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कौन कर सकता है श्राद्ध? पढ़ें विशेष जानकारी

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- आचार्य डॉ. संजय 
 

 
अपने परिवार के कल्याण हेतु पितरों का श्रद्धापूर्वक तर्पण करना चाहिए। यदि उन्हें सम्मानपूर्वक तर्पण मिलता है तो वे गृहस्थ वंशज को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। यदि उन्हें कुछ नहीं मिलता और वे निराश होकर शाप देकर लौट जाते हैं। जानिए कौन-कौन हैं श्राद्ध करने के अधिकारी... 
 
नित्य- यह श्राद्ध के दिनों में मृतक के निधन की तिथि पर किया जाता है।
 

नैमित्तिक- किसी विशेष पारिवारिक उत्सव, जैसे पुत्र जन्म पर मृतक को याद कर किया जाता है। 

काम्य- यह श्राद्ध किसी विशेष मनौती के लिए कृत्तिका या रोहिणी नक्षत्र में किया जाता है। 


 

श्राद्ध के अधिकारी : पिता का श्राद्ध पुत्र को ही करना चाहिए। पुत्र के न होने पर पत्नी श्राद्ध कर सकती है। पत्नी न होने पर सगा भाई और उसके भी अभाव में संपिंडों को श्राद्ध करना चाहिए। एक से अधिक पुत्र होने पर सबसे बड़ा पुत्र श्राद्ध करता है। पुत्री का पति एवं पुत्री का पुत्र भी श्राद्ध के अधिकारी हैं। पुत्र के न होने पर पौत्र या प्रपौत्र भी श्राद्ध कर सकते हैं। 

पुत्र, पौत्र या प्रपौत्र के न होने पर विधवा स्त्री श्राद्ध कर सकती है। पत्नी का श्राद्ध व्यक्ति तभी कर सकता है, जब कोई पुत्र न हो। पुत्र, पौत्र या पुत्री का पुत्र न होने पर भतीजा भी श्राद्ध कर सकता है। गोद लिया पुत्र भी श्राद्ध का अधिकारी माना गया है। 



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