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वैवाहिक कानून बाहुबलियों पर लागू क्यों नहीं होते?

Webdunia
- डॉ. आदित्य नारायण शुक्ला 'विनय'
 
भारत के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने 2006 से यह नियम बना दिया है– दूसरे शब्दों में यह कानून लागू कर दिया है कि देश के प्रत्येक दंपति यानी विवाहित जोड़ों को अपना विवाह पंजीकृत (रजिस्टर्ड) कराना अनिवार्य होगा तभी उनकी शादी वैधानिक मानी जाएगी। 
 
वैसे भारत में जिनकी 4 पत्नियां या 4 से अधिक पति हैं (ऐसे कई कबीले, जातियां व धर्म-संप्रदाय के लोग भारत में रहते हैं) तो इन्हें आप दंपति या 'वैवाहिक जोड़े' कहेंगे या कुछ और क्योंकि 'जोड़ा' का अर्थ तो आमतौर से दो लोगों से होता है। मेरा अनुमान बल्कि विश्वास है कि भारत के 90% दंपतियों ने आज तक अपना विवाह रजिस्टर्ड नहीं करवाया होगा। 
 
भारत की 80% जनता तो गांवों में रहती है। इनमें से 75% दंपति लोग तो शायद ये जानते भी नहीं होंगे कि अपनी शादी रजिस्टर्ड या पंजीकृत करवा लेनी चाहिए। यदि यह मानकर चलें कि शेष 25% दंपतियों में से 5% ने रजिस्टर करवा भी लिया होगा तो शहरों में रहने वाले 20% जनसंख्या में से 5% से ज्यादा दंपतियों ने यहां भी अपनी शादी रजिस्टर नहीं करवाई होगी। पाठक बंधु, शायद आपने भी अपनी शादी रजिस्टर नहीं करवाई हो। यदि करवा ली है तो मुबारकबाद आप देश के 10% जागरूक नागरिक में आ गए।
 
मैं जब भी अमेरिका से भारत जाता हूं तो छत्तीसगढ़ में बिलासपुर-रायपुर (जहां मेरे अधिकांश रिश्तेदार और मित्र रहते हैं) के अलावा (तखतपुर-गनियारी के पास स्थित) अपने गांव नवापारा (जहां मेरे स्व. पिताजी कृषक थे और जहां हम अमेरिका-निवासी चारों भाई पले-बढ़े) अपने बालसखाओं से मिलने भी जरूर जाता हूं। 2016 में नवापारा गया तो मुझे धुन सवार हुई कि चलो पता लगाएं कि अपने गांव में कितने दंपतियों ने अपनी शादी पंजीकृत कराई है। 
 
मेरे गांव में दो हजार दंपति तो रहते ही होंगे और इनमें से अधिकांश के बाल-विवाह हुए थे। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मेरे गांव नवापारा के एक भी दंपति ने अपनी शादी रजिस्टर नहीं करवाई है। पूछने पर उन्होंने कहा- 'महराज (हमारे ग्रामीण भाई-बहन हमें इसी तरह से संबोधित करते हैं और मना करने पर भी बिना हमारा चरण छुए हमसे बात की शुरुआत नहीं करते।) शादी-ब्याह का भी पंजीयन या रजिस्ट्रेशन होता है, यह पहली बार हम आपके ही मुंह से सुन रहे हैं।
 
यही हाल छत्तीसगढ़ के शत-प्रतिशत गांवों और भारत के अधिकांश गांवों की दंपतियों का भी हो तो कोई आश्चर्य नहीं। तो अपनी शादी रजिस्टर न करने वालों इस 90% में कोई आश्चर्य नहीं होगा यदि भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, वर्तमान प्रधानमंत्री जो ‘ऑफिशियली' शादीशुदा तो हैं ही (उन्होंने चुनावी फॉर्म में इसका जिक्र भी किया है।) पूर्व प्रधानमंत्रियों, (अटलजी को छोड़कर जिनकी शादी-रजिस्ट्रेशन का सवाल ही नहीं उठता) भारतीय राज्यों के वर्तमान 28–29 मुख्यमंत्री और इतने ही राज्यपालगण भी शामिल हों।
 
फिल्मी दुनिया में शादी के कानून तोड़ने वालों की तो भरमार है। फिल्म अभिनेता धर्मेन्द्र ने अपनी शादी अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर के साथ रजिस्टर्ड करवाई है या ‘तथाकथित दूसरी पत्नी' हेमा मालिनी के साथ? उनकी पहली पत्नी प्रकाश कौर आज भी जीवित हैं। धर्मेन्द्र हिन्दू हैं और हिन्दू विवाह अधिनियम के अनुसार वे अपनी पहली पत्नी के जीवित रहते हेमा मालिनी से दूसरी शादी नहीं कर सकते थे। लेकिन उन्होंने कानून को ठेंगा दिखाकर दूसरी शादी की और कानून उन्हें और हेमा मालिनी को देखता ही रह गया। कानून तोड़ने के लिए बजाय उन्हें जेल भेजने के और उनकी दूसरी शादी को अवैध घोषित करने के भारत सरकार ने धर्मेन्द्र को (कुछ वर्ष पूर्व) पद्मभूषण देकर सम्मानित किया था। 
 
