भगवान विष्णु के अवतार नील वराह ने किया था इस तरह धरती को जल से मुक्त

Webdunia
मंगलवार, 7 दिसंबर 2021 (17:52 IST)
पौराणिक कथाओं की श्रृंखला में इस बार हम आपके लिए लाएं हैं भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से एक भगवान नील वराह की बहुत ही रोचक कथा, जिसे आपने अभी तक नहीं सुना होगा। आओ जानते हैं कि क्या है यह कथा।
 
 
कहते हैं कि पद्मकल्प के अंत के बाद महाप्रलय हुई। सूर्य के भीषण ताप के चलते धरती के सभी वन-जंगल आदि सूख गए। समुद्र का जल भी जल गया। ज्वालामुखी फूट पड़े। सघन ताप के कारण सूखा हुआ जल वाष्प बनकर आकाश में मेघों के रूप में स्थिर होता गया। अंत में न रुकने वाली जलप्रलय का सिलसिला शुरू हुआ। चक्रवात उठने लगे और देखते ही देखते समस्त धरती जल में डूब गई।
 
यह देख ब्रह्मा को चिंता होने लगी, तब उन्होंने जल में निवास करने वाले विष्णु का स्मरण किया और फिर विष्णु ने नील वराह रूप में प्रकट हुए। इस काल में महामानव नील वराह देव ने अपनी पत्नी नयनादेवी के साथ अपनी संपूर्ण वराही सेना को प्रकट किया और धरती को जल से बचाने के लिए तीक्ष्ण दरातों, पाद प्रहारों, फावड़ों और कुदालियों और गैतियों द्वारा धरती को समतल किया। इसके लिए उन्होंने पर्वतों का छेदन तथा गर्तों के पूरण हेतु मृत्तिका के टीलों को जल में डालकर भूमि को बड़े श्रम के साथ समतल करने का प्रयास किया।
 
यह एक प्रकार का यज्ञ ही था इसलिए नील वराह को यज्ञ वराह भी कहा गया। नील वराह के इस कार्य को आकाश के सभी देवदूत देख रहे थे। प्रलयकाल का जल उतर जाने के बाद भगवान के प्रयत्नों से अनेक सुगंधित वन और पुष्कर-पुष्करिणी सरोवर निर्मित हुए, वृक्ष, लताएं उग आईं और धरती पर फिर से हरियाली छा गई।
 
संदर्भ : वराह पुराण

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

बुध ग्रह का मीन राशि में गोचर, 4 राशियों को होगा नुकसान

होलिका दहन की रात को करें ये 5 अचूक उपाय, पूरा वर्ष रहेगा सुखमय

Meen sankranti 2025: सूर्य मीन संक्रांति कब होगी, क्या है इसका महत्व?

Holi 2025: होली का डांडा गाड़ने, सजाने और जलाने की सही विधि जानिए

चैत्र नवरात्रि कैसे है शारदीय नवरात्रि से अलग, जानिए 7 अंतर

सभी देखें

धर्म संसार

Ayodhyadham: ऋषभदेव जैन मंदिर में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव

05 मार्च 2025 : आपका जन्मदिन

05 मार्च 2025, बुधवार के शुभ मुहूर्त

कब है हनुमान जयंती 2025 में?

क्या है होली से गुजिया, बृज और श्रीकृष्ण का संबंध, जानिए रोचक इतिहास

अगला लेख