Dharma Sangrah

Skanda Mata : पांचवीं देवी स्कंद माता इस फल के प्रसाद से होंगी बहुत प्रसन्न

Webdunia
शुभ रंग: श्वेत (सफ़ेद) 
 
माता का स्वरूप
 
स्कंदमाता की दाहिनी भुजा में कमल पुष्प, बाई भुजा वरमुद्रा में है। इनकी तीन आंखें व चार भुजाएं हैं। वर्ण पूर्णत: शुभ कमलासन पर विराजित तथा  सिंह इनका वाहन है। इन्हें पद्मासन देवी भी कहा जाता है। पुत्र स्कन्द इनकी गोद में बैठे हैं। 
 
आराधना महत्व
 
शास्त्रों में मां स्कंदमाता की आराधना का काफी महत्व बताया गया है। इनकी उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। भक्त को मोक्ष मिलता है। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है। अतः मन को एकाग्र रखकर और पवित्र रखकर इस देवी की आराधना करने वाले साधक या भक्त को भवसागर पार करने में कठिनाई नहीं आती है। 
 
स्कंदमाता (स्कन्द माता) की उपासना से भक्त की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस मृत्युलोक मे ही उसे परम शांति व सुख का अनुभव होने लगता है, मोक्ष मिलता है। सूर्य मंडल की देवी होने के कारण इनका उपासक आलोकिक तेज एवं कांति से संपन्न हो जाता है। साधक को अभिष्ट वस्तु की प्राप्ति होती है तथा उसे महान ऐश्वर्य मिलता है। 
 
पंचमी तिथि के दिन पूजा करके भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद ब्राह्मण को दे देना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

हिंदू पुराण, ज्योतिष, नास्त्रेदमस, बाबा वेंगा और भविष्‍य मालिका की 6 कॉमन भविष्यवाणियां

सूर्य का मीन राशि में गोचर: इन 6 राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की और धन के नए रास्ते

चैत्र नवरात्रि 2026: घट स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है? जानें कलश स्थापना का सही समय

हिंदू नववर्ष 2083 के कौन है वर्ष का राजा और मंत्री, किन राशियों पर रहेगा शुभ प्रभाव

विक्रम संवत सबसे प्राचीन होने के बाद भी भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर क्यों नहीं बना? जानिए 3 बड़े कारण

सभी देखें

धर्म संसार

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (19 मार्च, 2026)

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 19 मार्च 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

नवरात्रि में करें पीली सरसों का यह अचूक उपाय, खुल सकते हैं धन प्राप्ति के रास्ते

चैत्र नवरात्रि और गुड़ी पड़वा 2026: घटस्थापना, पूजा मुहूर्त, 9 रंग, क्या खाएं-क्या नहीं, पूरी जानकारी

वर्ष 2026 में कब है हनुमान जयंती?

अगला लेख