Hanuman Chalisa

क्या है पुष्य नक्षत्र और सोना खरीदारी के लिए क्यों माना जाता है शुभ

Webdunia
ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्रों में आठवां नक्षत्र पुष्य होता है, जिसे नक्षत्रों का राजा माना गया है। इस नक्षत्र के स्वामी शनि हैं जो चिरसथायित्व प्रदान करते हैं और इस नक्षत्र के देवता बृहस्पति हैं जिसका कारक सोना है। यही कारण है कि इस दिन खरीदा गया सोना शुभ और स्थायी माना जाता है। 
 
पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों में से सर्वाधिक शुभ नक्षत्र की संज्ञा दी गई है। इसमें किया गया कोई भी कार्य पुण्यदायी और तुरंत फल देने वाला होता है। पुष्य नक्षत्र का संयोग जिस वार के साथ होता है वह महायोगों  का निर्माण करता है जैसे - गुरुवार को आने पर गुरु पुष्य, रविवार को - रवि पुष्य, शनिवार के दिन शनि पुष्य, और बुधवार के दिन आने पर बुध पुष्य जैसे महायोगों का निर्माण होता है। इन विशेष योगों में खरीदी करने का विशेष महत्व माना गया है। 
 
दीपावली से पहले इस बार पुष्य नक्षत्र 31 अक्टूबर, बुधवार को आ रहा है। जो रात्रि में 3 बजकर 50 मिनट से प्रारंभ होकर 31 अक्टूबर को रात्रि 2 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इस प्रकार पुष्य नक्षत्र का संपूर्ण योग बुधवार 31 अक्टूबर के दिन रहेगा। इस दिन सोना, चांदी, बर्तन, कपड़े, जेवर, भूमि, भवन, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं आदि खरीदना शुभ होगा। 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

क्या आप भी गलत तरीके से करते हैं गायत्री मंत्र का जाप? जानें सही नियम और 21 दिनों में देखें चमत्कारी बदलाव

ओवरथिंकिंग और मानसिक तनाव से थक चुका है दिमाग? आज ही आजमाएं भगवद्गीता के ये 3 लाइफ हैक्स, तुरंत मिलेगी शांति

जून माह में रहेगी ज्येष्ठ माह की 2 एकादशियां, जानिए तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

Vat Savitri Purnima 2026: वट सावित्री पूर्णिमा व्रत का महत्व, पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

जून में कर्क राशि में बनेगा गजलक्ष्मी योग, 4 राशियों को मिलेगा अचानक से धन

सभी देखें

धर्म संसार

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (05 जून, 2026)

World Environment Day 2026: वृक्ष से जुड़े हिंदू व्रत एवं त्योहार

05 June Birthday: आपको 5 जून, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 5 जून 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

Parama Ekadashi 2026: 3 साल बाद आई परमा एकादशी, इस तरह करें पूजा और व्रत

अगला लेख