ऐसा कौन-सा लिंग है जिसके दर्शन, पूजन, अभिषेक करने से पति-पत्नी का कलह व मनमुटाव समाप्त होता है। ऐसा लिंग केवल उज्जयिनी में 84 महादेव के अंतर्गत 18वें नंबर पर आने वाले 'कलकलेश्वर महादेव का मंदिर' जो मोदी की गली उज्जैन में स्थित है।
इसका महात्म्य पुराणोक्त स्कन्दपुराण में अवंतिका खण्ड के अंतर्गत इस प्रकार है कि विवाह के पश्चात एक बार पार्वती मां मंडप में मातृकाओं के साथ बैठी थी। उनके मध्य वह कृष्ण वर्ण की दिख रही थी, तभी भगवान शंकर ने उनसे कहा कि महाकाली- तुम आकर मेरे वामांग में बैठो। मेरे पास बैठने पर तुम ऐसी सुंदर दिखोगी, जैसे सफेद चंदन के वृक्ष के पास कोई भुजंग।
इस पर मां पार्वती रूष्ट हो गई। इस बात पर शिव-पार्वती में भयंकर बोलचाल हो गई। तभी इस कोलाहल से भूमि में से एक लिंग उत्पन्न हुआ।
लिंग के मध्य से आवाज आई, उसने कहा कि घबराने की आवश्यकता नहीं है। इस कलकलेश्वर के पूजन करने से घर में कलह नहीं होता है।
विशेष - चतुर्दशी को इसका पूजन करने से एवं श्रावण मास की आने वाली चतुर्दशी को पंचामृत, रुद्र अभिषेक करने से इस लोक और परलोक में कल्याण होता है तथा पति-पत्नी में कलह समाप्त होता है।