जानकी जयंती पर ऐसे करें माता स‍ीता का पूजन...

Webdunia
* जानकी नवमी : माता सीता का प्राकट्‍य दिवस 
 
* वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को सीता नवमी (जानकी जयंती) कहते हैं। 
 
*  धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी दिन माता सीता का प्राकट्य हुआ था। 
 
*  पौराणिक शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को पुष्य नक्षत्र के मध्याह्न काल में जब महाराजा जनक संतान प्राप्ति की कामना से यज्ञ की भूमि तैयार करने के लिए हल से भूमि जोत रहे थे, उसी समय पृथ्वी से एक बालिका का प्राकट्य हुआ।

ALSO READ:  जानकी स्तोत्र (‍‍हिन्दी अर्थसहित)
 
*  जोती हुई भूमि तथा हल के नोक को भी 'सीता' कहा जाता है, इसलिए बालिका का नाम 'सीता' रखा गया था। अत: इस पर्व को 'जानकी नवमी' भी कहते हैं। 
 
* इस दिन माता सीता के मंगलमय नाम 'श्री सीतायै नमः' और 'श्रीसीता-रामाय नमः' का उच्चारण करना लाभदायी रहता है। 
 
* इस व्रत को विवाहित स्त्रियां अपने पति की आयु के लिए करती हैं। 
 
* मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है एवं राम-सीता का विधि-विधान से पूजन करता है, उसे 16 महान दानों का फल, पृथ्वी दान का फल तथा समस्त तीर्थों के दर्शन का फल मिल जाता है। 
 
Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

साप्ताहिक पंचांग 31 से 06 तक, जानें अप्रैल 2025 के पहले सप्ताह के शुभ मुहूर्त

Uttarakhand : चारधाम तीर्थयात्रियों के लिए स्वास्थ्य परामर्श जारी, श्रद्धालुओं से आवश्यक दवाइयां रखने को कहा

नवरात्रि की चतुर्थ देवी मां कूष्मांडा की कथा

नवरात्रि की पांचवीं देवी मां स्कंदमाता की कथा

नवरात्रि की छठी देवी मां कात्यायनी की कथा

सभी देखें

धर्म संसार

02 अप्रैल 2025 : आपका जन्मदिन

02 अप्रैल 2025, बुधवार के शुभ मुहूर्त

अयोध्या के टॉप 5 स्थान जरूर देंखे, राम मंदिर आरती का समय, ठहरने और ट्रैवल्स की संपूर्ण जानकारी

Ram Navami 2025: कैसे मनाएं श्रीराम जन्मोत्सव

श्रीराम नवमी पर 10 लाइन में जानिए भगवान राम की महिमा और इस दिन से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण बातें

अगला लेख