Dharma Sangrah

श्राद्ध 2019 : जानिए, कैसे करें शुभ संकल्प, आखिर क्या है 16 दिनों का राज

Webdunia
बगैर संकल्प के किए गए देव कार्य या पितृ कार्य सर्वथा व्यर्थ हैं। संकल्प इस प्रकार किया जाता है, यथा-
 
'ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णु, ॐ नम: परमात्मने श्री पुराण पुरुषोत्तमस्य श्री विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्याद्य श्री ब्रह्मणो द्वितीय परार्धे श्री श्वेत वराह कल्पे वैवस्वत् मन्वन्तरेअष्टाविंशतितमे कलियुगे कलि प्रथम चरणे जम्बुद्वीपे भारतवर्षे भरत खण्डे आर्यावन्तार्गत ब्रह्मावर्तेक देशे पुण्यप्रदेशे (यदि विदेश में कहीं हो तो रेखांकित के स्थान पर उस देश, शहर, ग्राम का नाम बोलें।) 
 
वर्तमाने पराभव नाम संवत्सरे दक्षिणायने अमुक ऋतौ (ऋतु का नाम) महामांगल्यप्रदे मासानाम् मासोत्तमे अमुक मासे (महीने का नाम) अमुक पक्षे (शुक्ल या कृष्ण पक्ष का नाम) अमुक तिथौ (तिथि का नाम) अमुक वासरे (वार का नाम) अमुक नक्षत्रे (नक्षत्र का नाम) अमुक राशि स्‍थिते चन्द्रे (जिस राशि में चन्द्र हो का नाम) अमुक राशि स्‍थिते सूर्ये (सूर्य जिस राशि में स्थित हो का नाम) अमुक राशि स्‍थिते देवगुरौ बृहस्पति (गुरु जिस राशि में स्थित हो का नाम) अमुक गौत्रोत्पन्न (अपने गौत्र तथा स्वयं का नाम) अमुक शर्मा/ वर्मा अहं समस्त पितृ पितामहांनां नाना गौत्राणां पितरानां क्षु‍त्पिपासा निवृत्तिपूर्वकं अक्षय तृप्ति सम्पादनार्थं ब्राह्मण भोजनात्मकं सांकल्पित श्राद्धं पंचबलि कर्म च करिष्ये। हाथ में जल लेकर इतना कहकर जल छोड़ें। आमान्न यानी कच्चा भोजन देने के लिए रेखांकित के स्थान पर 'इदं अन्नं भवदभ्यो नम:' कहें।
 
अपनी भाषा में प्रार्थना करें- हे पितृगण, मेरे पास श्राद्ध के लिए उपयुक्त अन्न-धन नहीं है तो केवल श्रद्धा-भक्ति इसे आप स्वीकारें। हम आपकी संतान हैं। हमें आशीर्वाद दें तथा ग‍लतियों एवं कमियों के लिए क्षमा करें तथा पूरा करने की शक्ति प्रदान करें।
 
16 दिन ही क्यों मनाया जाता है श्राद्धपक्ष?
 
श्राद्धपक्ष और 16 दिन का संयोग 
 
पितृपक्ष पूर्णिमा से अमावस्या तक 16 दिन का होता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार हमारी मान्यता है कि प्रत्येक की मृत्यु इन 16 तिथियों को छोड़कर अन्य किसी दिन नहीं होती है। इसीलिए इस पक्ष में 16 दिन होते हैं। एक मनौवै‍ज्ञानिक पहलू यह है कि इस अवधि में हम अपने पितरों तक अपने भाव पहुंचाते हैं। 
 
चूंकि यह पक्ष वर्षाकाल के बाद आता है अत: ऐसा माना जाता है कि आकाश पूरी तरह से साफ हो गया है और हमारी संवेदनाओं और प्रार्थनाओं के आवागमन के लिए मार्ग सुलभ है। ज्योतिष और धर्मशास्त्र कहते हैं कि पितरों के निमित्त यह काल इसलिए भी श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि इसमें सूर्य कन्या राशि में रहता है और यह ज्योतिष गणना पितरों के अनुकूल होती है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

जानिए 3 रहस्यमयी बातें: कब से हो रही है शुरू गुप्त नवरात्रि और इसका महत्व

खरमास समाप्त, मांगलिक कार्य प्रारंभ, जानिए विवाह और वाहन खरीदी के शुभ मुहूर्त

मनचाहा फल पाने के लिए गुप्त नवरात्रि में करें ये 5 अचूक उपाय, हर बाधा होगी दूर

हिंदू नववर्ष पर प्रारंभ हो रहा है रौद्र संवत्सर, 5 बातों को लेकर रहे सावधान

सावधान! सच होने वाली है भविष्यवाणी, शनि के कारण कई देशों का बदलने वाला है भूगोल, भयानक होगा युद्ध?

सभी देखें

धर्म संसार

21 January Birthday: आपको 21 जनवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 21 जनवरी 2026: बुधवार का पंचांग और शुभ समय

Vastu Remedies: वास्तु दोष निवारण के सबसे असरदार 5 उपाय

नर्मदा जयंती 2026: कब है, क्यों मनाई जाती है और क्या है इसका धार्मिक महत्व?

27 साल बाद शनि का नक्षत्र परिवर्तन: 17 मई तक किन राशियों को होगा बड़ा लाभ और किसे झेलना पड़ेगा नुकसान?

अगला लेख