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क्यों समय से पहले बूढ़े दिखने लगे हैं जेनरेशन Z? रिसर्च में आए चौंकाने वाले कारण

Feature Desk
why Gen Z Ageing faster: जेनरेशन Z, यानी 1995 से 2010 के बीच जन्मे युवा, आज दुनिया की एक बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये वे लोग हैं जो डिजिटल युग में पले-बढ़े हैं, जिनके लिए स्मार्टफोन और इंटरनेट जीवन का अभिन्न अंग है। हालांकि, एक चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आ रही है: विशेषज्ञ बताते हैं कि यह पीढ़ी समय से पहले बूढ़े होने की परेशानी का सामना कर रही है। उनके चेहरों पर कम उम्र में ही झुर्रियां, डार्क सर्कल और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दिखने लगी हैं। इस समय से पहले बुढ़ापे का एक प्रमुख कारण कोर्टिसोल हार्मोन को बताया जा रहा है, जिसे 'स्ट्रेस हार्मोन' के नाम से भी जाना जाता है।
 
कोर्टिसोल: तनाव का हार्मोन और उसका प्रभाव
कोर्टिसोल एक स्टेरॉयड हार्मोन है जो हमारे शरीर में एड्रेनल ग्रंथियों द्वारा निर्मित होता है। यह fight-or-flight प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, यानी तनावपूर्ण स्थितियों में शरीर को प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करता है। हालांकि, जब कोर्टिसोल का स्तर लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो यह शरीर और मन दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
 
एक रिसर्च के अनुसार, जेनरेशन Z में कोर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर ही उनके समय से पहले बूढ़े दिखने का कारण बन रहा है। क्रोनिक स्ट्रेस, या लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव, शरीर की कोशिकाओं में मौजूद टिलोमेर (Telomere) को छोटा कर देता है, जो जैविक बुढ़ापे का एक महत्वपूर्ण मार्कर है। इससे व्यक्ति में उम्र से पहले बुढ़ापे के संकेत दिखने लगते हैं, जैसे त्वचा पर झुर्रियां, रूखापन, और त्वचा की रंगत का कम होना।
 
जेनरेशन Z में कोर्टिसोल का उच्च स्तर क्यों?
यह सवाल उठता है कि आखिर जेनरेशन Z में कोर्टिसोल का स्तर इतना अधिक क्यों है? इसके पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं, जो उनकी विशिष्ट जीवनशैली और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से जुड़े हैं:
दीर्घकालिक तनाव: जेनरेशन Z को अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, करियर की अनिश्चितता, सामाजिक दबाव और वैश्विक घटनाओं के कारण उच्च स्तर के तनाव का सामना करना पड़ता है। लगातार fight-or-flight' मोड में रहने से कोर्टिसोल का उत्पादन बढ़ जाता है।
खराब नींद की आदतें: स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और स्ट्रीमिंग सेवाओं के अत्यधिक उपयोग के कारण जेनरेशन Z के युवाओं में नींद की कमी या अनियमित नींद का पैटर्न आम है। नींद की कमी कोर्टिसोल के उत्पादन को बाधित करती है, जिससे शरीर के लिए तनाव को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
अनहेल्दी आहार: जंक फूड, अत्यधिक चीनी और कैफीन का सेवन इस पीढ़ी में आम है। यह अस्वास्थ्यकर आहार भी कोर्टिसोल के स्तर को बढ़ा सकता है और हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकता है।
स्क्रीन टाइम का अत्यधिक उपयोग और सोशल मीडिया का प्रभाव: मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों पर बिताया गया अत्यधिक समय न केवल नींद को प्रभावित करता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है, जिससे तनाव बढ़ता है। सोशल मीडिया पर लगातार दूसरों से अपनी तुलना करना, 'फोमो' (FOMO - Fear of Missing Out) का अनुभव करना, साइबरबुलिंग और ऑनलाइन नकारात्मकता का सामना करना, और एक 'आदर्श' ऑनलाइन व्यक्तित्व बनाए रखने का दबाव भी चिंता और अकेलेपन को बढ़ा सकता है, जो तनाव का एक और स्रोत है। यह सब कोर्टिसोल के स्तर को बढ़ाता है और समय से पहले बुढ़ापे में योगदान देता है।
सामाजिक अलगाव (डिजिटल जुड़ाव के बावजूद): भले ही यह पीढ़ी डिजिटल रूप से अत्यधिक जुड़ी हुई हो, लेकिन वास्तविक सामाजिक संबंधों की कमी या सोशल मीडिया पर तुलनात्मक दबाव भी चिंता और अकेलेपन को बढ़ा सकता है, जो तनाव का एक और स्रोत है।
कोविड-19 का प्रभाव: कोरोना महामारी ने जेनरेशन Z के जीवन को पूरी तरह से बदल दिया। शिक्षा, सामाजिक जीवन और करियर पर पड़े इसके प्रभावों ने उनके तनाव के स्तर को और बढ़ा दिया।
 
जेनरेशन Z के लिए क्या है समाधान
खुशखबरी यह है कि समय से पहले बुढ़ापे के अधिकांश संकेत जीवनशैली से जुड़े होते हैं, जिन्हें बदला जा सकता है। कोर्टिसोल के स्तर को कम करने और समय से पहले बुढ़ापे को रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं:
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