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प्रवासी हिंदी कविता : जिंदगी के चार पाए

रेखा भाटिया
pravasi poem
 
स्वास्थ, सद्‌बुद्धि, हिम्मत, मेहनत
चार पाए हैं ऐसी खटिया के  
जिन पर टिक कर
आराम से कटती है जिंदगी  
 
जब एक टूट जाए
बाकी तीनों का संतुलन भी
बिगड़ जाए अचानक से
मुश्किल में पड़ जाए जिंदगी  
 
एक छोटा, एक बड़ा हो
तब और भी गड़बड़
ना टिके, ना संभले
बिगड़ जाए संतुलित जिंदगी  
 
किस्मत के भरोसे छोड़ दो
वक्त से सड़ने-गलने लगेंगे
रख-रखाव ख्याल रख लोगे
ताउम्र टिकाऊ मजबूत रहे जिंदगी।

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