Hanuman Chalisa

चैत्र नवरात्रि विशेष : महाभारत युद्ध में साथ दिया था इन 4 देवियों ने दिया था साथ

अनिरुद्ध जोशी
शनिवार, 28 मार्च 2020 (15:28 IST)
भगवान श्रीकृष्ण को हर समय एक देवी साथ देती थी। महाभारत के युद्ध के पूर्व भी श्रीकृष्ण ने माता की पूजा की थी। आओ जानते हैं कि वे कौनसी देवी थी।
 
 
काली, हरसिद्धि और बगलामुखी : महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण की प्रेरणा पर अर्जुन ने कई जगह जाकर शक्ति की साधना की थी। उनकी साधना के वरदान स्वरूप शक्ति के विभिन्न रूपों ने पांडवों की मदद की थी। उन्हीं शक्ति में से एक माता काली दस महाविद्याओं में से प्रथम है जिन्हें देवी दुर्गा की महामाया कहा गया है। उन्होंने भी महाभारत युद्ध में पांडव पक्ष की मदद की थी। कहते हैं कि युद्ध में विजय की कामना से अर्जुन और श्रीकृष्ण ने उज्जैन में हरसिद्ध माता और नलखेड़ा में बगलामुखी माता का पूजन भी किया था। वहां उन्हें युद्ध में विजयी भव का वरदान मिला था।
 
 
विंध्यवासिनी देवी : मान्यता है कि महाभारत युद्ध के एक रात पहले अर्जुन ने माता दुर्गा की आराधना की थी। माता ने प्रकट होकर उन्हें विजयी श्री का वरदान दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि हे अर्जुन तुम्हें विजय श्री के वरदान की जरूरत नहीं क्योंकि जहां धर्म होगा वहीं वासुदेव श्रीकृष्ण होंगे और जहां वे होंगे वहां विजयी ही होगी।  

 
भगवान् श्रीकृष्ण की परदादी मारिषा एवं सौतेली मां रोहिणी (बलराम की मां) दोनों ही नाग जनजाति की थीं। भगवान श्री कृष्ण की माता का नाम देवकी था। भगवान श्री कृष्ण से जेल में बदली गई यशोदापुत्री का नाम एकानंशा था, जो आज विंध्यवासिनी देवी के नाम से पूजी जातीं हैं। श्रीमद्भागवत में नंदजा देवी कहा गया है इसीलिए उनका अन्य नाम कृष्णानुजा है।इसका अर्थ यह की वे भगवान श्रीकृष्ण की बहन थीं। इस बहन ने श्रीकृष्ण की जीवनभर रक्षा की थी।

 
श्रीमद्भागवत पुराण की कथा अनुसार देवकी के आठवें गर्भ से जन्में श्रीकृष्ण को वसुदेवजी ने कंस से बचाने के लिए रातोंरात यमुना नदी को पार गोकुल में नन्दजी के घर पहुंचा दिया था तथा वहां यशोदा के गर्भ से पुत्री के रूप में जन्मीं भगवान की शक्ति योगमाया को चुपचाप वे मथुरा के जेल में ले आए थे। बाद में जब कंस को देवकी की आठवीं संतान के जन्म का समाचार मिला तो वह कारागार में पहुंचा। उसने उस नवजात कन्या को पत्थर पर पटककर जैसे ही मारना चाहा, वह कन्या अचानक कंस के हाथों से छूटकर आकाश में पहुंच गई और उसने अपना दिव्य स्वरूप प्रदर्शित कर कंस के वध की भविष्यवाणी की और अंत में वह भगवती विन्ध्याचल वापस लौट गई।

 
कहते हैं कि योगमाया ने यशोदा के गर्भ से जन्म लिया था। इनके जन्म के समय यशोदा गहरी निद्रा में थीं और उन्होंने इस बालिका को देखा नहीं था। जब आंख खुली तो उन्होंने अपने पास पुत्र को पाया जो कि कृष्ण थे। हालांकि गर्गपुराण के अनुसार भगवान कृष्ण की मां देवकी के सातवें गर्भ को योगमाया ने ही बदलकर कर रोहिणी के गर्भ में पहुंचाया था, जिससे बलराम का जन्म हुआ। बाद में योगमाया ने यशोदा के गर्भ से जन्म लिया था। इन्हीं योगमाया ने कृष्ण के साथ योगविद्या और महाविद्या बनकर कंस, चाणूर और मुष्टिक आदि शक्तिशाली असुरों का संहार कराया, जो कंस के प्रमुख मल्ल माने जाते थे।

 
श्रीमद्भागवत पुरा में देवी योगमाया को ही विंध्यवासिनी कहा गया है जबकि शिवपुराण में उन्हें सती का अंश बताया गया है। भारत में विंध्यवासिनी देवी का चमत्कारिक मंदिर विंध्याचल की पहाड़ी श्रृंखला के मध्य (मिर्जापुर, उत्तर) पतित पावनी गंगा के कंठ पर बसा हुआ है। प्रयाग एवं काशी के मध्य विंध्याचल नामक तीर्थ है जहां मां विंध्यवासिनी निवास करती हैं। यह तीर्थ भारत के उन 51 शक्तिपीठों में प्रथम और अंतिम शक्तिपीठ है जो गंगा तट पर स्थित है। यहां तीन किलोमीटर के दायरे में अन्य दो प्रमुख देवियां भी विराजमान हैं। निकट ही कालीखोह पहाड़ी पर महाकाली तथा अष्टभुजा पहाड़ी पर अष्टभुजी देवी विराजमान हैं। हालांकि कुछ विद्वान इस 51 शक्तिपीठों में शामिल नहीं करते हैं लेकिन 108 शक्तिपीठों में जरूर इनका नाम मिलता है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

बुध की उल्टी चाल शुरू: 29 जून से इन राशियों को मिलेगा लाभ, किन्हें रहना होगा सावधान?

3 दिन बाद बुध का कर्क राशि में प्रवेश, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत, खुलेंगे सफलता के नए द्वार

नरेंद्र मोदी के बाद अगला पीएम अमित शाह या योगी आदित्यनाथ, सटीक भविष्यवाणी

सौर आषाढ़ मास 2026: जानिए इसका धार्मिक महत्व और विशेष परंपराएं

मंगल का शुक्र की राशि में प्रवेश, 3 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान, बढ़ सकती हैं ये परेशानियां

सभी देखें

धर्म संसार

30 June Birthday: आपको 30 जून, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 30 जून 2026: मंगलवार का पंचांग और शुभ समय

Guru Hargobind Jayanti 2026: गुरु हरगोविंद सिंह जयंती: जानें उनके बताए सिद्धांत, जो आज भी हैं प्रासंगिक

Ashadha Month 2026: आषाढ़ माह प्रारंभ 2026: जानिए इस माह का महत्व और क्या करें, क्या नहीं करें?

अमरनाथ यात्रा 2026: निकलने से पहले जरूर कर लें ये 5 जरूरी तैयारियां, तभी रहेगा सफर सुरक्षित

अगला लेख