Festival Posters

Char Dham Yatra : छोटा चार धाम की यात्रा से होती है 1 धाम की यात्रा पूर्ण, जानें बड़ा 4 धाम क्या है?

अनिरुद्ध जोशी
शुक्रवार, 10 मई 2024 (15:45 IST)
चार धाम यात्रा, Char Dham Yatra: हर साल चार धाम की यात्रा का आयोजन वैशाख माह में होता है। देवभूमि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के लिए पहले रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इससे यात्रा आसान हो जाती है। चारधाम यात्रा करने से पहले आपके शरीर का पूर्ण स्वस्थ होना जरूरी है। चारधाम की यात्रा में माइनस डिग्री तक का तापमान दिल के मरीजों के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। चार धामों यानी यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट अलग-अलग तिथियों को खुलते हैं। यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट दर्शनों के लिए अक्षय तृतीया को खोले जाते हैं जबकि केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट खुलने की तिथि अलग होती है।
ALSO READ: उत्तराखंड में एक नहीं पांच केदारनाथ मंदिर हैं, जानिए पंचकेदार का रहस्य
1. छोटा चार धाम : बद्रीनाथ धाम में ही केदारनाथ (शिव ज्योतिर्लिंग), यमुनोत्री (यमुना का उद्गम स्थल) एवं गंगोत्री (गंगा का उद्गम स्थल) शामिल हैं। इनकी यात्रा को छोटा चार धाम यात्रा कहते हैं। बद्रीनाथ में तीर्थयात्रियों की अधिक संख्या और इसके उत्तर भारत में होने के कारण यहां के वासी इसी की यात्रा को ज्यादा महत्व देते हैं इसीलिए इसे छोटा चार धाम भी कहा जाता है। 
 
2. बड़ा चार धाम : बद्रीनाथ (उत्तराखंड), द्वारिका (गुजरात), जगन्नाथपुरी (ओड़िसा) और रामेश्वर (तमिलनाडु) को बड़ा चार धाम कहते हैं। हिन्दू धर्म में इसी की यात्रा का खास महत्व है। प्रत्येक हिन्दू को अपने जीवन में इन धामों की यात्रा जरूर करना चाहिए।
ALSO READ: 400 साल तक बर्फ में दबे रहे केदारनाथ धाम के 10 रहस्य
1. केदारनाथ : केदारनाथ और पशुपति नाथ मिलकर पूर्ण शिवलिंग बनता है। यदि केदारनाथ के दर्शन किए हैं तो पशुपतिनाथ के दर्शन करना जरूरी होता है। केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। इसे अर्द्धज्योतिर्लिंग कहते हैं। नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर को मिलाकर यह पूर्ण होता है। वर्तमान में स्थित केदारेश्वर मंदिर के पीछे सर्वप्रथम पांडवों ने मंदिर बनवाया था, लेकिन वक्त के थपेड़ों की मार के चलते यह मंदिर लुप्त हो गया। बाद में 8वीं शताब्दी में आदिशंकराचार्य ने एक नए मंदिर का निर्माण कराया, जो 400 वर्ष तक बर्फ में दबा रहा। तब इस मंदिर का निर्माण 508 ईसा पूर्व जन्मे और 476 ईसा पूर्व देहत्याग गए आदिशंकराचार्य ने करवाया था। इस मंदिर के पीछे ही उनकी समाधि है। इसका गर्भगृह अपेक्षाकृत प्राचीन है जिसे 80वीं शताब्दी के लगभग का माना जाता है। पहले 10वीं सदी में मालवा के राजा भोज द्वारा और फिर 13वीं सदी में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया।
ALSO READ: बद्रीनाथ एक नहीं 7 है, जानिए सप्त बद्री
दीपावली महापर्व के दूसरे दिन (पड़वा) के दिन शीत ऋतु में मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाते हैं। 6 माह तक दीपक जलता रहता है। पुरोहित ससम्मान पट बंद कर भगवान के विग्रह एवं दंडी को 6 माह तक पहाड़ के नीचे ऊखीमठ में ले जाते हैं। 6 माह बाद मई माह में केदारनाथ के कपाट खुलते हैं तब उत्तराखंड की यात्रा आरंभ होती है।
kedarnath
2. बद्रीनाथ धाम : हिमालय के शिखर पर स्थित बद्रीनाथ मंदिर हिन्दुओं की आस्था का बहुत बड़ा केंद्र है। यह चार धामों में से एक है। बद्रीनाथ मंदिर उत्तराखंड राज्य में अलकनंदा नदी के किनारे बसा है। यह मंदिर भगवान विष्णु के रूप में बद्रीनाथ को समर्पित है। बद्रीनाथ मंदिर को आदिकाल से स्थापित और सतयुग का पावन धाम माना जाता है। इसकी स्थापना मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने की थी। बद्रीनाथ के दर्शन से पूर्व केदारनाथ के दर्शन करने का महात्म्य माना जाता है।
ALSO READ: जानिए, क्या है केदारनाथ का इतिहास...
चार धाम में से एक बद्रीनाथ के बारे में एक कहावत प्रचलित है कि 'जो जाए बदरी, वो ना आए ओदरी'। अर्थात जो व्यक्ति बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता है, उसे पुन: उदर यानी गर्भ में नहीं आना पड़ता है। मतलब दूसरी बार जन्म नहीं लेना पड़ता है। शास्त्रों के अनुसार मनुष्‍य को जीवन में कम से कम दो बार बद्रीनाथ की यात्रा जरूर करना चाहिए।
 
