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खाकी वर्दी, चेहरे पर रौब और दिल में ममता, ये हैं IPS रुचिवर्धन मिश्र

नेहा रेड्डी
मां हो, बहन हो, पत्नी हो या बेटी- जिंदगी के हर मोड़ में नारी मजबूती के साथ आगे बढ़ती रही है, वहीं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर करियर के हर स्तर पर मजबूती के साथ खड़ी है जिनके सामने सिर्फ सम्मान से सर झुकता है। 
 
आज हम एक ऐसी ही नारी शक्ति के बारे में जानने जा रहे हैं, जो हर एक महिला के लिए प्रेरणास्रोत है। हम में से ऐसी कई महिलाएं व लड़कियां हैं, जो उन्हें अपना आदर्श मानती हैं और वे हैं इंदौर की पहली महिला एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र।
 
खाकी वर्दी, चेहरे पर गजब का रौब लेकिन दिल में ममता समेटे पुलिस का चुनौतीपूर्ण काम करने वाली मध्यप्रदेश के इंदौर शहर की डीआईजी जिनसे मिलकर लगा कि काश! मैं भी इनकी तरह पुलिस अधिकारी होती।
 
तो आइए, जानते हैं रुचिवर्धन मिश्र के जीवन के बारे में कुछ अनछुए पहलू-
 
वर्ष 2006 की आईपीएस बैच की टॉपर और अचूक निशानेबाज रुचिवर्धन मिश्र मूल रूप से सतना की रहने वाली हैं। वे होशंगाबाद में एसपी और भोपाल व राजगढ़ में एएसपी रह चुकी हैं। उनका मानना है कि जीवन में कुछ भी मुश्किल नहीं है। यदि आप किसी चीज को बहुत मन से चाहो, तो आपको आपकी मंजिल तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता।
 
उनका कहना है कि जिंदगी में सकारात्मकता (positivity) का होना बहुत जरूरी है। यदि आप अपनी जिंदगी के हर पहलू को सकारात्मकता के साथ देखते हैं, तो हर मुकाम को आप हासिल कर सकते हैं, साथ ही हर परिस्थिति का सामना आप आसानी से कर सकते हैं।
 
अपने करियर को लेकर रुचिवर्धन मिश्र का कहना है कि पुलिस सेवा एक चुनौतीपूर्ण प्रोफेशन है। पुलिस सर्विस के माध्यम से हम समाज की सेवा कर सकते हैं और समाज की बेहतरी के लिए योगदान दिया जा सकता है। उनका कहना है कि किसी भी महिला को आगे बढ़ने के लिए परिवार का सहयोग होना बेहद जरूरी है।
 
अपने परिवार के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अपने परिवार से हमेशा से ही सपोर्ट मिला। पिता ने हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उनके फैसलों पर भी उनका पूरा साथ दिया। वहीं अपनी मां के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि मेरी मां मेरी आदर्श हैं और अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाती हैं।
 
साथ ही उन्होंने बताया कि मां मेरी सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंतित रहती थीं, क्योंकि कोई भी माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंतित रहते ही हैं, क्योंकि पुलिस की सेवा काफी गंभीर मानी जाती है, वहीं इसमें रिस्क भी काफी होता है और माता-पिता होने के नाते चिंता तो स्वाभाविक है ही। लेकिन मैं यह जरूर कहना चाहूंगी कि पुलिस में हम दूसरे के साथ-साथ खुद को भी सुरक्षित रख सकते हैं।
 
वहीं रुचिवर्धन मिश्र का कहना है कि जो लड़कियां अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहती हैं, कुछ करना चाहती हैं, अगर आप दिल से कुछ चाहते हों तो उसे पूरा करने में कोई बाधा नहीं आती। अगर कोई बाधा आए भी तो वह अवसर में तब्दील हो जाती है। लेकिन जरूरी बात यह है कि यदि आप अपना लक्ष्य बना रहे हों तो इसे दिल से चाहो। अगर आप किसी चीज को दिल से चाहोगे तो वह चीज आपको अवश्य मिलेगी। आपकी सोच और आपकी नीयत साफ होनी चाहिए।
 
उनका कहना है कि पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को बैलेंस करना बेहद जरूरी है। आप पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को अगर मिला देते हैं, तो दोनों में उलझकर सिर्फ खुद को परेशानी में ही पाओगे। आपको इसे सही तरीके से संभालना आना चाहिए। ताकि आप तनाव में न रह पाएं। साथ ही आपकी ज्यादा जरूरत कहां है, इस बात पर ध्यान देना जरूरी है। यदि आपकी जरूरत परिवार में है तो वहां आपको समय देना चाहिए। क्योंकि आपके कार्यस्थल पर आपका काम और कोई संभाल सकता है लेकिन परिवार में नहीं। इसलिए जहां आपकी ज्यादा जरूरत है वहां आपका होना बेहतर है।

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