Hanuman Chalisa

रामलला को अर्पित करें ये 4 तरह के भोग और जानें कैसे बनाएं धनिया पंजीरी

अनिरुद्ध जोशी
Ram mandir pran pratishtha: अयोध्या में राम मंदिर बनकर तैयार है और रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्‍ठा हो रही है। इस अवसर पर आम भी रामलला को उनका प्रिय भोग और प्रसाद अर्पित करके उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं। प्रभु श्री राम को यह भोग, पकवान और प्रसाद बहुत ही प्रिय है। आओ जानते हैं प्राणप्रतिष्‍ठा के शुभ अवसार पर हम बांटे ये प्रमुख प्रसाद।

अयोध्या में श्री रामलला को खीर, धनिया पंजीरी, तुलसी दल, खोए से बना भोग बर्फी कलाकंद आदि को भोग लगाया जाएगा।
 
राम भोग :
1. केसर भात : भगवान श्रीरामजी को केसर भात, खीर, कलाकंद, बर्फी, गुलाब जामुन का भोग प्रिय है।
 
2. पूरणपोली : इसके अलावा हलुआ, पूरनपोळी, लड्डू और सिवइयां भी उनको पसंद हैं। 
 
3. पंचामृत : पंचामृत और धनिया पंजीरी दो तरह के प्रसाद उन्हें अर्पित किए जाते हैं।
 
4. पंजीरी : उन्हें धनिए का प्रसाद चढ़ाते हैं। इसे धनिया पंजीरी कहते हैं। इसे सौंठ पंजीरी भी कहते हैं। यह कई तरह से बनाई जाती है।
 
कैसे बनाएं धनिया पंजीरी:
1. जितनी प्रसाद बनाना है उस हिसाब से पीसा धनिया लेना होगा। घर के लिए ही बनाना है तो 1 कप धनिया पाउडर लें। 
 
2. अब इस धनिया पाउडर को देसी घी में मिलाकर कढ़ाई में सेंक लें।  
 
3. ठंडा होने के बाद इसमें पीसी हुई शक्कर मिला दो। 
 
4. आप चाहो तो इसमें इलाइजी, चिरौंजी या ड्रायफ्रूड भी डाल सकते हो।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण कब लगेगा? 5 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान

ज्योतिषीय भविष्यवाणी: शनि के रेवती नक्षत्र में आते ही बदल सकते हैं देश के हालात

2026 में दुर्लभ संयोग 2 ज्येष्ठ माह, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, भारत में होंगी 3 बड़ी घटनाएं

2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण कब लगेगा? 5 राशियों पर अशुभ असर, 3 की चमकेगी किस्मत, जानें तारीख और उपाय

Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण

सभी देखें

धर्म संसार

14 May Birthday: आपको 14 मई, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 14 मई 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

गुरु प्रदोष व्रत 2026: जानें महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

वास्तु टिप्स: खुशहाल घर और खुशहाल जीवन के 10 सरल उपाय vastu tips

अपरा एकादशी को क्यों कहते हैं अचला एकादशी, जानिए दोनों का अर्थ और फायदा