अभिनेता अनिल कपूर के बड़े भाई निर्माता-निर्देशक बोनी कपूर ने श्रीदेवी से जब दूसरी शादी की तो उनकी पहली पत्नी से उनका तलाक नहीं हुआ था। पता नहीं अब भी हुआ है या नहीं। शादी के लिए उम्र संबंधी एक कानून यह भी है कि वर की उम्र 21 वर्ष और वधू या कन्या की उम्र 18 साल से कम न हो। हिन्दी फिल्मों के प्रथम सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना ने 1973 में जब डिंपल कापड़िया से शादी की थी तो वे स्वयं तो 30 साल के थे लेकिन उनकी (तथाकथित?) पत्नी डिंपल मात्र 16 साल की थी यानी कि नाबालिग। तदनुसार यह शादी भी कानूनन अवैध थी।
 
कभी मैंने एक समाचार पढ़ा था कि एक नवदंपति में से पति के दुश्मन ने पुलिस में यह रिपोर्ट कर दी थी कि नवदंपति में से पत्नी की उम्र 18 साल से कम है अतः उनकी सुहागरात को ‘बलात्कार-कांड’ मानकर मुकदमा चलाया जाए और पति को जेल भेजा जाए। पुलिस को यह रिपोर्ट लेनी पड़ी थी, क्योंकि रिपोर्टकर्ता ने दुश्मन-पत्नी के 18 साल से कम उम्र होने के प्रमाण पेश कर दिए थे। लेकिन सुपरस्टार राजेश खन्ना के विरुद्ध किसी ने भी रिपोर्ट नहीं की थी बल्कि इस अवैध शादी में फिल्मी दुनिया के राजकपूर सहित सभी नामीगिरामी और कई राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों ने भी शिरकत की थी। 
 
अभिनेता शशि कपूर ने भी 1958 में जब ब्रिटिश युवती जेनिफर से शादी की थी तो जेनिफर तो 26 साल की थीं लेकिन स्वयं शशि कपूर मात्र 20 वर्ष के ही। आप इन सब महानुभावों की जन्म तारीखें ‘विकिपीडिया’ पर जाकर देख सकते हैं। सांसद-अभिनेत्री जयाप्रदा ने भी निर्माता श्रीकांत नाहटा के साथ शादी की है, जो पहले से ही शादीशुदा और 3 बच्चों के पिता हैं। आश्चर्य तो यह है कि नाहटा ने अपनी पहली पत्नी को आज तक तलाक नहीं दिया है और उनकी पहली पत्नी और जया में यह समझौता है कि वे दोनों ही नाहटा को पति के रूप में 'शेयर' करेंगी।
 
यदि माननीय सुप्रीम कोर्ट आज इस ‘शादी के अनिवार्य पंजीयन' कानून को देश में सख्ती से लागू कर भी दे तो धर्मेन्द्र-हेमा मालिनी जैसे लोगों पर तो इसकी आंच भी नहीं आएगी बल्कि शायद भारत सरकार अब हेमा मालिनी को भी कोई पद्म-पुरस्कार देकर सम्मानित कर कर दे। (एक शादीशुदा मर्द से शादी करने के उपलक्ष्य में...?)। अपनी शादी पंजीकृत न कराने के अपराध में तो ज्यादातर धरे- पकड़े जाएंगे। ग्रामीण, अशिक्षित या कम पढ़े-लिखे और मजदूर वर्ग के लोग जो ‘शादी-पंजीयन' का अर्थ भी नहीं जानते होंगे न कि राजनीतिक या सरकारी उच्च पदों पर बैठे, बुद्धिजीवी वर्ग या फिल्मी दुनिया के लोग।
 
इस विडंबना की तुलना इससे भी की जा सकती है कि विजय माल्या तो बैंकों के करोड़ों रुपए कर्ज के रूप में डकारकर विदेश में बैठा ऐश कर रहा है और गरीब किसान बैंकों से कर्ज छूटने के तगादे और घुड़की-चमकी सुन-सुनकर आत्महत्या कर रहे हैं। एक सवाल यह भी है कि भारत के वे मुस्लिम जिनकी 4 पत्नियां हैं, किस पत्नी के साथ अपनी शादी रजिस्टर करवाएं? पहली, दूसरी, तीसरी या चौथी? या कि जैसी उन्हें अब तक सुविधा प्राप्त है तीन बार तलाक कहने से अपनी पत्नी से छुटकारा पा लेने की, वैसे ही चार बार पंजीयन या रजिस्टर कहने से उनकी चारों पत्नियां भी अपने पति के साथ रजिस्टर हो जाएंगी? 
 
आज भी भारत में कोई सुप्रसिद्ध फिल्म कलाकार या क्रिकेट खिलाड़ी अपनी पहली पत्नी के रहते हुए भी दूसरी शादी कर ले तो कानून उसका बाल बांका भी नहीं कर सकता। प्रत्यक्षं किम् प्रमाणम्!

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