Hanuman Chalisa

हिरण्यगर्भ दान क्या है, कैसे किया जाता है यह, आप भी जानिए

Webdunia
हिरण्यगर्भ दान : इस दान की तैयारी और व्यवस्था तुला पुरुष दान जैसी ही होती है। दान देने वाला मृदंग के आकार या सुनहले कमल के आकार का कुंड बनाता है। इसकी ऊंचाई बहत्तर अंगुल और चौड़ाई, अड़तालीस अंगुल होनी चाहिए। इस सोने के पात्र को हिरण्यगर्भ कहा जाता है। इसे तिल के ढेर पर रखा जाता है।
 
पौराणिक मंत्रों से इस पात्र को संबोधित किया जाता है, उसे हिरण्यगर्भ (सृष्टि रचयिता) के समान माना जाता है। दान देने वाला उस पात्र के अंदर उत्तर की ओर मुंह कर बैठ जाता है।

यह गर्भ में स्थित शिशु की तरह पांच बार सांस लेने की अवधि तक उसमें बैठा रहता है। उसके हाथों में ब्रह्मा और धर्मराज की स्वर्ण प्रतिमा रहती है।

 
गुरु इस पात्र के ऊपर गर्भाधान, पुंसवन आदि के मंत्र पढ़ता है। इसके बाद मंगल बाजे बजाए जाते हैं। गुरु दानकर्ता को पात्र से बाहर निकल आने को कहता है और उसके बाकी संस्कार करता है। 
 
दान देने वाला हिरण्यगर्भ के लिए मंत्र पाठ करता है। फिर वह कहता है- पहले मैं नश्वर शरीर के रूप में मां के गर्भ में पैदा हुआ था, किंतु अब मैं गुरु के आदेश से दिव्य शरीर धारण करूंगा। यह हिरण्यगर्भ पात्र गुरु और यज्ञ कराने वालों में बांट दिया जाता है।

ALSO READ: आप नहीं जानते होंगे किंचित दान से संबंधित यह खास जानकारी

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

Muharram month 2026: मोहर्रम मास का इस्लाम धर्म में महत्व और परंपरा जानें

शुक्र की वृषभ राशि में मंगल का प्रवेश, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, धन और करियर में मिल सकता है बड़ा लाभ

गुरु का पुष्य नक्षत्र में गोचर, करें ये 5 अचूक उपाय, धन, सुख और अच्छी सेहत का मिलेगा आशीर्वाद

गुरु बदलेंगे चाल, शनि के पुष्य नक्षत्र में होगा प्रवेश; 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, 3 को लग सकता है झटका

मंगल का कृतिका नक्षत्र में प्रवेश: 4 राशियों की किस्मत में होगा बड़ा बदलाव, जानें असर

सभी देखें

धर्म संसार

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (18 जून, 2026)

18 June Birthday: आपको 18 जून, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 18 जून 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

12 वर्षों के बाद बृहस्पति का गुरु पुष्य योग के दिन पुष्‍य नक्षत्र में गोचर, तुरंत करें 5 उपाय

प्रद्युम्न चतुर्थी 2026: जानिए व्रत का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

अगला लेख