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मार्गशीर्ष अमावस 2020 : पितरों की शांति के लिए अच्छा है यह दिन,जानिए पूजा का शुभ समय

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मार्गशीर्ष अमावस इस वर्ष 14 दिसंबर 2020 को है। इस माह में श्रीकृष्ण भक्ति का विशेष महत्व होता है और पितरों की पूजा का भी महत्व है। इस दिन शुभ समय में पूजा से पितरों को शांति मिलती है। 
 
शास्त्रों के अनुसार देवों से पहले पितरों को प्रसन्न करना चाहिए। जिन व्यक्तियों की पत्रिका में पितृ दोष हो, संतानहीन योग हो या फिर अन्य नवग्रह दोष हो उन्हें अमावस का उपवास अवश्य रखना चाहिए। इस उपवास को करने से मनोवांछित  की प्राप्ति होती है। विष्णु पुराण के अनुसार श्रद्धा भाव से अमावस्या का उपवास रखने से पितृगण ही तृप्त नहीं होते, अपितु ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, अश्विनी कुमार, सूर्य, अग्नि, पशु-पक्षी और समस्त भूत प्राणी भी तृप्त होकर प्रसन्न होते हैं।
 
गीता में स्वयं भगवान ने कहा है कि महीनों मे 'मैं मार्गशीर्ष माह हूं' तथा सत युग में देवों ने मार्ग-शीर्ष मास की प्रथम तिथि को ही वर्ष का प्रारंभ किया था। मार्गशीर्ष अमावस के दिन पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। स्नान के समय नमो नारायणाय या गायत्री मंत्र का उच्चारण करना फलदायी होता है। मार्गशीर्ष माह में पूरे महीने प्रात:काल समय में भजन मण्डलियां, भजन, कीर्तन करती हुई निकलती हैं।
 
मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 14 दिसंबर (सोमवार) को रात्रि 9 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। इस अमावस्या को बहुत ही विशेष माना गया है। अमावस्या की तिथि के बाद प्रतिपदा तिथि होगी।
 
इस दिन दिन में 11 बजकर 32 मिनट से 12 बजकर 14 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त है और दोपहर 3 बजकर 27 मिनट से 4 बजकर 54 मिनट तक अमृत काल मुहूर्त है। इस दौरान पितृ पूजा और शिव पूजा का शुभ फल मिलेगा। 
 
मार्गशीर्ष अमावस महत्व
 
वर्तमान ग्रह गोचर में शनि गुरु मकर राशि में गोचरस्थ हैं। यह स्थिति 57 साल बाद बन रही है। सन्‌ 1963 में पंचांग के 5 अंग जैसे थे वैसे ही 2020 में अमावस्या तिथि, जेष्ठा नक्षत्र, शूल योग, चतुष्पद करण, वृश्चिक राशि का चंद्रमा, यह अपने आप में विशिष्ट माने जाते हैं। पंचाग के पांच अंगों के साथ पंचग्रही योग विशेष प्रबलता लिए हुए हैं।
 
जिस प्रकार कार्तिक ,माघ, वैशाख आदि महीने गंगा स्नान के लिए अति शुभ एवं उत्तम माने गए हैं। उसी प्रकार मार्गशीर्ष माह में भी गंगा स्नान का विशेष फल प्राप्त होता है। मार्गशीर्ष माह की अमावस का आध्यात्मिक महत्व खूब रहा है। जिस दिन मार्गशीर्ष माह में अमावस तिथि हो, उस दिन स्नान दान और तर्पण का विशेष महत्व रहता है। अमावस तिथि के दिन व्रत करते हुए श्रीसत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा की जाती है जो अमोघ फलदायी होती है। इस दिन नदियों या सरोवरों में स्नान करने तथा साम‌र्थ्य के अनुसार दान करने से सभी पाप क्षय हो जाते हैं तथा पुण्य की प्राप्ति होती है।
 
अगहन माह
समस्त महिनों में मार्गशीर्ष श्रीकृष्ण का ही स्वरूप है। मार्गशीर्ष माह के संदर्भ में कहा गया है कि इस माह का संबंध मृगशिरा नक्षत्र से होता है। ज्योतिष अनुसार इस माह की पूर्णिमा मृगशिरा नक्षत्र से युक्त होती है जिस कारण से इस मास को मार्गशीर्ष मास कहा जाता है। इसके अतिरिक्त इस महीने को मगसर, अगहन या अग्रहायण माह भी कहा जाता है।

मार्गशीर्ष के महीने में स्नान एवं दान का विशेष महत्व होता है। श्रीकृष्ण ने गोपियां को मार्गशीर्ष माह की महत्ता बताई थी तथा उन्होंने कहा था कि मार्गशीर्ष के महीने में यमुना स्नान से मैं सहज ही प्राप्त हो जाता हूं अत: इस माह में नदी स्नान का विशेष महत्व माना गया है।
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