Hanuman Chalisa

मौनी अमावस्या पर 4 ग्रहों की युति, 7 कार्य करेंगे तो होगा चमत्कार

WD Feature Desk
शनिवार, 17 जनवरी 2026 (09:13 IST)
Mauni Amavasya 2026: माघ मास की तपस्या और मौन साधना का महापर्व 'मौनी अमावस्या' इस बार अपने साथ बेहद खास और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। 18 जनवरी 2026 को पड़ने वाली यह अमावस्या महज एक तिथि नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का वह द्वार है जहाँ मौन रहकर आप स्वयं को ईश्वरीय शक्ति से जोड़ सकते हैं। इस पावन दिन को यादगार और फलदायी बनाने के लिए प्रस्तुत हैं वे 7 कार्य, जो आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
 
1. मौन की शक्ति से मुनि पद की प्राप्ति
इस दिन का सबसे बड़ा रहस्य इसके नाम में ही छिपा है। मौनी अमावस्या पर वाणी पर विराम लगाकर मन ही मन ईश्वर का स्मरण करने से व्यक्ति को 'मुनि पद' के समान पुण्य मिलता है। मौन रहकर की गई पूजा मानसिक शांति और संकल्प शक्ति को कई गुना बढ़ा देती है।
 
2. पितरों का आशीर्वाद और दोषों से मुक्ति
यह दिन पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए सर्वश्रेष्ठ है। पितृ दोष की शांति हेतु सूर्य देव को अर्घ्य दें और अपने पितरों का ध्यान करें। पीपल के वृक्ष की जड़ों में जल और मिठाई अर्पित करना आपके कुल के संकटों को दूर कर सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।
 
3. ग्रहों के 'महा योग' और गंगा स्नान का पुण्य
18 जनवरी 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से चमत्कारी है। धनु राशि में चंद्रमा और मकर राशि में चार ग्रहों का मिलन एक दुर्लभ 'महा संयोग' बना रहा है। प्रयागराज के माघ मेले में गंगा की लहरों के बीच डुबकी लगाना इस बार अनंत गुना फल देने वाला माना जा रहा है।
 
4. संगम तट पर देवताओं का सानिध्य
ऐसी मान्यता है कि मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम और गंगा जल में साक्षात देवी-देवताओं का वास होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का अर्थ है स्वयं को दैवीय ऊर्जा से सराबोर कर लेना और अपने पापों का प्रक्षालन करना।
 
5. तिल और कंबल का गुप्त दान
अमावस्या पर दान का महत्व सर्वोपरि है। स्नान के पश्चात गरीब और जरूरतमंदों को तिल के लड्डू, तेल, आंवला, कंबल या ऊनी वस्त्र भेंट करें। कड़ाके की ठंड में किया गया यह सेवा भाव न केवल पुण्य बढ़ाता है, बल्कि कुंडली के शनि और राहु दोषों को भी शांत करता है।
 
6. श्रीहरि की शरण और दीपदान
भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए आज के दिन उनके समक्ष शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ या उनके मंत्रों का जप करने से जीवन के अंधकार दूर होते हैं और श्रीहरि का वरदहस्त आपके परिवार पर बना रहता है।
 
7. पीपल की परिक्रमा और कच्चे सूत का संकल्प
अमावस्या की सुबह पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करना और उन पर कच्चा सूत लपेटना एक प्राचीन और सिद्ध परंपरा है। वृक्ष पर कच्चा दूध चढ़ाकर की गई यह पूजा दरिद्रता का नाश करती है और पितरों को तृप्ति प्रदान करती है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण कब लगेगा? 5 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान

ज्योतिषीय भविष्यवाणी: शनि के रेवती नक्षत्र में आते ही बदल सकते हैं देश के हालात

2026 में दुर्लभ संयोग 2 ज्येष्ठ माह, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, भारत में होंगी 3 बड़ी घटनाएं

2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण कब लगेगा? 5 राशियों पर अशुभ असर, 3 की चमकेगी किस्मत, जानें तारीख और उपाय

Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण

सभी देखें

धर्म संसार

वृषभ संक्रांति 2026: सूर्य के राशि परिवर्तन से 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, मिलेगा बड़ा फायदा

Banyan tree worship: वट सावित्री व्रत: बरगद के पेड़ में छिपा है अखंड सौभाग्य का रहस्य, जानें धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत के बारे में 10 महत्वपूर्ण बातें, हर महिला को जानना हैं जरूरी

Lord Shantinath jayanti: जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ की जयंती

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (14 मई, 2026)

अगला लेख