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Fact Check: कभी पादरी, कभी संत तो कभी किसान? जानिए वायरल PHOTOS का पूरा सच

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गुरुवार, 11 फ़रवरी 2021 (12:23 IST)
सोशल मीडिया पर एक शख्स की तीन तस्वीरें जमकर वायरल हो रही हैं। पहली तस्वीर में ये शख्स पादरी के कपड़े में चर्च में बोलता नजर आ रहा है। दूसरी तस्वीर में वो माथे पर चंदन का टीका लगाए प्रवचन देता दिख रहा है। वहीं, तीसरी तस्वीर में वो हरा गमछा डाले कुछ अन्य लोगों के साथ खड़ा है और मीडिया को बयान दे रहा है। तस्वीरें शेयर कर कहा जा रहा है कि ये शख्स कभी ईसाई पादरी बन जाता है, कभी प्रवचन देने वाला संत बन जाता है तो कभी किसान बनकर आंदोलन में शामिल होने आ जाता है। कुछ लोग इन तस्वीरों को ‘आंदोलनजीवी’ हैशटैग से भी शेयर कर रहे हैं।

क्या है वायरल-

एक ट्विटर यूजर ने ये तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा- “रविवार को चर्च के पादरी, सोमवार को हिन्दू कथावाचक, जब पैसे मिले तो किसान आंदोलन@आन्दोलनजीवी।” यह पोस्ट एक हजार से अधिक बार रीट्वीट किया गया है और लगभग तीन हजार लोगों ने लाइक किया है।



फेसबुक पर भी ये तस्वीरें काफी वायरल है।



क्या है सच-

पहली तस्वीर को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें ‘Arputhar Yesu Tv’ नाम के यूट्यूब चैनल का एक वीडियो मिला जो 1 मई 2018 को शेयर किया गया था। वीडियो के कैप्शन में लिखा है, ‘मजदूर दिवस के मौके पर फादर जगत कैस्पर का भाषण।’



दूसरी तस्वीर को रिवर्स सर्च करने पर हमें पता चला कि ये ‘ARRA TV’ के यूट्यूब चैनल पर 29 जनवरी 2017 को अपलोड किए गए एक वीडियो से ली गई है। इसके डिस्क्रिशन में लिखा है- ‘फादर जगत कैस्पर का शानदार भाषण।’



वहीं, तीसरी तस्वीर को रिवर्स सर्च करने पर हमने पाया कि ये 28 अप्रैल 2018 को छपी ANI की एक रिपोर्ट से ली गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 22 अप्रैल 2018 को कन्याकुमारी में एक मंदिर में बैठे दो ईसाई पादरियों के चेहरे पर भस्म पोतने की घटना हुई थी। तमिल मैया संगठन के जेजी राज ने पादरियों के साथ हुई बदसलूकी के लिए आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया था।

Haindava Keralam’ वेबसाइट के मुताबिक, फादर जगत कैस्पर ही जेजी राज हैं यानि जगत गैस्पर राज।

जगत गैस्पर राज एक ईसाई पादरी हैं और टीवी चैनलों पर अकसर प्रवचन भी देते हैं।

वेबदुनिया की पड़ताल में पाया गया है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं तस्वीरें तमिलनाडु के फादर जगत गैस्पर राज की हैं और तीन साल पुरानी हैं। वे कन्याकुमारी और चेन्नई में सामाजिक कामों को लेकर काफी सक्रिय रहते हैं, लेकिन उनके मौजूदा किसान आंदोलन में शामिल होने का दावा गलत है।

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