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चीनी राखियां, कहीं बन न जाए सेहत की परेशानी

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कहीं परिवार की खुशियों में खलल न डाल दें ये चीनी राखियां... 


 

देशभर में चारों ओर भाई-बहन के पवित्र त्योहार रक्षाबंधन का माहौल बन गया है। बाजारों में कई तरह  की राखियां उपलब्ध हैं। भाई-बहन के पवित्र बंधन की प्रतीक ये राखियां स्वास्थ्य के लिए घातक साबित  हो सकती हैं। ये परिवार की खुशियों में खलल डालने का काम भी कर सकती हैं।

महंगाई की मार से परेशान लोग अब सस्ते चीनी माल को तरजीह दे रहे हैं। अच्छी‍ व सुंदर चीनी राखी महज दस-पंद्रह रुपए में मिल रही है, तो फिर देसी राखी कोई भला क्यों खरीदेगा। पहले तो हाथ से बनने वाली राखियों की खूब बिक्री होती थी, लेकिन ग्राहक के बदलते नजरिए की वजह से हाथ से बनी राखियां आज बेबस और बेकार-सी हो गई हैं। 

कम लागत में ज्यादा  कमाई और कारोबारी प्रतिस्पर्धा के दौर में राखी का कारोबार भी व्यावसायिकता से अछूता नहीं रह पाया। विशेषज्ञों की मानें तो राखियों को तैयार करने में उपयोग किए जाने वाले उत्पादों में प्रयोग होने वाले  रसायन त्वचा के साथ दूसरे कई रोगों को आमंत्रण दे सकते हैं। इससे चर्म रोग, दिमागी परेशानी, आंखों की बीमारी और पेट से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।


 
बाजार में चीन का जलवा कायम है। चीन से तैयार राखियां तो नहीं आ रहीं, पर वहां से आने वाले कच्चे  माल से स्थानीय स्तर पर राखियां तैयार की जा रही हैं। यही राखियां इन दिनों बाजार में छाई हुई हैं। 
 
चीन से आने वाले उत्पादों में टैडी बीयर, लाइट वाले प्लास्टिक के छोटे खिलौने, रंग-बिरंगे प्लास्टिक  और कच्चे धागे, प्लास्टिक के मोती-मूंगा, शीशा और ऐसे ही कई दूसरे उत्पाद शामिल हैं। इन्हें तैयार  करने में कई तरह के हानिकारक रसायनों का उपयोग किया जाता है। प्रतिस्पर्धा के कारण रसायनों की  गुणवत्ता निम्न स्तर की होती है। कई रंग भी इसके जहर को और ज्यादा बढ़ा देते हैं। 
 
इन्हीं का उपयोग राखियों में किया जा रहा है। बच्चों में राखियां बांधने और बंधवाने का ज्यादा शौक  होता है। इन रसायनों का बच्चों पर ही जल्दी प्रभाव पड़ता है। त्वचा के साथ ही खाने-पीने की चीजों के  साथ ये बच्चों के पेट तक पहुंच जाते हैं। 
 
ये रसायन छोटे बच्चों के लिए जहरीले साबित हो सकते हैं। पहले राखियों में सूत के धागों, कागज, मोटी  पॉलिथीन और फोम का उपयोग किया जाता था। इसके बाद विभिन्न तरह की लकड़ी, तुलसी, चंदन और  ऐसी ही कई चीजों का चलन बढ़ा, पर आजकल प्लास्टिक का चलन ज्यादा है। 
 
बच्चों को जी मचलाना, उल्टी, दस्त, बुखार या ऐसी ही कोई समस्या दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर को  दिखाना चाहिए।  लोगों को चाहिए कि राखी की खरीदारी करने से पहले वे यह संतुष्टि कर लें कि वह बच्चों के स्वास्थ्य के  लिए घातक साबित न हो। बच्चों के स्वास्थ्य की दृष्टि से ही चीन से प्लास्टिक के सभी तरह के खिलौनों के आयात पर बंदिश है। 
 
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