मंदिर के कपाट खुलने का समय : दीपावली महापर्व के दूसरे दिन (पड़वा) के दिन शीत ऋतु में मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाते हैं। 6 माह तक दीपक जलता रहता है। पुरोहित ससम्मान पट बंद कर भगवान के विग्रह एवं दंडी को 6 माह तक पहाड़ के नीचे ऊखीमठ में ले जाते हैं। 6 माह बाद अप्रैल और मई माह के बीच केदारनाथ के कपाट खुलते हैं तब उत्तराखंड की यात्रा आरंभ होती है।
ALSO READ: केदारनाथ और बद्रीनाथ जब लुप्त हो जाएंगे तो क्या होगा, जानिए इतिहास और भविष्य
6 माह मंदिर और उसके आसपास कोई नहीं रहता है, लेकिन आश्चर्य की 6 माह तक दीपक भी जलता रहता और निरंतर पूजा भी होती रहती है। कपाट खुलने के बाद यह भी आश्चर्य का विषय है कि वैसी ही साफ-सफाई मिलती है जैसे छोड़कर गए थे।
 
केदार घाटी में दो पहाड़ हैं- नर और नारायण पर्वत। विष्णु के 24 अवतारों में से एक नर और नारायण ऋषि की यह तपोभूमि है। उनके तप से प्रसन्न होकर केदारनाथ में शिव प्रकट हुए थे। दूसरी ओर बद्रीनाथ धाम है जहां भगवान विष्णु विश्राम करते हैं। कहते हैं कि सतयुग में बद्रीनाथ धाम की स्थापना नारायण ने की थी। भगवान केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद बद्री क्षेत्र में भगवान नर-नारायण का दर्शन करने से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे जीवन-मुक्ति भी प्राप्त हो जाती है। इसी आशय को शिवपुराण के कोटि रुद्र संहिता में भी व्यक्त किया गया है।
ALSO READ: Ganga Saptami : गंगोत्री में शिवजी की जटाओं से नीचे उतरी थीं मां गंगा

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

जनवरी माह 2026 में कैसा रहेगा 12 राशियों का राशिफल

नए साल 2026 के संकल्प: क्यों 90% लोग फेल हो जाते हैं और आप कैसे सफल हो सकते हैं?

न्यू ईयर राशिफल 2026: किस राशि के लिए शुभ और किसके लिए है अशुभ?

जनवरी 2026 में 4 राशियों को होगा बड़ा फायदा

2026 में ऑनलाइन ज्योतिष (Astrology) परामर्श के लिए 10 भरोसेमंद ज्योतिष वेबसाइट्‍स

सभी देखें

धर्म संसार

04 January Birthday: आपको 04 जनवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 04 जनवरी 2026: रविवार का पंचांग और शुभ समय

जनवरी 2026 में मकर राशि में बनने वाला है त्रिग्रही योग, 5 राशियों को मिलेगा शुभ समाचार

Horoscope for January 2026: साप्ताहिक राशिफल, 05 से 11 जनवरी 2026: जानिए आपके सितारे क्या कहते हैं!

षटतिला एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा 2026 में

अगला लेख