क्या गौतम गंभीर ने क्रिकेट कमेंट्री के दौरान वाकई पहना था BJP का दुपट्टा और पगड़ी...

बुधवार, 10 जुलाई 2019 (12:36 IST)
सोशल मीडिया पर नवनिर्वाचित सांसद और पूर्व क्रिकटर गौतम गंभीर की एक तस्वीर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में वे इरफान पठान और जतिन सप्रू के साथ नजर आ रहे हैं। वायरल तस्वीर में गौतम गंभीर ने गले में भाजपा का भगवा दुपट्टा पहना है और सिर पर भगवा पगड़ी। उनके भगवा दुपट्टे पर भाजपा का चुनाव चिन्ह कमल और आईसीसी क्रिकेट विश्व कप का लोगो बना हुआ है। इस तस्वीर पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ यूजर्स गंभीर से क्रिकेट में राजनीति को मिक्स न करने की सलाह दे रहे हैं, तो कोई उन्हें उनकी प्राथमिकताएं याद दिला रहा है।

क्या है वायरल पोस्ट?

स्टैंड अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने ट्विटर पर यह तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “बीजेपी MP अपने कॉन्स्टिट्यूएंसी में गंभीरता से काम करते हुए”

*BJP MP apni constituency main gambhirta se kaam karte hue* pic.twitter.com/0GcTe6q6lq

— Kunal Kamra (@kunalkamra88) July 6, 2019


उनके इस ट्वीट को लगभग दो हजार लोगों ने रीट्वीट किया है और तेरह हजार लोगों ने लाइक किया है। इस ट्वीट पर अन्य यूजर्स की प्रतिक्रियाएं देखें-

CRICKET mein bhi political colours!! pic.twitter.com/Dl8cyEBIGa

— Sayk (@sayk_art) July 6, 2019

but hez not being paid to watch match or cheer for India.everyone can go n watch the match every MP or even PM too..but being MP doing commentry for money is not worth.

— Yusuf Mustafa (@yusufforindia) July 6, 2019

सच क्या है?

वेबदुनिया ने अपनी पड़ताल में पाया है कि इस तस्वीर से छेड़छाड़ की गई है। असल में यह तस्वीर एक क्रिकेट टीवी शो के दौरान की है और असली तस्वीर में गौतम गंभीर ने न तो पगड़ी पहनी है और न ही दुपट्टा डाला हुआ है।

असली तस्वीर को इरफान पठान ने 25 जून को ट्वीट किया था। देखें वह ट्वीट-

Teen tigada logo ka kaam bigada;) #work pic.twitter.com/2HjYei3WxH

— Irfan Pathan (@IrfanPathan) June 25, 2019


दरअसल, कुणाल कामरा ने एक व्यंग्य के तौर यह तस्वीर शेयर की थी, जिसे बाद में लोगों ने गंभीरता से शेयर करना शुरू कर दिया।

कुणाल ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने इस तस्वीर को एक व्यंग्य के रूप में शेयर किया था। लोग इसे गलत तरीके से शेयर कर रहे हैं। उनका उद्देश्य फेक न्यूज फैलाना नहीं था।

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