rashifal-2026

सुंदर सौभाग्य का वरदान देता है हरतालिका तीज व्रत

Webdunia
हरतालिका व्रत श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हस्त नक्षत्र के दिन रखा जाता है। इस दिन कुमारी और सौभाग्यवती स्त्रियां मां पार्वती और शिवजी का पूजन करती हैं। कुमारी कन्याएं मनचाहा वर पाने की कामना से और विवाहित स्त्रियां अपने सुहाग को अखंड बनाए रखने के लिए हरतालिका व्रत करती हैं।

ALSO READ: कैसे करें हरतालिका तीज व्रत, पढ़ें पूजन विधि
 
इस व्रत के सुअवसर पर सौभाग्यवती स्त्रियां नए लाल वस्त्र पहनकर, मेंहदी लगाकर सोलह श्रृंगार करती हैं और प्रदोष काल में शुभ मुहूर्त में भगवान शिव और पार्वती का पूजन करती हैं। हरतालिका व्रत कथा सुनती हैं। शिवपुराण की कथानुसार इस पावन व्रत को सबसे पहले राजा हिमाचल की पुत्री माता पार्वती ने भगवान शिव को पतिरूप में पाने के लिए किया था।

ALSO READ: 24 अगस्त को हरतालिका तीज व्रत, यह है पूजा का शुभ मुहूर्त
 
जब राजा हिमाचल ने पार्वती का विवाह शिव से करने से मना कर दिया था तो पार्वती की सहेलियां उनका हरण करके उन्हें जंगल में ले गईं और वहां मां पार्वती ने विधि-विधान से इस व्रत को किया। मां पार्वती ने निर्जल रहकर वन में मिलने वाले फल-फूल से भगवान शिव की आराधना की। उनके तप से प्रसन्ना होकर भगवान शंकर ने उन्हें अपनी अर्द्धांगिनी बनाया और तभी से इस व्रत की महत्ता स्थापित हो गई। हिमाचल ने बहुत खोजा और पार्वती का कहीं पता नहीं चला। जब शिव से वरदान पाने के बाद माता पार्वती हिमाचल को मिली तो उन्होंने इतनी कठोर तपस्या का कारण पूछा।

ALSO READ: हरतालिका तीज व्रत के नियम, पढ़ें 12 काम की बातें
 
मां पार्वती ने अपने मन की बात कही और पुत्री के हठ के आगे राजा हिमाचल को झुकना पड़ा। जिस तरह माता-पार्वती ने इस व्रत को किया था उसी तरह इस व्रत को स्त्रियां करके शिव-गौरी कृपा प्राप्त कर सकती हैं। इस व्रत में बालू की रेत से शिव-गौरी बनाकर, फल-फूल से पूजन किया जाता है। इस व्रत की रात्रि स्त्रियां रतजगा करती हैं।
 
यह अत्यधिक कठिन व्रत माना गया है और जो स्त्रियां इसका संकल्प लेती हैं वे फिर हर वर्ष इसे पूरे मनोयोग से निभाती हैं। इस व्रत का नियम है कि इसे प्रारंभ करने के बाद छोड़ा नहीं जाता है। जिस घर में हरतालिका व्रत का पूजन होता है वहां इसकी पूजा का खंडन नहीं किया जाता है और इसे परंपरा के रूप में प्रतिवर्ष ही मनाया जाता है।
 
इस तरह करें पूजन
 
- इस व्रत में प्रदोषकाल में शिव-पार्वती का पूजन किया जाता है।
 
- हरतालिका पूजन के लिए शिव, पार्वती और गणेशजी की बालू रेत की प्रतिमा बनाई जाती है और उसका पूजन किया जाता है।
 
- भगवान शंकर को फल-फूल अर्पित करते हैं।
 
- यह व्रत निर्जला रहकर किया जाता है।
 
- अंत में सभी सामग्री को एकत्र कर पवित्र नदी एवं कुंड में विसर्जित कर दिया जाता है।

ALSO READ: हरतालिका व्रत : पढ़ें पौराणिक और प्रामाणिक कथा

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

जानिए 3 रहस्यमयी बातें: कब से हो रही है शुरू गुप्त नवरात्रि और इसका महत्व

खरमास समाप्त, मांगलिक कार्य प्रारंभ, जानिए विवाह और वाहन खरीदी के शुभ मुहूर्त

मनचाहा फल पाने के लिए गुप्त नवरात्रि में करें ये 5 अचूक उपाय, हर बाधा होगी दूर

हिंदू नववर्ष पर प्रारंभ हो रहा है रौद्र संवत्सर, 5 बातों को लेकर रहे सावधान

सावधान! सच होने वाली है भविष्यवाणी, शनि के कारण कई देशों का बदलने वाला है भूगोल, भयानक होगा युद्ध?

सभी देखें

धर्म संसार

20 January Birthday: आपको 20 जनवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

गुप्त नवरात्रि की खास साधना और पूजा विधि, जानें जरूरी नियम और सावधानियां

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 20 जनवरी 2026: मंगलवार का पंचांग और शुभ समय

मकर राशि में बना बुधादित्य और लक्ष्मी योग, इन 3 राशियों पर बरसेगा अचानक धन

Gupt Navratri: गुप्त नवरात्रि की दस महाविद्याएं और उनका महत्व

अगला लेख