Hanuman Chalisa

देवता यमराज के ये 7 मंदिर, कभी गए हैं आप यहां?

Webdunia
बुधवार, 15 जून 2016 (10:58 IST)
हिन्दू धर्म में तीन दंड नायक है यमराज, शनिदेव और भैरव। यमराज को 'मार्कण्डेय पुराण' के अनुसार दक्षिण दिशा के दिक्पाल और मृत्यु का देवता कहा गया है। यमराज का पुराणों में विचित्र विवरण मिलता है। पुराणों के अनुसार यमराज का रंग हरा है और वे लाल वस्त्र पहनते हैं। यमराज भैंसे की सवारी करते हैं और उनके हाथ में गदा होती है। स्कन्दपुराण' में कार्तिक कृष्णा त्रयोदशी को दीये जलाकर यम को प्रसन्न किया जाता है। 
यमराज के मुंशी 'चित्रगुप्त' हैं जिनके माध्यम से वे सभी प्राणियों के कर्मों और पाप-पुण्य का लेखा-जोखा रखते हैं। चित्रगुप्त की बही 'अग्रसन्धानी' में प्रत्येक जीव के पाप-पुण्य का हिसाब है। स्मृतियों के अनुसार 14 यम माने गए हैं- यम, धर्मराज, मृत्यु, अन्तक, वैवस्वत, काल, सर्वभूतक्षय, औदुम्बर, दध्न, नील, परमेष्ठी, वृकोदर, चित्र और चित्रगुप्त। आओ जानते हैं यमराज के खास मंदिरों के बारे में...
 
श्री यम देव का पहला मंदिर...
 

भरमौर का यम मंदिर  (Yamraj temple Chamba Himachal) : यमराज का यह मंदिर हिमाचल के चम्बा जिले में भरमौर नाम स्थान पर स्थित है जो एक भवन के समान है।  कहते हैं कि विधाता लिखता है, चित्रगुप्त बांचता है, यमदूत पकड़कर लाते हैं और यमराज दंड देते हैं। मान्यता हैं कि यहीं पर व्यक्ति के कर्मों का फैसला होता है। यमराज का नाम धर्मराज इसलिए पड़ा क्योंकि धर्मानुसार उन्हें जीवों को सजा देने का कार्य प्राप्त हुआ था।
यह मंदिर देखने में एक घर की तरह दिखाई देता है जहां एक खाली कक्ष है जिमें भगवान यमराज अपने मुंशी चित्रगुप्त के साथ विराजमान हैं। इस कक्ष को चित्रगुप्त का कक्ष कहा जाता है। चित्रगुप्त यमराज के सचिव हैं जो जीवात्मा के कर्मो का लेखा-जोखा रखते हैं।
 
मान्यता अनुसार जब किसी प्राणी की मृत्यु होती है तब यमराज के दूत उस व्यक्ति की आत्मा को पकड़कर सबसे पहले इस मंदिर में चित्रगुप्त के सामने प्रस्तुत करते हैं। चित्रगुप्त जीवात्मा को उनके कर्मो का पूरा ब्योरा सुनाते हैं। इसके बाद चित्रगुप्त के सामने के कक्ष में आत्मा को ले जाया जाता है। इस कमरे को यमराज की कचहरी कहा जाता है। यहां पर यमराज कर्मों के अनुसार आत्मा को अपना फैसला सुनाते हैं।
 
माना जाता है कि इस मंदिर में चार अदृश्य द्वार हैं जो स्वर्ण, रजत, तांबा और लोहे के बने हैं। यमराज का फैसला आने के बाद यमदूत आत्मा को कर्मों के अनुसार इन्हीं द्वारों से स्वर्ग या नर्क में ले जाते हैं। गरुड़ पुराण में भी यमराज के दरबार में चार दिशाओं में चार द्वार का उल्लेख किया गया है।
 
अगले पन्ने पर श्री यमदेव का दूसरा मंदिर...
 

