Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

शिवजी के पास थे ये 4 खास अस्त्र, इनमें से दो को तोड़ दिया

हमें फॉलो करें शिवजी के पास थे ये 4 खास अस्त्र, इनमें से दो को तोड़ दिया

अनिरुद्ध जोशी

भगवान शिव को वैसे तो किसी अस्त्र या शस्त्र की आवश्यकता नहीं है क्योंकि उनका तीसरा नेत्र ही एक अस्त्र के समान भी कार्य करता है, परंतु फिर भी वे त्रिशूल रखते हैं। यह तो सभी जानते हैं कि वे त्रिशूल रखते हैं परंतु त्रिशूल के अलावा भी उनके पास कुछ अस्त्र शस्त्र थे जिसमें से 4 के संबंध में जानिए। 
 

पाशुपतास्त्र और फरसा भी शिव का अस्त्र है।
 
शिव धनुष :
1. शिव ने जिस धनुष को बनाया था उसकी टंकार से ही बादल फट जाते थे और पर्वत हिलने लगते थे। ऐसा लगता था मानो भूकंप आ गया हो। यह धनुष बहुत ही शक्तिशाली था। इसी के एक तीर से त्रिपुरासुर की तीनों नगरियों को ध्वस्त कर दिया गया था। इस धनुष का नाम पिनाक था। देवी और देवताओं के काल की समाप्ति के बाद इस धनुष को देवरात को सौंप दिया गया था।
 
देवताओं ने राजा जनक के पूर्वज देवरात थे। राजा जनक के पूर्वजों में निमि के ज्येष्ठ पुत्र देवरात थे। शिव-धनुष उन्हीं की धरोहरस्वरूप राजा जनक के पास सुरक्षित था। इस धनुष को भगवान शंकर ने स्वयं अपने हाथों से बनाया था। उनके इस विशालकाय धनुष को कोई भी उठाने की क्षमता नहीं रखता था। लेकिन भगवान राम ने इसे उठाकर इसकी प्रत्यंचा चढ़ाई और इसे एक झटके में तोड़ दिया।
 
2. शिवजी के पास एक ओर धनुष था। वह धनुष कंस ने मथुरा के राजगुरु से हथिया लिया था। वह धनुष कई पीढ़ियों से मथुरा के राजकुल के पास था। यह धनुष महादेवजी ने नंदी को, नंदी ने परशुराम को और परशुराम ने कंस के पूर्वजों को दिया था। ऐसे दो ही धनुष थे। एक त्रैता में श्रीराम के द्वारा तोड़ा गया था और दूसरा धनुष राजकुल के पास था जिससे त्रिपुरासुर का वध किया गया था। इस धनुष को श्रीकृष्ण ने कंस की रंगशाला में प्रवेश करके तोड़ दिया था और तभी उन्होंने कंस का वध भी कर दिया था।
 
शिव का चक्र : चक्र को छोटा, लेकिन सबसे अचूक अस्त्र माना जाता था। सभी देवी-देवताओं के पास अपने-अपने अलग-अलग चक्र होते थे। उन सभी के अलग-अलग नाम थे। शंकरजी के चक्र का नाम भवरेंदु, विष्णुजी के चक्र का नाम कांता चक्र और देवी का चक्र मृत्यु मंजरी के नाम से जाना जाता था। सुदर्शन चक्र का नाम भगवान कृष्ण के नाम के साथ अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है।
 
यह बहुत कम ही लोग जानते हैं कि सुदर्शन चक्र का निर्माण भगवान शंकर ने किया था। प्राचीन और प्रामाणिक शास्त्रों के अनुसार इसका निर्माण भगवान शंकर ने किया था। निर्माण के बाद भगवान शिव ने इसे श्रीविष्णु को सौंप दिया था। जरूरत पड़ने पर श्रीविष्णु ने इसे देवी पार्वती को प्रदान कर दिया। पार्वती ने इसे परशुराम को दे दिया और भगवान कृष्ण को यह सुदर्शन चक्र परशुराम से मिला।
 
त्रिशूल : इस तरह भगवान शिव के पास कई अस्त्र-शस्त्र थे लेकिन उन्होंने अपने सभी अस्त्र-शस्त्र देवताओं को सौंप दिए। उनके पास सिर्फ एक त्रिशूल ही होता था। यह बहुत ही अचूक और घातक अस्त्र था। त्रिशूल 3 प्रकार के कष्टों दैनिक, दैविक, भौतिक के विनाश का सूचक है। इसमें 3 तरह की शक्तियां हैं- सत, रज और तम। प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन। इसके अलावा पाशुपतास्त्र और फरसा भी शिव का अस्त्र है।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

गणतंत्र दिवस 2021 : क्या कहते हैं देश और 12 राशियों के सितारे?