Dharma Sangrah

माता पार्वती का अवतार देवी भ्रामरी

Webdunia
शनिवार, 25 जनवरी 2020 (18:21 IST)
- आर. हरिशंकर 
माता पार्वती का एक अवतार है देवी भ्रामरी। भ्रामरी को मधुमक्खियों की देवी के रूप में जाना जाता है। देवी महात्म्य में उनका उल्लेख मिलता है। देवी भागवत पुराण में संपूर्ण ब्रह्मांड के जीवों के लिए उसकी महानता दिखाई गई और उनकी सर्वोच्च शक्तियों का वर्णन मिलता है।
 
 
एक बार अरुणासुर नामक एक शक्तिशाली दानव रहता था। वह देवी और देवताओं को पसंद नहीं करता और उन्हें उनकी दुनिया से बहार निकाल कर संचालित करना चाहता था। उसने हिमालय पर जाकर भगवान ब्रह्मा की घोर तपस्या की। उसकी कठोर तपस्या के कारण भगवान ब्रह्मा ने उसे धरती और स्वर्ग पर सभी जीवित प्राणियों से उसकी रक्षा का वरदान दिया।
 
 
इस महान वरदान के कारण, वह बहुत ही घमंडी हो गया और स्वर्ग में जाकर उसने स्वर्ग लोक जीत लिया। असुर ने स्वर्ग लोक और अन्य देवलोक पर भी कब्जा कर लिया। देवताओं, ऋषियों और कई पवित्र लोगों की प्रार्थना के बाद माता पार्वती ने भ्रामरी के रूप में अवतार लिया और कई दिनों तक उस राक्षस से लड़ी और अंतत: उसका वध कर संपूर्ण ब्रह्मांड की रक्षा की।
 
 
मंदिर : 
1.श्री भ्रामरी शक्तिपीठ त्रिस्रोता, पश्चिम बंगाल।
2.श्री भ्रामरी देवी मंदिर, जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल।
3.श्री भ्रामरी माता मंदिर, नाशिक, महाराष्ट्र।
 
 
महत्वपूर्ण : 
माता भ्रामरी को मुख्य रूप से मधुमक्खियों के हमले से बचाने के लिए पूजा जाता है। वह सभी प्रकार की गंभीर बीमारियों का इलाज करती और अपने आध्यात्मिक स्पर्श से हमारे मन को शांत कर देती है और हमें एक पवित्र इंसान बना देती है। हमारे सभी अवांछित और बुरे विचारों को दिमाग से हटा दिया जाएगा और हमारा मन केवल भक्ति और उपयोगी मामलों पर ध्यान केंद्रित होगा।
 
 
दिव्य मां होने के नाते, वह हमेशा हमारी पुकार का इंतजार करती और आसानी से हमारी प्रार्थनाओं का जवाब देती और तुरंत उपस्थित होती है। लेकिन केवल एक चीज जो हमें देखनी चाहिए, वह है हमारे मन में शुद्ध भक्ति के साथ उसकी पूजा करना।
 
 
हमें जो भी समस्याएं आती हैं, हमें उससे नहीं जूझना चाहिए। हमें धैर्य से पवित्र मां की पूजा करनी चाहिए और अपने बोझ को उस पर डालना चाहिए। समय के साथ-साथ मां भ्रामरी की कृपा से धीरे-धीरे हमारे कष्ट कम हो जाएंगे। हम उनके मंदिरों में उनकी पूजा कर सकते हैं या अपने घर में उनकी तस्वीर रखकर उनकी पूजा कर सकते हैं। हम पूजा के एक भाग के रूप में उनके मंत्र और विभिन्न नामों का भी जाप कर सकते हैं।
 

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