Dharma Sangrah

3 मई को है मां बगलामुखी जयंती : चमत्कारी शक्तियां देती हैं देवी

Webdunia
3 मई 2017 को विश्व के सर्वाधिक प्राचीन बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा (मध्य प्रदेश) में माता बगलामुखी जयंती समारोह धूमधाम से मनाया जाएगा।
 
यह स्थान ( मां बगलामुखी शक्ति पीठ) नलखेड़ा में नदी के किनारे स्थित है स्वयंभू प्रतिमा है । यह शमशान क्षेत्र में स्थित हैं। कहा जाता है कि इसकी स्थापना महाभारत युद्ध के 12 वें दिन स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण के निर्देशानुसार की थी। देवी बगलामुखी तंत्र की देवी है।
 
तंत्र साधना में सिद्धि प्राप्त करने के लिए पहले देवी बगलामुखी को प्रसन्न करना पड़ता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार वैशाख शुक्ल अष्टमी को मां बगलामुखी की जयंती मनाई जाती है। भारत में मां बगलामुखी के तीन ही प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर माने गए हैं जो क्रमश: दतिया (मध्यप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल) तथा नलखेड़ा में हैं।
 
बगलामुखी जयंती का महत्व  
 
वैसाख माह को पवित्र और शुद्ध मास माना जाता है। इस माह में सारे शुभ काम किए जाते हैं। यह इस मास की विषेषता है कि शुक्ल पक्ष के द्वितीया को परशुराम जयंती, तृतीया को अक्षय तृतीया, त्रेता युग का प्रारंभ इसी दिन हुआ था। चतुर्थी को गणेश चतुर्थी, पंचमी को आदि शंकराचार्य जयंती, षष्ठी को रामानुचार्य जयंती, सप्तमी को गंगा सप्तमी, अष्टमी को बगलामुखी जयंती, नवमी को जानकी जयंती, त्रयोदशी को नरसिंह जयंती और पूर्णिमा को भगवान बुद्ध की जयंती होती है।

ALSO READ: मां बगलामुखी का शक्तिशाली मंत्र 
 
इस दिन व्रत एवं पूजा उपासना की जाती है साधक को माता बगलामुखी की निमित्त पूजा अर्चना एवं व्रत करना चाहिए। बगलामुखी जयंती पर्व देश भर में हर्षोल्लास व धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर जगह-जगह अनुष्ठान के साथ भजन संध्या एवं विश्व कल्याणार्थ महायज्ञ का आयोजन किया जाता है तथा महोत्सव के दिन शत्रु नाशिनी बगलामुखी माता का विशेष पूजन किया जाता है और रातभर भगवती जागरण होता है।
 
कौन है बगलामुखी मां
 
मां बगलामुखी जी आठवी महाविद्या हैं। इनका प्रकाट्य स्थल गुजरात के सौरापट क्षेत्र में माना जाता है। हल्दी रंग के जल से इनका प्रकट होना बताया जाता है। इसलिए, हल्दी का रंग पीला होने से इन्हें पीताम्बरा देवी भी कहते हैं। इनके कई स्वरूप हैं। इस महाविद्या की उपासना रात्रि काल में करने से विशेष सिद्धि की प्राप्ति होती है। इनके भैरव महाकाल हैं।
 
मां बगलामुखी स्तंभव शक्ति की अधिष्ठात्री हैं अर्थात यह अपने भक्तों के भय को दूर करके शत्रुओं और उनके बुरी शक्तियों का नाश करती हैं। मां बगलामुखी का एक नाम पीताम्बरा भी है इन्हें पीला रंग अति प्रिय है इसलिए इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का उपयोग सबसे ज्यादा होता है. देवी बगलामुखी का रंग स्वर्ण के समान पीला होता है अत: साधक को माता बगलामुखी की आराधना करते समय पीले वस्त्र ही धारण करना चाहिए।

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

सूर्य-राहु युति कुंभ राशि में: 1 महीने तक रहेगा ग्रहण योग, इन 3 उपायों से बचेंगी परेशानियां

Lakshmi Narayan Yoga: कुंभ राशि में बना लक्ष्मी नारायण योग, इन 5 राशियों को अचानक मिलेगा धन लाभ

कुंभ राशि में 18 साल बाद राहु का दुर्लभ संयोग, 10 भविष्यवाणियां जो बदल देंगी जीवन

शुक्र का राहु के शतभिषा नक्षत्र में गोचर, 5 राशियों को रहना होगा सतर्क

कुंभ राशि में त्रिग्रही योग, 4 राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ

सभी देखें

धर्म संसार

17 February Birthday: आपको 17 फरवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Surya Grahan 2026: आसमान में दिखेगा Ring of Fire, इन राशियों के लिए शुभ तो इन पर पड़ेगा अशुभ असर

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 17 फरवरी 2026: मंगलवार का पंचांग और शुभ समय

Mangal gochar 2026: मंगल का कुंभ राशि में गोचर, 12 राशियों की किस्मत में होंगे बड़े बदलाव

आर्ट ऑफ लिविंग के अंतरराष्ट्रीय केंद्र में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर की पावन उपस्थिति में महाशिवरात्रि पर उमड़ा आस्था का सागर

अगला लेख