Hanuman Chalisa

अपने भीतर के राम को पहचानिए! गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

WD Feature Desk
शुक्रवार, 4 अप्रैल 2025 (13:23 IST)
रामायण न केवल एक ऐतिहासिक ग्रंथ है, बल्कि यह हमारे भीतर चलने वाली आध्यात्मिक यात्रा का भी प्रतीक है। इसके सभी पात्र और घटना हमारे जीवन के किसी न किसी पहलू को दर्शाते हैं।ALSO READ: इस साल क्यों खास है राम नवमी? जानिए कैसे भगवान राम की कृपा से जीवन में आ सकती है समृद्धि
 
राम का अर्थ प्रकाश, दिव्यता और आत्मा से है। यह हमारे भीतर की चेतना है, जो हमें सही मार्ग पर ले जाती है। जब भीतर का प्रकाश जाग्रत होता है, तब सच्चे अर्थों में राम हमारे भीतर जन्म लेते हैं। दशरथ का अर्थ 'दस रथ' अर्थात् दस इंद्रियां- पांच ज्ञानेंद्रियां (आंख, कान, नाक, जीभ, त्वचा) और पांच कर्मेंद्रियां (हाथ, पैर, मुंह, गुदा, जननेंद्रिय) हैं।

जब ये इंद्रियां संतुलित होती हैं और कुशलता (कौशल्या) से जुड़ती हैं, तब आत्मा रूपी श्रीराम का जन्म होता है। यह दर्शाता है कि जब हम अपने इंद्रियों को नियंत्रित करते हैं और कुशलता से कार्य करते हैं, तब हमारे भीतर दिव्यता प्रकट होती है।
 
लक्ष्मण जागरूकता का प्रतीक हैं, जो आत्मा के साथ हमेशा रहती है। भरत चमक और प्रतिभा को दर्शाते हैं, जो हमारे भीतर की सकारात्मक ऊर्जा है। शत्रुघ्न का अर्थ 'शत्रु का नाश करने वाला' होता है। जब भीतर शत्रु उत्पन्न ही नहीं होते, तो हमें उनसे लड़ने की आवश्यकता ही नहीं होती। यह दर्शाता है कि आत्मा जब जागृत होती है, तो सभी नकारात्मक भाव समाप्त हो जाते हैं।
 
अयोध्या हमारे शरीर का प्रतीक है, जो वध करने लायक नहीं है। हमारा शरीर एक मंदिर है, जिसमें आत्मा रूपी राम का वास होता है। जब हमारा मन और आत्मा संतुलन में होते हैं, तब हम सच्चे अर्थों में अयोध्या में निवास करते हैं। सीता मन का प्रतीक हैं। जब मन लोभ और मोह के वशीभूत हो जाता है, तब अहंकार रूपी रावण उसे हरण कर लेता है। यही कारण है कि जब हम अपने मन को विषय-वासना और अहंकार में उलझा देते हैं, तो हमारा जीवन असंतुलित हो जाता है।
 
हनुमान प्राण-शक्ति के प्रतीक हैं। जब आत्मा और मन अलग हो जाते हैं, तब प्राण-शक्ति (हनुमान) ही उन्हें पुनः जोड़ने का कार्य करती है। इसलिए हनुमान को भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। जब हम अपने भीतर की ऊर्जा को सही दिशा में लगाते हैं, तब हमारी आत्मा और मन का मिलन संभव होता है।

यह पूरी कथा हमारे भीतर निरंतर घटित होती रहती है। जब हमारा मन लोभ में फँसकर भटक जाता है, तब अहंकार रूपी रावण उसे हर लेता है। लेकिन जब हम अपनी प्राण-शक्ति को जाग्रत करते हैं और आत्मा की ओर बढ़ते हैं, तब हमारा मन पुनः शुद्ध होकर अपने वास्तविक स्थान (अयोध्या) में लौट आता है।
 
रामायण केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि हमारे भीतर की आध्यात्मिक यात्रा का प्रतिबिंब है। आत्मा (राम), जागरूकता (लक्ष्मण), ऊर्जा (भरत) और मानसिक शांति (शत्रुघ्न) जब संतुलन में होते हैं, तभी जीवन में सच्चा आनंद संभव होता है। तभी वास्तविक रूप से राम नवमी का उत्सव सार्थक होता है। आइए, इस राम नवमी अपने भीतर के राम को जाग्रत करें और अपने जीवन को सत्य, प्रेम और प्रकाश से आलोकित करें।ALSO READ: हनुमान जी के 12 नामों को जपने से क्या होगा लाभ
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

होलाष्टक के 8 दिनों में किस दिन क्या करें और क्या नहीं?

Holika Dahan 2026: कर्ज से हैं परेशान, होली की रात्रि है समाधान, पढ़ें 2 चमत्कारिक उपाय

शनि ग्रह का उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में गोचर, 12 राशियों का राशिफल

होलिका दहन और होली का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व, जानें 4 काम की बातें

भारत में खाटू श्याम बाबा के 10 बड़े मंदिर, क्या आप जानते हैं 3 मूल मंदिर कहां है?

सभी देखें

धर्म संसार

25 February Birthday: आपको 25 फरवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 25 फरवरी 2026: बुधवार का पंचांग और शुभ समय

क्या एक पुत्र भी गुरु हो सकता है? माता देवहूति का अद्भुत जीवन

Holi puja remedies 2026: होलिका दहन के दिन करें मात्र 5 उपाय, संपूर्ण वर्ष रहेगा शुभ

Khagras Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण कब लगेगा? भारत में दिखेगा या नहीं, राशियों पर प्रभाव, जानिए पूरी जानकारी

अगला लेख