारों श्रद्धालु

सुरेश एस डुग्गर
श्रीनगर। पिछले 6 दिनों से वैष्णोदेवी के विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थान पर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना इसलिए करना पड़ रहा है क्योंकि 20 हजार से अधिक पिट्ठू, घोड़े वाले और पालकी वाले हड़ताल पर हैं। हड़ताल का कारण वैष्णोदेवी श्राइन बोर्ड द्वारा एक सड़क का निर्माण है जिस पर वह श्रद्धालुओं की सुविधा की खातिर बैटरी कार चलाना चाहता है। पर यह इन श्रमिकों को मंजूर नहीं है जिनको आशंका है कि बैटरी कार उनकी जीविका को छीन लेगी।
यही कारण था कि हजारों मजदूर आज छठे दिन भी लगातार हड़ताल पर डटे रहे। तो दूसरी ओर माता वैष्णोदेवी संघर्ष समिति के सदस्यों ने तीसरे दिन भी भूख हड़ताल लगातार जारी रखी। वहीं पुलिस प्रशासन के साथ अधिकारियों ने मेडिकल टीम को इन भूख हड़ताल पर गए संघर्ष समिति के सदस्यों की स्वास्थ्य जांच के लिए गठित की है, ताकि भूख हड़ताल पर गए इन सदस्यों की हालत का जायजा लिया जा सके। हालांकि इन मजदूरों की लगातार 6ठे दिन भी कामछोड़ हड़ताल का सीधा असर मां वैष्णोदेवी के दर्शनों हेतु आने वाले श्रद्धालुओं पर पड़ रहा है।
 
ये मजदूर बाणगंगा से आदिकुंवारी तक बनाए जा रहे 7.5 किलोमीटर लंबे नए मार्ग का विरोध कर रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि श्राइन बोर्ड नए मार्ग पर बैटरी कार सेवा शुरू कर देगा, जिससे उनका काम ठप हो जाएगा। इसलिए बोर्ड पहले स्पष्ट करे कि नए मार्ग का क्या इस्तेमाल किया जाएगा?
 
इन मजदूरों द्वारा की जा रही हड़ताल के कारण दर्शनों के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में गिरावट लगातार हो रही है। तो दूसरी ओर मजदूर नेता लगातार सैकड़ों समर्थक मजदूरों के साथ इस बात को लेकर अड़े हुए हैं कि बोर्ड प्रशासन द्वारा नवनिर्मित मार्ग पर बैटरी कार चलाए जाने की संभावना ओर पौराणिक मार्ग पर घोड़ा, पिट्ठू, पालकी सहित कार्य करने वाले मजदूरों की मजदूरी पर सीधा असर डालना है। 
 
इसी को लेकर मजदूर नेता भूपेन्द्र सिंह जम्वाल द्वारा माता वैष्णोदेवी संघर्ष समिति के बैनर तले भूख हड़ताल तब तक जारी रखने की घोषणा की है कि जब तक कि श्राइन बोर्ड के चेयरमैन व राज्य के राज्यपाल जब तक इन मजदूरों से रूबरू होकर नवनिर्मित मार्ग को पूर्ण तरीके से बंद करने की घोषणा नहीं करते।
 
नतीजतन माता वैष्णोदेवी के नए यात्रा मार्ग को लेकर जारी हड़ताल के कारण श्रद्धालुओं को काफी परेशानी हो रही है। घोड़ा, पालकी, पिट्ठू आदि उपलब्ध न होने से भक्तों को अपने बच्चों के साथ पैदल सामान लेकर यात्रा करनी पड़ रही है। बुजुर्ग व विकलांग श्रद्धालुओं को मजबूरन अपनी यात्रा स्थगित करनी पड़ रही है। 
 
मजदूर इस बात पर अड़े हुए हैं कि जब तक श्राइन बोर्ड के चेयरमैन व राज्यपाल एनएन वोहरा स्थिति पर लिखित आश्वासन नहीं देते, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी।
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