Hanuman Chalisa

प्रेम काव्य : इस कदर उसकी यादें सताने लगी

राकेशधर द्विवेदी
इस कदर उसकी यादें
सताने लगी,


 
वो सपने में हूर बनकर
आने लगी।
 
यह तो उसका मुझ पर
अहसान था,
वो मुझे देखकर
मुस्काने लगी।
 
चांद से अब मैं कैसे
शिकवा करूं,
वो चांदनी बनकर
गुनगुनाने लगी।
 
इस कदर उसकी यादें
सताने लगी,
वो सपने में हूर बनकर
आने लगी।
 
देखकर उसको
मुझको ऐसा लगा,
जिंदगी फिर से
गीत गाने लगी।
 
मैं न कैसे गजल
उस पर लिखूं,
वो फूल बनकर
मुस्काने लगी।
 
इस कदर उसकी यादें
सताने लगी,
वो सपने में हूर बनकर
आने लगी।
 
Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

पोहा, समोसा खाकर हो गए हैं बोर तो नाश्ते में खाएं स्प्राउट्स चाट, 5 फायदे: Healthy Breakfast Ideas

ताड़ासन शरीर को फौलादी और सुडौल बनाने वाला योगासन, इसके हैं 5 फायदे

सनातन परंपरा का यह एक नियम, जिसे अब मान रही है मॉडर्न साइंस; रोज सुबह करने से बीमारियां रहेंगी कोसों दूर

पैरों की पिंडलियों को सुडौल और पतला करने हेतु आजमाएं ये 6 असरदार उपाय

सिर्फ एक अंडा! वैज्ञानिकों ने बताया दिमाग तेज करने का 'सीक्रेट फॉर्मूला'

सभी देखें

नवीनतम

अजेय प्रताप : क्यों 'हल्दीघाटी और घास की रोटी' से कहीं बड़ा है महाराणा प्रताप का इतिहास?

Lucky Plants: घर की बालकनी में लगाएं ये 5 पौधे, खुल जाएंगे तरक्की के बंद दरवाजे

Yoga Day Essay: योग अपनाएं, स्वस्थ जीवन पाएं: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विशेष निबंध

Kids Shorts: इस तरह सीखा हनुमानजी ने आकाश में उड़ना

अमर स्वाभिमान का प्रतीक हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष