Hanuman Chalisa

जब प्रभु श्रीराम ने दिया अपने भक्त हनुमान को वरदान

Webdunia
लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान श्रीराम अयोध्या में अपने परिजनों के साथ बैठे हुए थे। श्रीराम, हनुमानजी द्वारा की गई सहायता को याद कर भावविभोर हो रहे थे। वह बोले, ' हनुमान ने संकट के समय मेरी सहायता की, लेकिन मैंने उन्‍हें कुछ भी नहीं दिया।'
 
ALSO READ: जब प्रभु राम ने दिया अपने भाई को मृत्यु का दंड
 
उन्‍होंने हनुमानजी से कहा, मैंने विभीषण को लंका का राज्य दिया। सुग्रीव को किष्किंधा का राजा और अंगद को युवराज बनाया। आज मैं तुम्हें भी कुछ देना चाहता हूं। इसलिए तुम इच्छित वर मांग सकते हो।
 
हनुमानजी निष्काम भक्ति के साकार रूप थे। उन्होंने श्रीराम से विनम्रता से कहा, प्रभु आप मुझसे बहुत प्रेम करते हैं। मुझ पर आपकी असीम कृपा है। अब और मांगकर क्या करूंगा।

ALSO READ: कैसे हुई थी हुई प्रभु श्रीराम की मृत्यु
 
लेकिन श्रीराम हनुमानजी को उस दिन कुछ न कुछ देने के लिए आकांक्षी थे। अचानक हनुमानजी ने कहा कि, भगवान आपने सभी को एक-एक पद(चरण) दिए हैं। क्या आप मुझे भी पद दे सकेंगे। श्रीराम कुछ समझ नहीं पाए, फिर भी बोले तुम्हें कौन सा पद चाहिए हनुमान? 
 
हनुमानजी अपने स्थान से उठे और उन्होंने प्रभु राम के चरण पकड़ लिए। हनुमानजी बोले, मैं इन दो पदों की हर क्षण सेवा करता रहूं, यही वरदान चाहिए।
 
श्रीराम की आंखों से अश्रु बहने लगे और उन्होंने श्री हनुमान जी को को गले लगा कर यह वरदान दिया कि जीवन भर उनकी सेवा करते रहें। 

ALSO READ: क्या आप जानते हैं भगवान श्रीराम की बहन को....
Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

क्या आप भी गलत तरीके से करते हैं गायत्री मंत्र का जाप? जानें सही नियम और 21 दिनों में देखें चमत्कारी बदलाव

ओवरथिंकिंग और मानसिक तनाव से थक चुका है दिमाग? आज ही आजमाएं भगवद्गीता के ये 3 लाइफ हैक्स, तुरंत मिलेगी शांति

जून माह में रहेगी ज्येष्ठ माह की 2 एकादशियां, जानिए तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

Vat Savitri Purnima 2026: वट सावित्री पूर्णिमा व्रत का महत्व, पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

जून में कर्क राशि में बनेगा गजलक्ष्मी योग, 4 राशियों को मिलेगा अचानक से धन

सभी देखें

धर्म संसार

04 June Birthday: आपको 04 जून, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 4 जून 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

जून 2026 में शुक्र प्रदोष व्रत कब है? कैसे करें पूजन, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और कथा

सम्राट विक्रमादित्य का विजय अभियान: क्या समुद्रगुप्त से भी बड़ा था उज्जैन के राजा का साम्राज्य?

कर्क राशि में गुरु और शुक्र की युति से बना ये खास राजयोग, 4 राशियों के लिए धनवर्षा

अगला लेख