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कार्तिक पूर्णिमा 2019 : देव दिवाली पर करेंगे ये 9 कार्य तो होगा अपार लाभ

अनिरुद्ध जोशी
हिन्दी पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है। इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा और देव दीपावली भी कहते हैं। दरअसल, कार्तिक मास में तीन दिवाली आती है। कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्दशी को छोटी दिवाली जिसे नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इसके बाद अमावस्या को बड़ी दिवाली मनाते हैं एवं पूर्णिमा को देव दिवाली मनाते हैं।
 
 
त्रिपुरारी पूर्णिमा : इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा इसलिए कहते हैं क्योंकि प्राचीन समय में इस तिथि पर शिवजी ने त्रिपुरासुर नाम के दैत्य का वध किया था। इसके अलावा मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर ही भगवान विष्णु ने मत्स्यावतार भी लिया था। इसी दिन सिख गुरु नानकदेवजी का जन्म भी हुआ था।

 
देव दिवाली : देव दिवाली देवता मनाते हैं। मान्यताओं के अनुसार देव दीपावली के दिन सभी देवता गंगा नदी के घाट पर आकर दीप जलाकर अपनी प्रसन्नता को दर्शाते हैं। इसीलिए इस दिन गंगा स्नान कर दीपदान का महत्व है। इस दिन दीपदान करने से लंबी आयु प्राप्त होती है।

 
इस दिन क्या करें :
1.इस दिन पवित्र नदी में स्नान करें। स्नान करने के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं।
2.स्नान के बाद दीपदान, पूजा, आरती और दान करें। 
3.इस दिन तुलसी की पूजा करें। 
5.सत्यनारायण भगवान की कथा का श्रवण करें।
6.इस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाकर ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें।
7.इस दिन हनुमान के सामने घी का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
8.इस दिन गंगा के तट पर स्नान कर दीप जलाकर देवताओं से किसी मनोकामना को लेकर प्रार्थना करें।
9.इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से लक्ष्मी सदा के लिए प्रसन्न हो जाती है।
 

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