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घर की नैऋत्य दिशा होती है खतरनाक, जानिए 7 खास बातें

अनिरुद्ध जोशी
दक्षिण और पश्चिम दिशा के मध्य के स्थान को नैऋत्य कहा गया है। यह दिशा नैऋत देव के आधिपत्य में है। इस दिशा के स्वामी राहु और केतु हैं। अत: इस दिशा का विशेष ध्यान देना चाहिए। आओ जानते हैं कि इस दिशा में क्या होना चाहिए और क्या नहीं।
 
ज्योतिष में नैऋत्य कोण का अधिष्ठाता ग्रह राहु है और यह कृष्ण वर्ण का एक क्रूर ग्रह है। कुण्डली में इसकी स्थिति के आधार पर गुप्त युक्ति बल, कष्ट और त्रुटियों का विचार किया जाता है।
 
 
दक्षिण-पश्चिम दिशा (नैऋत्य दिशा) : 
 
1. इस दिशा में पृथ्वी तत्व की प्रमुखता है इसलिए इस स्थान को ऊंचा और भारी रखना चाहिए। नैऋत्य दिशा की भूमि नीची हो, तो वह घर के लोगों में भय के साथ धन-संपत्तिनाशक होती है।
 
2. इस दिशा में घर के मुखिया का कमरा बना सकते हैं।
 
3. कैश काउंटर, मशीनें आदि आप इस दिशा में रख सकते हैं। 
 
4. इस दिशा में टॉयलेट भी बनाई जा सकती है।
 
5. इस दिशा में गड्ढे, बोरिंग, कुएं, पूजाघर, अध्यन कक्ष  इत्यादि नहीं होने चाहिए।
 
6. इस दिशा में विराजमान देवता हमारे शत्रुओं का नाश कर हमें अभयदान प्रदान करते हैं।
 
7. नैऋत्य कोण में दोष या जन्मपत्री में राहु के पीड़ित होने पर परिवार में असमय मौत की आशंका, दादा से परेशानी, मन में अहंकार की भावना की उत्पत्ति, त्वचा रोग, कुष्ठ रोग, मस्तिष्क रोग आदि की सम्भावनाएं प्रबल रहती हैं। केतु भी राहु की तरह कृष्ण वर्ण का एक क्रूर ग्रह है, इसकी स्थिति के आधार पर नाना से परेशानी, किसी के द्वारा किए गए जादू-टोने से परेशानी, छूत की बीमारी, रक्त विकार, दर्द, चेचक, हैजे, चर्म रोग का विचार किया जाता है।

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