Hanuman Chalisa

श्रावण में जरूर पढ़ें बिल्वपत्र से जुड़ी यह शिव कथा

WD Feature Desk
प्रीति सोनी 

भगवान शि‍व के पूजा में बिल्वपत्र का अत्यधिक महत्व है। हर श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार शि‍व को बि‍ल्वपत्र अवश्य अर्पित करता है। शि‍व को बि‍ल्वपत्र चढ़ाने का धार्मिक और पौराणि‍क महत्व तो है ही, लेकिन इससे जुड़ी एक कथा भी बहुत प्रचलित है, जिसमें बेलपत्र या बिल्वपत्र की महत्ता सुनने को मिलती है।
 

 
इस कथा के अनुसार - " भील नाम का एक डाकू था। यह डाकू अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए लोगों को लूटता था। एक बार जब सावन का महीना था, भील नामक यह डाकू राहगीरों को लूटने के उद्देश्य से जंगल में गया। इसके लिए वह एक वृक्ष पर चढ़कर बैठ गया। देखते ही देखते पूरा एक दिन और पूरी रात बीत जाने पर भी उसे कोई शिकार नहीं मिला। जिस पेड़ पर वह डाकू चढ़कर छिपा था, वह बेल या बिल्व  का पेड़ था।
 

रात-दिन पूरा बीत जाने के कारण वह परेशान हो गया और बेल के पत्ते तोड़कर नीचे फेंकने लगा। उसी पेड़ के नीचे एक शिवलिंग स्थापित था। भील जो पत्ते तोड़कर नीचे फेंक रहा था, वे शि‍वलिंग पर गिर रहे थे, और इस बात से भील पूरी तरह से अनजान था।
 
भील द्वारा लगातार फेंके जा रहे बेल के पत्ते शिवलिंग पर गिरने से भगवान शिव प्रसन्न हुए और अचानक डाकू के सामने प्रकट हो गए। भगवान शि‍व ने भील डाकू से वरदान मांगने के लिए कहा, और भील का उद्धार किया।" 
 
बस उसी दिन से भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने का महत्व और अधिक बढ़ गया। और यह मान्यता प्रचलित हुई,कि बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शि‍व अति प्रसन्न होते हैं और उनकी पूजा में भक्तगण अनिवार्य रूप से बेलपत्र चढ़ाने लगे। 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

आदि शंकराचार्य का काल निर्धारण: 508 ईसा पूर्व या 788 ईस्वी में हुए थे शंकराचार्य?

अचानक बदलने वाली है इन 5 राशियों की तकदीर, ग्रहों का बड़ा संकेत

नास्त्रेदमस को टक्कर देते भारत के 7 भविष्यवक्ता, जानें चौंकाने वाली भविष्यवाणियां

मांगलिक दोष और वैवाहिक जीवन: क्या वाकई यह डरावना है या सिर्फ एक भ्रांति?

करियर का चुनाव और कुंडली का दसवां भाव: ग्रहों के अनुसार चुनें सही कार्यक्षेत्र

सभी देखें

धर्म संसार

मेष में बनने वाला है मंगलादित्य, बुधादित्य और त्रिग्रही योग: इन 5 राशियों को मिलेगा बड़ा फायदा

Chitragupta Puja: भगवान चित्रगुप्त पूजा 2026: जानिए सही तरीके और सावधानियां

Ganga Snan 2026: गंगा स्नान, पूजा विधि, आरती, चालीसा और लाभ

Guru Pushya Yoga 2026: गुरु पुष्य योग में पूजा और खरीदी का शुभ मुहूर्त और महत्व

Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी का धार्मिक महत्व, परंपरा और दान