Hanuman Chalisa

देव प्रबोधिनी एकादशी : पौराणिक कथा और महत्व

पं. अशोक पँवार 'मयंक'
कार्तिक शुक्ल पक्ष सोमवार, 3 नंवबर 2014 को है। इस दिन से सभी शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं। लेकिन इस बार शुक्र 2 अक्टूबर के पूर्व में अस्त होकर 26 नवंबर 2014 को पश्चिम में उदय होंगे। उसके बाद से ही विवाह आदि कार्य शुरू होंगे। 
 

 
कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी देवोत्थान, तुलसी विवाह एवं भीष्म पंचक एकादशी के रूप में मनाई जाती है। दीपावली के बाद आने वाली इस एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं।
 
आगे पढ़ें देवोत्थान एकादशी-
 
 

देवोत्थान एकादशी-
 
आषाढ़ शुक्ल एकादशी की तिथि को देवशयन करते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन उठते हैं इसलिए इसे देवोत्थान (देवउठनी) एकादशी भी कहते हैं।


 
कहा जाता है कि भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी को 4 माह के लिए क्षीरसागर में शयन करते हैं। 4 महीने पश्चात वे कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। विष्णुजी के शयनकाल के 4 माह में विवाह आदि अनेक मांगलिक कार्यों का आयोजन निषेध है। हरि के जागने के पश्चात यानी भगवान विष्णु के जागने बाद ही सभी मांगलिक कार्य शुरू किए जाते हैं।
 
आगे पढ़ें पौराणिक कथा-
 

पौराणिक कथा-


 

एक बार भगवान विष्णु से उनकी प्रिया लक्ष्मीजी ने आग्रह के भाव में कहा- हे भगवान! अब आप दिन-रात जागते हैं, लेकिन एक बार सोते हैं तो फिर लाखों-करोड़ों वर्षों के लिए सो जाते हैं तथा उस समय समस्त चराचर का नाश भी कर डालते हैं इसलिए आप नियम से विश्राम किया कीजिए। आपके ऐसा करने से मुझे भी कुछ समय आराम का मिलेगा।
 
लक्ष्मीजी की बात भगवान को उचित लगी। उन्होंने कहा कि तुम ठीक कहती हो। मेरे जागने से सभी देवों और खासकर तुम्हें कष्ट होता है। तुम्हें मेरी सेवा से वक्त नहीं मिलता इसलिए आज से मैं हर वर्ष 4 मास वर्षा ऋतु में शयन किया करूंगा। मेरी यह निद्रा अल्पनिद्रा और प्रलयकालीन महानिद्रा कहलाएगी। यह मेरी अल्पनिद्रा मेरे भक्तों के लिए परम मंगलकारी रहेगी। इस दौरान जो भी भक्त मेरे शयन की भावना कर मेरी सेवा करेंगे, मैं उनके घर तुम्हारे समेत निवास करूंगा।
 
आगे पढ़ें तुलसी विवाह- 


 

 

तुलसी विवाह
 
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को तुलसी पूजन का उत्सव पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है। कहा जाता है कि कार्तिक मास में जो मनुष्य तुलसी का विवाह भगवान से करते हैं, उनके पिछले जन्मों के सब पाप नष्ट हो जाते हैं।
 
कार्तिक मास में स्नान करने वाली स्त्रियां कार्तिक शुक्ल एकादशी को शालिग्राम और तुलसी का विवाह रचाती हैं। समस्त विधि-विधानपूर्वक गाजे-बाजे के साथ एक सुंदर मंडप के नीचे यह कार्य संपन्न होता है। विवाह के समय स्त्रियां गीत तथा भजन गाती हैं।
 
मगन भई तुलसी राम गुन गाइके, मगन भई तुलसी।
सब कोऊ चली डोली पालकी रथ जुड़वाये के।।
साधु चले पांय पैया, चींटी सो बचाई के।
मगन भई तुलसी राम गुन गाइके।।
 
दरअसल, तुलसी को विष्णुप्रिया भी कहते हैं। तुलसी विवाह के लिए कार्तिक शुक्ल की नवमी ठीक तिथि है। नवमी, दशमी व एकादशी को व्रत एवं पूजन कर अगले दिन तुलसी का पौधा किसी ब्राह्मण को देना शुभ होता है। लेकिन लोग एकादशी से पूर्णिमा तक तुलसी पूजन करके 5वें दिन तुलसी का विवाह करते हैं। तुलसी विवाह की यही पद्धति बहुत प्रचलित है।
 
शास्त्रों में कहा गया है कि जिन दंपतियों के संतान नहीं होती, वे जीवन में एक बार तुलसी का विवाह करके कन्यादान का पुण्य अवश्य प्राप्त करें।


 

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

बुध का मीन राशि में प्रवेश: इन 5 राशियों के लिए बढ़ सकता है खतरा, रहें सतर्क

अगले 7 साल की डराने वाली भविष्यवाणी! क्या आने वाला है बड़ा संकट?

केदानाथ और बद्रीनाथ मंदिर धाम जाने से पहले कर लें ये जरूरी 5 तैयारियां

खप्पर योग बना खतरनाक: 4 राशियों को नुकसान, 4 को मिलेगा बड़ा लाभ

छोटा चारधाम यात्रा 2026: कब खुलेंगे केदारनाथ-बद्रीनाथ के कपाट? जानें यात्रा की पूरी तारीख

सभी देखें

धर्म संसार

18 April Birthday: आपको 18 अप्रैल, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 18 अप्रैल 2026: शनिवार का पंचांग और शुभ समय

भगवान परशुराम के बारे में 13 अनसुने तथ्य, जानकर रह जाएंगे हैरान

Akshaya Tritiya Mantra: मां लक्ष्मी की असीम कृपा पाने का दिन अक्षय तृतीया, पढ़ें धन वर्षा के 5 चमत्कारी मंत्र

मीन राशि में शनि, मंगल और बुध की युति, किन राशियों को होगा नुकसान?