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Varada Chaturthi 2026: अधिकमास की वरद गणेश चतुर्थी आज, जानें महत्व, पूजा विधि और विशेष मंत्र

वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
बुधवार, 20 मई 2026 (10:55 IST)
Lord Ganesha Puja May 20, 2026: वरद विनायक चतुर्थी 20 मई 2026, बुधवार को मनाई जा रही है। यह चतुर्थी विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा के लिए प्रसिद्ध है और इसे अधिकमास चतुर्थी के रूप में भी जाना जाता है। अधिकमास के कारण यह चतुर्थी साल में किसी अन्य सामान्य चतुर्थी की तुलना में और भी पवित्र मानी जाती है।ALSO READ: अधिकमास में 3 साल बाद बन रहे 2 प्रदोष व्रत, चंद्र और शनिदोष से मुक्ति पाने का दुर्लभ मौका
 
वरद विनायक चतुर्थी पर भक्तगण भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन की पूजा में विशेष रूप से सिद्धि, समृद्धि और बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है। गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है, इसलिए इस दिन उनकी विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

अधिकमास चतुर्थी का महत्व धार्मिक ग्रंथों में भी वर्णित है। कहा जाता है कि इस दिन किए गए कोई भी धार्मिक कार्य या व्रत दोगुना फल देते हैं। भक्तजन गणेश मंत्र, आरती और भजन के माध्यम से भगवान गणेश को याद करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। इस चतुर्थी के अवसर पर भारत के विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजा और आयोजन किए जाते हैं। लोग अपने घरों में गणेश प्रतिमा की स्थापना कर इसे विधिपूर्वक सजाते हैं और पूरे दिन ध्यान और भक्ति में लीन रहते हैं।
 

यहां विनायक चतुर्थी से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं:

 

वरदा चतुर्थी तिथि और शुभ मुहूर्त (मई 2026)

ज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 19 मई 2026, 02:18 पी एम से
चतुर्थी तिथि समाप्त: 20 मई 2026, 11:06 ए एम पर। 
 
वरद चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त - 10:56 ए एम से 11:06 ए एम
चतुर्थी: 00 घण्टे 10 मिनट्स
बता दें कि विनायक चतुर्थी की पूजा दोपहर के समय की जाती है।
 
वर्जित चन्द्रदर्शन का समय - 08:43 ए एम से 11:08 पी एम
अवधि - 14 घण्टे 25 मिनट्स
 

विनायक चतुर्थी का महत्व

जैसा कि नाम से स्पष्ट है, 'विनायक' का अर्थ है विशिष्ट नायक यानी विघ्नहर्ता और बाधाओं को हरने वाला। इस दिन व्रत रखने से जीवन की सभी अड़चनें दूर होती हैं। भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के देवता हैं। विद्यार्थियों और व्यापारियों के लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा से पूजा करने से रुके हुए कार्य संपन्न होते हैं और घर में सुख-शांति आती है। यह व्रत बुद्धि और समृद्धि के साथ-साथ जीवन में सफलता का मार्ग भी दिखाता है।ALSO READ: गंगा दशहरा पर बन रहे हैं दुर्लभ योग संयोग, इस दिन करें ये 5 उपाय
 

सरल पूजा विधि

विनायक चतुर्थी पर दोपहर की पूजा का विधान है। आप इस विधि का पालन कर सकते हैं:
 
स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें।
 
स्थापना: पूजा स्थान पर गणेश जी की मूर्ति को गंगाजल से पवित्र करें। उन्हें लाल चंदन का तिलक लगाएं।
 
अर्पण: भगवान गणेश को 21 दूर्वा घास की गांठें चढ़ाएं। उन्हें लाल फूल, अक्षत और सिंदूर अर्पित करें।
 
भोग: गणेश जी के प्रिय मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
 
कथा और आरती: विनायक चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में कपूर से आरती करें।
 

विशेष मंत्र

पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी होता है:
 
मुख्य मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः।
 
कार्य सिद्धि के लिए: वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
 
दूर्वा अर्पण मंत्र: 'इदं दूर्वादलं ऊं गं गणपतये नमः'
 
विशेष सावधानी: विनायक चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन वर्जित माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा को देखने से कलंक या झूठे आरोप लगने का डर रहता है।
 
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