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शिक्षक दिवस कविता : तकदीर जगा दी...

शम्भू नाथ
गुरुवर ने पहिचान बना दी, 
मेरी तो तकदीर जगा दी। 
 
विवेक हमारा जाग चुका है, 
हमने भी छलांग लगा दी। 
 
हर परीक्षा पास हूं करता, 
तब चूमे कदम सफलता।
 
श्रम से कभी नहीं मैं थकता,
मुझे छूती नहीं विफलता। 
 
सब मंत्रों को अभिमंत्रित करके, 
गुरुजी ज्ञान की ज्योति जला दी। 
 
विवेक हमारा जाग चुका है, 
हमने भी छलांग लगा दी। 
 
संस्कार को नीयत बताया, 
सच्चाई पर चलना सिखाया। 
 
आलस्य दूर नहीं फटकता, 
जीवन की हर बात समझा दी। 
 
विवेक हमारा जाग चुका है, 
हमने भी छलांग लगा दी।
 

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