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सेल्फ हिप्नोटिज्म का जादू

सम्मोहन से सेहत की ओर

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'
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भारतवर्ष की प्राचीनतम और सर्वश्रेष्ठ विद्या सम्मोहन विद्या को ही प्राचीन समय से 'प्राण विद्या' या 'त्रिकालविद्या' के नाम से पुकारा जाता रहा है। अंग्रेजी में इसे हिप्नोटिज्म और आत्म सम्मोहन को सेल्फ हिप्नोटिज्म कहते हैं। आत्म सम्मोहन की शक्ति प्राप्त करने के लिए अनेक तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं। सम्मोहन दो प्रकार का होता है पहला आत्म सम्मोहन और दूसरा दूसरों को सम्मोहित करना। यहाँ प्रस्तुत है आत्म सम्मोहन।

आदिम आत्म चेतन मन :
मन के कई स्तर होते हैं। उनमें से एक है आदिम आत्म चेतन मन। आदिम आत्म चेतन मन न तो विचार करता है और न ही निर्णय लेता है। उक्त मन का संबंध हमारे सूक्ष्म शरीर से होता है। यह मन हमें आने वाले खतरे का संकेत या उक्त खतरों से बचने के तरीके बताता है। रोग की पूर्व सूचना इस मन से ही प्राप्त होती है, किंतु व्यक्ति उसे समझ नहीं पाता है।

यह मन लगातार हमारी रक्षा करता रहता है। हमें होने वाली बीमारी की यह मन छह माह पूर्व ही सूचना दे देता है और यदि हम बीमार हैं तो यह हमें स्वस्थ रखने का प्रयास करता है। बौद्धिकता और अहंकार के चलते हम उक्त मन की सुनी-अनसुनी कर देते है ं। उक्त मन को साधना ही आत्म सम्मोहन है।

कैसे साधें इस मन को :
वैसे इस मन को साधने के बहुत से तरीके या विधियाँ हैं। लेकिन सीधा रास्ता है कि प्राणायम से साधे प्रत्याहार को और प्रत्याहार से धारणा को। जब आपका मन स्थिर चित्त हो, एक ही दिशा में गमन करे और इसका अभ्यास गहराने लगे तब आप अपनी इंद्रियों में ऐसी शक्ति का अनुभव करने लगेंगे जिसको आम इंसान अनुभव नहीं कर सकता। इसको साधने के लिए त्राटक भी कर सकते हैं त्राटक भी कई प्रकार से किया जाता है। ध्यान, प्राणायाम और नेत्र त्राटक द्वारा आत्म सम्मोहन की शक्ति को जगाया जा सकता है।

आत्म सम्मोहन की अवस्था में शरीर के जिस भी अंग में आपको रोग या दर्द हो आप अपना ध्यान वहाँ लगाकर वहाँ सकारात्मक ऊर्जा का संचारकर उसकी स्वयं ही चिकित्सा कर सकते हैं। लगातार उसके स्वस्थ होते जाने के बारे में आत्म सम्मोहन की अवस्था में कल्पना करने से उक्त स्थान पर रोग में लाभ मिलने लगता है। यह मन स्वत: ही बताता है कि उक्त रोग में कौन सी दवा या चिकित्सा लाभप्रद सिद्ध होगी और इसका इलाज कैसे ‍किया जा सकता है ।

अन्य तरीके : कुछ लोग अँगूठे को आँखों की सीध में रखकर तो, कुछ लोग स्पाइरल (सम्मोहन चक्र), कुछ लोग घड़ी के पेंडुलम को हिलाते हुए, कुछ लोग लाल बल्ब को एकटक देखते हुए और कुछ लोग मोमबत्ती को एकटक देखते हुए भी उक्त साधना को करते हैं, लेकिन यह कितना सही है यह हम नहीं जानते।

इसके लाभ : आप स्वयं की ही नहीं दूसरों की बीमारी दूर करने की क्षमता भी हासिल कर सकते हैं। आत्म सम्मोहन के द्वारा आप किसी भी गंभीर रोग को दूर करने की क्षमता हासिल कर सकते हैं। अनिंद्रा और तनाव में तो यह अचूक रूप से कारगर है। यह हमारे भीतर के आत्म विश्वास को जाग्रत कर सकता है।

यह मन आपकी हर तरह की मदद करने के लिए तैयार है, बशर्ते आप इसके प्रति समर्पित हों। यह किसी के भी अतीत और भविष्य को जानने की क्षमता रखता है। आपके साथ घटने वाली घटनाओं के प्रति आपको सजग कर देगा, जिस कारण आप उक्त घटना को टालने के उपाय खोज लेंगे।

आत्म सम्मोहन द्वारा मन की एकाग्रता, वाणी का प्रभाव व दृष्टि मात्र से उपासक अपने संकल्प को पूर्ण कर लेता है। इससे विचारों का संप्रेषण (टेलीपैथिक), दूसरे के मनोभावों को ज्ञात करना, अदृश्य वस्तु या आत्मा को देखना और दूरस्थ दृश्यों को जाना जा सकता है।

योग पैकेज : नियमित सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और योगनिंद्रा करते हुए ध्यान करें। ध्यान में विपश्यना और नादब्रह्म का उपयोग करें। प्रत्याहार का पालन करते हुए धारणा को साधने का प्रयास करें। संकल्प के प्रबल होने से धारणा को साधने में आसानी होगी है। संकल्प सधता है अभ्यास के महत्व को समझने से।

नोट : इसके संबंध में ज्यादा जानकारी के लिए मिलें किसी योग्य योग शिक्षक या सम्मोहनविद से। यह विद्या किसी जानकार की देखरेख में रहकर ही सिखना चाहिए।
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