Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

श्रीमठ बाघम्बरी के बलवीर गिरि बने 24वें महंत, नरेन्द्र गिरि की षोडशी संपन्न

Advertiesment
Shrimath Baghambari
प्रयागराज। वैभव और सम्पन्नता का प्रतीक श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी के बलबीर गिरि की ताजपोशी कर 24वें महंत घोषित किया गया। बाघम्बरी गद्दी सूत्रों ने बताया कि 5 अक्टूबर को महंत नरेन्द्र गिरि की शोडषी के बाद बलवीर गिरि की चादर ओढ़ाई का कार्यक्रम (पट्टाभिषेक) कर बाघम्बरी गद्दी के साथ ही संगम क्षेत्र स्थित बड़े हनुमान मंदिर का प्रमुख आचार्य भी होंगे। निरंजनी अखाड़े के पंचपरमेश्वरों की भी हाल ही मुहर लगा दी।

इस मौके पर पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी के साथ ही अखाड़े के सचिव रवीन्द्र पुरी,आनंद अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर बालकांनद,अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरिगिरि महराज,समेत बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
 
श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी के पहले महंत बाबा बालकेसर, श्रीमहंत ईश्वर गिरि, श्रीमहंत ओंकार गिरि, श्रीमहंत ब्रह्मा गिरि, श्रीमहंत सदानंद गिरि, श्रीमहंत राधानंद गिरि, श्रीमहंत सिद्धेश्वर गिरि, श्रीमहंत त्रिलोक गिरी, श्रीमहंत प्रकाशनंद गिरि, श्रीमहंत वैजलनाथ गिरि, श्रीमहंत सूर्य देव गिरि, श्रीमहंत लक्ष्मीनारायण गिरि, श्रीमहंत गोपालानंद, श्रीमहंत कैलाशपति, श्रीमहंत दुर्गा गिरि, श्रीमहंत देवेन्द्रानंद, श्रीमहंत नागेश्वर गिरि, श्रीमहंत शंकरानंद, श्रीमहंत विजयानंद गिरि, श्रीमहंत जगतेश्वर गिरि, श्रीमहंत विचारानंद गिरि, श्रीमहंत बलदेव गिरि, श्रीमहंत भगवान गिरि, और वर्ष 2004 से 20 सितंबर 2021 तक नरेन्द्र गिरी श्रीमहंत रहे थे। महंत नरेन्द्र गिरी के निधन के बाद उनकी वसीयत के अनुसार श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी को बलबीर गिरि के रूप में अब नया महंत मिला है।
 
नरेन्द्र गिरि की षोडशी सपन्न : साधु-संतों की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि की षोडशी कर्मकांड एवं अनुष्ठान में सभी 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों के बीच संपन्न हुआ। महंत नरेन्द्र गिरी के षोडशी कार्यक्रम में गुद्दड अखाड़े को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। गुद्दड़ अखाडे के महात्मा षोडशी संस्कारों में भोजन के उपरांत दान ग्रहण करते हैं।

गुद्दड अखाड़े से जुड़े महात्मा हरिद्वार, काशी, नाशिक, उज्जैन सहित कई शहरों में रहते हैं। षोडशी में सर्वप्रथम उन्हें भोजन करवाने के बाद भण्डारा आरंभ किया जाता है। अखाड़े से जुडे महात्मा को 16 प्रकार का दान दिया जाता है शेष अन्य महात्माओं को उचित दक्षिणा दी जाती है।
 
निरंजनी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी ने बताया कि गृहस्थ की मृत्यु के बाद उसका कर्म 13वें दिन होता है। संत-महात्मा की मृत्यु के बाद उनका कर्मकाण्ड 16वें दिन होता है।

यह परंपरा सनातनकाल से चली आ रही है। उसी परंपरा के अनुसार गृहस्थ की 13वीं में 13 ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद दान-दक्षिणा दी जाती है और उनका आदर सत्कार कर विदा किया जाता है। उन्होने बताया कि संत-महात्मा के कर्म में भी 16 ऐसे सन्यासियो को दान-दक्षिणा दी जाती है जिन्होंने अपना पिंडदान किया होता है।

इन संत-महात्माओं को नरेन्द्र गिरी की पसंद की 16 भौतिक चीजों का दान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म में गृहस्थ की मृत्यु के बाद उसके शु्द्धि के दिन महाब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है, उसी प्रकार 16वें दिन हरिद्वार के गुद्दड अखाड़े के सन्यासियों को दान-दक्षिणा दी जाती है।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

महामारी, बेरोजगारी संकट से जूझते बांग्लादेश के पर्यावरण शरणार्थी




Hanuman Chalisa In Hindi
Hanuman Chalisa In Hindi