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सूर्य मेष संक्रांति 2026: इस दिन क्या करें और किन कामों से बचें?

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The image depicts worship materials and an open book on the riverbank, with a river temple, a flag, the sun, and two people bathing visible in the background.
सूर्य जब मेष राशि में संक्रमण करता है तो उसे मेष संक्रांति कहते हैं। मीन राशि से मेष राशि में सूर्य का प्रवेश होता है। सूर्य की एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति का समय सौरमास कहलाता है। यह मास प्राय: तीस दिन का होता है। सूर्य एक राशि में 30 दिन तक रहता है। सौर माह का पहला माह है मेष। इस दिन कौनसे कार्य करें और कौनसे नहीं, जानिए।
 

इस दिन क्या करते हैं?

पवित्र स्नान: 

गंगा, यमुना या गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना शरीर और आत्मा को शुद्ध करने के लिए शुभ माना जाता है।

मंदिरों का दर्शन: 

लोग मंदिरों में प्रार्थना करने और आने वाले वर्ष के लिए समृद्धि की कामना करने जाते हैं।
 

पूजा:

लोग भगवान सूर्य देव, भगवान विष्णु, भगवान शिव और देवी काली की पूजा करते हैं। नए साल के लिए आशीर्वाद लेने के लिए विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। इस दिन सूर्य पूजा का खास महत्व रहता है। सूर्य पूजा से मान-सम्मान में वृद्धि होती है। इस दिन विधिवत रूप से सूर्यदेव को अर्घ्‍य अर्पित करना चाहिए।
 

दान-पुण्य:

गरीबों और जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र, धन या अपनी श्रद्धा के अनुसार दान देना एक आम प्रथा है, जो उदारता और सद्भावना का प्रतीक है।

पारंपरिक पेय और भोजन:

ओडिशा जैसे कुछ क्षेत्रों में, आम के गूदे से बना एक विशेष पेय 'पणा/पना' तैयार किया जाता है और पिया जाता है। परिवार और दोस्तों के साथ पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया जाता है। मेष संक्रांति के दिन सत्तू और गुड़ खाया जाता है।
 

सांस्कृतिक कार्यक्रम:

कई स्थानों पर पारंपरिक नृत्य, संगीत, पतंगबाजी और मेलों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पंजाब में, बैसाखी जीवंत जुलूसों, संगीत और भांगड़ा और गिद्दा नृत्यों के साथ मनाई जाती है।
 

मांगलिक कार्य:

इस दिन से खरमास समाप्त होने से मांगलिक कार्यों की शुरुआत भी हो जाती है। विवाह, मुंडन कार्य, गृह प्रवेश, दुकान शुभारंभ आदि कार्य किए जा सकते हैं।
 

नववर्ष का उत्सव:

मिलनाडु (पुथंडु), केरल (विशु), पश्चिम बंगाल (पोहेला बोइशाख) और असम (बोहाग बिहू) जैसे राज्यों में, मेष संक्रांति या (सौर कैलेंडर के आधार पर अगले दिन) को अनूठी रीति-रिवाजों और उत्सवों के साथ पारंपरिक नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है। इसमें घरों को सजाना, विशेष व्यंजन बनाना और मंदिरों का दौरा करना शामिल है।
 

फसल उत्सव:

मेष संक्रांति को खेती से भी जोड़कर देखा जाता है। फसल की पूजा की जाती है और फिर फसल कटाई की शुरुआत होती है। मौसम के बदलाव से धरती अन्न पैदा कर रही है जिससे जीवन में खुशहाली आती है। इसलिए ऋतु-परिवर्तन तथा फसलों की भरमार होने पर यह त्योहार मनाया जाता है।
 

इस दिन किन कार्यों से बचकर रहें?

तामसिक भोजन का त्याग:

इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। सात्विक आहार मन को शुद्ध रखता है।
 

अपशब्द और विवाद:

चूंकि यह नए साल की शुरुआत है, इसलिए घर में कलह, झगड़ा या किसी को अपशब्द कहने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इस दिन जैसा व्यवहार रहता है, साल भर वैसा ही माहौल बना रहता है।
 

देर तक सोना:

संक्रांति के दिन सूर्योदय के समय स्नान और दान का विशेष महत्व है। इसलिए सूर्योदय के बहुत बाद तक सोए रहना शुभ नहीं माना जाता।
 

कर्ज का लेन-देन:

कोशिश करें कि इस दिन न तो किसी को पैसा उधार दें और न ही लें। आर्थिक मामलों में नई शुरुआत के लिए यह दिन अच्छा है, लेकिन कर्ज के बोझ से बचना चाहिए।
 

पेड़-पौधों को काटना:

हिंदू मान्यताओं में संक्रांति पर प्रकृति की पूजा होती है, इसलिए इस दिन हरे पेड़ों को काटना या नुकसान पहुंचाना वर्जित माना गया है।
 

नशे से परहेज:

किसी भी तरह के नशे या गलत आदतों से इस दिन दूर रहना चाहिए, क्योंकि यह दिन संयम और अनुशासन का प्रतीक है।

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