Hanuman Chalisa

वेलेंटाइन डे: खुद को 'आई लव यू' कब कहा था?

डॉ. छाया मंगल मिश्र
खुद से भी तो प्यार करें...
 
वेलेंटाइन मना रही हो? याद करो जरा खुद को “आई लव यू” कब कहा था?
 
डव ने दीक्षा से पूछा-“आपकी फोटो देख के लोगों ने क्या कहा?”
 
“मोटी भैंस, पहले वजन कम करो फिर ये सारे कपड़े पहनना....
 
-“और आप अपनी बॉडी से क्या कहना चाहेंगी”
 
“मेरे आर्म स्टनिंग, मेरे कर्व, मेरी पूरी बॉडी स्टनिंग”
 
-डव भी मानता है, पूरी बॉडी को प्यार का हक है....
 
ये विज्ञापन है। भले ही कम्पनी का उद्देश्य कुछ भी हो, पर बात में दम है। डव के एक और विज्ञापन में लड़कियों की “कमियों” को उजागर किया है। जिसमें कहा है कि ये देश की करोड़ों लड़कियों की कहानी है। कहीं वजन,लम्बाई, रंग, बाल, नैन-नक्श, दाग जैसे कारणों से लड़के वालों के कटाक्ष, व्यंग्य, और बेचारे लाचार लड़की वाले और शर्मिंदा होती वो बगुनाह लड़की मुद्दों को उठाया। कहा- “कब तक चलेगी ये ख़ूबसूरती की बदसूरत परख।आखिर कितनी खूबसूरती काफी है?”
 
खामियां नहीं खूबियां देखिए। ये खूबसूरती-बदसूरती का खेल किसने शुरू किया होगा? किसने बनाया ये जाल? एक ऐसा जहर जो खून में जा मिला है। “प्लस साईज, डस्की कलर, कर्ली हेयर, शार्ट, टोल, स्पेशल” और भी न जाने कौन कौन से दूसरी भाषा के शब्दों से हम इन्हें ढंकने का प्रयास करते हैं।क्यों...क्यों करते हैं? कोई भी शरीर किसी दूसरे की पसंद और नापसंद का मोहताज क्यों? प्रशंसा की भूख क्यों?
 
मोटे हों, नाटे हों, लम्बे हों, पतले हों, कुछ कम हो, ज्यादा हो तो घबराना कैसा? जो इश्वर ने दिया है उसे प्रसाद और आशीर्वाद मन कर ग्रहण करें। खुद से खुद प्यार करें। हम अपने लिए जिएं और ऐसे जिएं कि दूसरों को उससे नाजायज तकलीफ न हो बस इतना ही काफी है।
 
प्रकृति की दी हुई हर चीज पर हमारा भी बराबरी का अधिकार है। कोई हमें पसंद करें न करें हम कमसे कम खुद को तो पसंद करें। असंतोषी जीवन आपको बिखेरता है।आत्मविश्वास बाहरी दिखावे और दूसरों की सच्ची झूठी तारीफों से नहीं बल्कि खुद से खुद की मोहब्बत और गुणों के साथ साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता से आता है। मस्त, खुश और जिन्दादिली से जीने की बात ही कुछ और है। खुद पर शर्मिंदा होना, कमतर समझना, दूसरों की बनाई सुन्दरता की परिभाषा पर खरे उतरने के लिए खुद की जिंदगी नरक करना कहां का न्याय है? कब तक “सजना है मुझे सजना के लिए” पर चलते रहोगी।
 
भले ही ये विज्ञापन हो, व्यवसाय बढ़ाने, ग्राहक बढ़ाने, नारी हितैषी को मुद्दा बनाने के लिए किसी भी मंशा से किया हो। पर है तो सच।जिंदगी जीने का नाम है, जिन्दादिली का नाम है। मुर्दादिल क्या खाक जिया करते हैं।झूम के नाचें-गाएं, खुशियां मनाएं।संघर्ष करें, लड़ें, अपने सम्मान,अधिकार की खातिर। पर उससे पहले खुद को पहचानें।खुद को स्वीकारें। “जैसे हैं वैसे हैं” पर गुमान कीजिए।खुद को भी तो प्यार दीजिए।हम खुद की इज्जत करेंगे तो ही दूसरे हमारा मान करेंगे।
 
तो...अब हमेशा वेलेंटाइन पहले खुद के साथ...खुद के प्यार के लिए... खुद से जबरदस्त इश्क कीजे, फिर समझिए जिंदगी कितनी खूबसूरत है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

किडनी की सफाई के लिए 3 घरेलू उपाय, डॉक्टर की सलाह से आजमाएं

Summer diet plan: गर्मी से बचने के लिए जानें आयुर्वेदिक पेय और डाइट प्लान

Nautapa and health: नौतपा में ऐसे रखें सेहत का ध्यान, जानें 10 सावधानियां

Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण

cold water: ज्यादा ठंडा पानी पीना सही है या गलत? जानें सच

सभी देखें

नवीनतम

भारतीय नौसेना के लिए जर्मन पनडुब्बियां, जो मुंबई में बनेंगी

भोजशाला: सत्य अतीत, सनातन की न्यायिक जीत

World Telecommunication Day 2026: विश्व दूरसंचार दिवस क्यों मनाया जाता है?

International Family Day: अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस, जानें डिजिटल युग में परिवार के साथ जुड़ाव बनाए रखने के तरीके

किडनी की सफाई के लिए 3 घरेलू उपाय, डॉक्टर की सलाह से आजमाएं

अगला लेख