Hanuman Chalisa

भीष्म एकादशी व्रत कैसे करें, जानें महत्व

WD Feature Desk
शनिवार, 8 फ़रवरी 2025 (13:25 IST)
Bhishma ekadashi importance and method: प्रतिवर्ष भीष्म एकादशी का व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष यह व्रत 08 फरवरी 2025, दिन शनिवार को पड़ रहा है। इसे जया एकादशी और अजा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसका बहुत महत्व माना जाता है। इस व्रत का पारण 09 फरवरी, सोमवार को किया जाएगा।ALSO READ: जया और विजया एकादशी में क्या है अंतर?

आइए जानते हैं भीष्म तथा जया एकादशी व्रत के बारे में...
 
महत्व: यह एकादशी भीष्म पितामह को समर्पित है, जिन्होंने अपनी मृत्यु का समय स्वयं चुना था। इस व्रत के संबंध में मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से एक हजार वर्ष तक स्वर्ग में रहने का फल मिलता है। तथा यह व्रत ब्रह्म हत्या जैसे पापों से भी मुक्ति दिलाता है। साथ ही भीष्म एकादशी का व्रत मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। इस व्रत को करने से जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है।
 
विधि:
1. भीष्म एकादशी के एक दिन पहले दशमी तिथि को सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
2. प्रातःकाल एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
3. भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
4. भगवान विष्णु की पूजा करें। उन्हें फूल, फल, धूप, दीप, पंचामृत आदि अर्पित करें।
5. भीष्म एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें।
6. उपवास पर पूरे दिन निराहार रहें। यदि संभव न हो तो फलाहार कर सकते हैं।
7. भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
8. द्वादशी के दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें और फिर द्वादशी पारण यानि भोजन ग्रहण करें।
 
विशेष बातें:
- इस व्रत में चावल और अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए।
- व्रतधारी को भगवान विष्णु की पूजा, उनके नाम, मंत्रों का जाप और एकादशी कथा का श्रवण करना चाहिए।
- इस दिन पितरों का तर्पण भी करना चाहिए।

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Jaya Ekadashi 2025: माघ मास की जया एकादशी पर जानें पूजन के शुभ मुहूर्त, विधि और पारण टाइम

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण कब लगेगा? 5 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान

ज्योतिषीय भविष्यवाणी: शनि के रेवती नक्षत्र में आते ही बदल सकते हैं देश के हालात

2026 में दुर्लभ संयोग 2 ज्येष्ठ माह, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, भारत में होंगी 3 बड़ी घटनाएं

2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण कब लगेगा? 5 राशियों पर अशुभ असर, 3 की चमकेगी किस्मत, जानें तारीख और उपाय

Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण

सभी देखें

धर्म संसार

सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश, जानें मेष से मीन तक किसे मिलेगा लाभ, राशिफल

Jyeshtha Amavasya 2026: ज्येष्ठ माह की अमावस्या का क्या है महत्व, जानिए पौराणिक कथा

Guru Pradosh Vrat 2026: गुरु प्रदोष का व्रत रखने का महत्व और विधि

Achala Ekadashi 2026: अचला एकादशी व्रत का समय, पूजा और पारण विधि

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (13 मई, 2026)

अगला लेख