Dharma Sangrah

प्रेम कविता : गमों में मुस्कुराना सीख लो

राकेशधर द्विवेदी
गमों में मुस्कुराना
सीख लो


 
दुखों में गीत गाना
सीख लो
 
जिंदगी सुख-दुख
का संगीत है
 
इसे हर समय
मुस्कराकर गुनगुनाना
सीख लो
 
जो सपने रात्रि में
है तुमने देखे
 
सुबह होने पर
उनको भूल जाना
सीख लो
 
यह तिमिर अभी
न है जल्दी
कटने वाला
 
इसलिए गमों से
दिल लगाना
सीख लो
 
गिरना और टूटना
जिंदगी का एक
क्रम है बना
 
तो फिर टूटकर
जुड़ जाना सीख लो। 
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