‍यमुना-धर्मराज मंदिर विश्राम घाट, मथुरा (Yamuna Dharamraj temple Mathura): यह मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा में यमुना तट पर विश्राम घाट के पास स्थित है। इस बहन-भाई का मंदिर भी कहा जाता है क्योंकि यमुना और यमराज भगवान सूर्य के पुत्री और पुत्र थे। इस मंदिर में यमुना और धर्मराज जी की मूर्तियां एक साथ लगी हुई है।
ऐसी पौराणिक मान्यता है की जो भी भाई, भैया दूज (भाई दूज) के दिन यमुना में स्नान करके  इस मंदिर में दर्शन करता है उसे यमलोक जाने से मुक्ति मिल जाती है। इसकी पुराणों में एक कथा भी है जोकि बहन भाई दूज अर्थात यम द्वितीया के दिन सुनती है।
 
अगले पन्ने पर श्री यमदेव का तीसरा मंदिर....
 
धर्मराज मंदिर, लक्ष्मण झूला ऋषिकेश (Dharamraj temple, Rishikesh):- उत्तर प्रदेश के ऋषिकेश में स्थित यमराज का यह मंदिर भी बहुत ही प्राचीन है। यहां गर्भगृह में भगवान यमराज की स्थापित मूर्ति लिखने की मुद्रा में विराजित हैं और इसके आसपास‍ स्थित अन्य मूर्तियों को यमदूत की मूतियां माना जाता है। हालांकि यमराज के बाईं ओर एक मूर्ति स्थापित है, जो चित्रगुप्त की मूर्ति है।
 
अगले पन्ने पर श्री यमदेव का चौथा मंदिर...
 

श्रीऐमा धर्मराज मंदिर (Sri Ema Dharmaraja temple):- यह मंदिर तमिलनाडु के तंजावुर जिले में स्थित है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यह हजारों वर्ष पुराना है।
 
अगले पन्ने पर श्री यमदेव का पांचवां मंदिर...

वाराणसी का धर्मराज मंदिर : काशी में यमराज से जुड़ी अनसुनी जानकारियां छिपी हैं। मीर घाट पर मौजूद है अनादिकाल का धर्मेश्वर महादेव मंदिर जहां धर्मराज यमराज ने शिव की आराधना की थी। मान्यता है कि यम को यमराज की उपाधि यहीं पर मिली थी। धर्मराज युधिष्ठिर ने अज्ञात वास के दौरान यहां धर्मेश्वर महादेव की पूंजा की थी। मंदिर का इतिहास पृथ्वी पर गंगा अवतरण के भी पहले का है, जो काशी खंड में वर्णित है।
 
अगले पन्ने पर छठा मंदिर...
 

थिरुप्पाईन्जीली यम धर्मराज स्वामी मंदिर (Thiruppainjeeli, Manachanallur,Trichy, TamilNadu) : यह मंदिर तमिलनाडु के थिरुप्पाईन्जीली मनछानाल्लूर, त्रिची में स्‍थित है।
 
अगले पन्ने पर सातवां मंदिर...
 

श्रीचित्रगुप्त और यमराज मंदिर कोयम्बटूर (Shri Chitragupt and Yamraj temple in Coimbatore) : यमराज का यह मंदिर तमिलनाडु के कोयम्बटूर के वेल्लालूर मेन रोड पर सिंगानल्लुर में स्थित है। यहां एक खूबसूरत झील भी है।

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण कब लगेगा? 5 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान

ज्योतिषीय भविष्यवाणी: शनि के रेवती नक्षत्र में आते ही बदल सकते हैं देश के हालात

2026 में दुर्लभ संयोग 2 ज्येष्ठ माह, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, भारत में होंगी 3 बड़ी घटनाएं

2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण कब लगेगा? 5 राशियों पर अशुभ असर, 3 की चमकेगी किस्मत, जानें तारीख और उपाय

Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण

सभी देखें

धर्म संसार

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (14 मई, 2026)

14 May Birthday: आपको 14 मई, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 14 मई 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

गुरु प्रदोष व्रत 2026: जानें महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

वास्तु टिप्स: खुशहाल घर और खुशहाल जीवन के 10 सरल उपाय vastu tips

अगला लेख