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श्रावण मास : धतूरा क्या है? शिव जी को क्यों पसंद है? जानिए महत्व

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datoora n lord shiva : भगवान शिव को कई सामग्रियां प्रिय हैं, जिसमें खास तौर पर आंकड़ा, जल, बिल्वपत्र, भांग, कर्पूर, दूध, चावल, चंदन, भस्म, रुद्राक्ष और धतूरा है, जिन्हें भोलेनाथ को अर्पित करने से वे अपने भक्त पर प्रसन्न होकर उनकी हर कामना पूरी करते हैं। 
 
धतूरा क्या है, जानें महत्व : धतूरा (datoora) भगवान शिव को चढ़ाया जाने वाला एक कांटेदार फल है, जो आम तौर पर जहरीला और जंगली फल माना जाता है। इसका धार्मिक महत्व इतना ज्यादा है कि धतूरे के बारे में यह कहा जाता है कि शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाते समय अपने मन और विचारों की कड़वाहट भी अर्पित करना चाहिए। इससे मन के विचार शुद्ध होने लगते हैं, तथा जीवन से कटुता दूर होती है। 
 
भगवान शिव जी का पूजन करते समय एक धतूरा शिवलिंग के ऊपर रखें, ध्यान रखें कि धतूरा अर्पित करते समय उसकी डंडी ठीक विपरीत दिशा में हो यानी कि आप जहां से भोलेनाथ को धतूरा चढ़ा रहे हो उसके विपरित दिशा में रखना उचित होता है। फिर धतूरा अर्पित करने बाद धीरे-धीरे उसके ऊपर एक लोटे से जल चढ़ाते रहें। इस प्रकार शिव जी का पूजन करके धतूरा चढ़ा देने से वे प्रसन्न होते हैं।  
 
धतूरा भोलेनाथ को क्यों पसंद है : धार्मिक ग्रथों के अनुसार भगवान शिव (Lord Shiv) को धतूरा अत्यंत प्रिय है। इसके पीछे पुराणों मे जहां इसका धार्मिक कारण बताया गया है, वहीं इसका वैज्ञानिक आधार भी है। भगवान शिव कैलाश पर्वत पर रहते हैं। यह अत्यंत ठंडा क्षेत्र है जहां ऐसे आहार और औषधि की जरूरत होती है, जो शरीर को ऊष्मा प्रदान करें। 
 
धतूरे को वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो यदि इसे सीमित मात्रा में लिया जाए तो यह औषधि का काम करता है और शरीर को अंदर से गर्म रखता है। जबकि धार्मिक दृष्टि से इसका कारण देवी भागवत‍ पुराण में बताया गया है। 
 
इस पुराण के अनुसार शिव जी ने जब सागर मंथन से निकले हलाहल विष को पी लिया तब वह व्याकुल होने लगे। तब अश्विनी कुमारों ने भांग, धतूरा, बेल आदि औषधियों से शिव जी की व्याकुलता दूर की। अत: उस समय से ही शिव जी को भांग धतूरा प्रिय है। और यही कारण है कि पूजन के अलावा इसका प्रयोग किसी भी काम में नहीं किया जाता है। 

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