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प्रेम गीत : सुना है कि वो मुस्कुराने लगे हैं

राकेशधर द्विवेदी
सुना है कि वो मुस्कुराने लगे हैं
इशारों-इशारों में कुछ बताने लगे हैं


 

 
बात मुद्दतों से जो दिल में छुपा रखी थी
उसे लफ्जों पर वे लाने लगे हैं।
 
खोए-खोए से वे रहने लगे हैं
खुद से बातें वे करने लगे हैं
आईने में खुद की ही सूरत को देख
वो अपने से ही शरमाने लगे हैं।
 
दिल के अरमां अब ओंठों पर आने लगे हैं
वो धीरे-धीरे से गुनगुनाने लगे हैं
कोई न पूछे कि हाल क्या है दिल का
इस डर से वो नजरें छुपाने लगे हैं।
 
दिल की हसरतों को हकीकत में बदलने के लिए
मंदिेरों में वो अब जाने लगे हैं
सुना है कि वो मु्स्कुराने लगे हैं
इशारों-इशारों में कुछ बताने लगे हैं।
 
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