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2025 predictions: वर्ष 2025 में आएगी सबसे बड़ी सुनामी या बड़ा भूकंप?

WD Feature Desk
सोमवार, 25 नवंबर 2024 (12:04 IST)
Tsunami or Earthquake Prediction: समुद्र के अंदर यदि भूकंप आता है तो उससे समुद्र में तूफान आता है जिससे ऐसी बड़ी लहरे उठती हैं कि तटवर्ती कई शहर डूब जाते हैं इसी घटना को सुनामी कहते हैं जबकि धरती के भीतर कोई टेक्टोनिक प्लेट सरकती है तो उससे भूकंप आता है। सामान्य तौर पर 6.5 तक की सुनामी या भूकंप से कोई खास जानमाल का नुकसान नहीं होता है परंतु 7.6 की तीव्रता से जब कोई भूकंप आता है तो बड़े पैमाने पर तबाही होती है। ऐसे ही भूकंप या सुनामी के आने की भविष्यवाणी की जा रही है।
 
क्या है वर्ष 2025 में सुनामी और भूकंप को लेकर भविष्यवाणी :- 
वर्ष 2025 में 15 दिनों के अंतराल में आने वाले दो ग्रहण और शनि एवं गुरु के राशि परिवर्तन के चलते आशंका व्यक्त की जा रही है कि धरती पर कोई बड़ा भूकंप आ सकता है और अमेरिका के समुद्री क्षेत्र में सुनामी के कारण बड़ा तूफान उठेगा जो अमेरिका में तबाही मचा देगा। 
 
भूकंप को लेकर उदाहरण :- 
1. वर्ष 2015 में अप्रैल में नेपाल में 7.9 की तीव्रता वाले विनाशकारी भूकंप ने 10,000 से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी। इस साल यानी 16 सितंबर 2015 में सेंट्रल चिली में 8.3 मेगावॉट की तीव्रता वाला समुद्र में भूकंप आया था। साल 2015 में चार ग्रहण हुए थे- 20 मार्च को पूर्ण सूर्य ग्रहण था और इसके बाद 4 अप्रैल को पूर्ण चंद्र ग्रहण हुआ था। दोनों ही ग्रहण 15 दिनों के अंतराल में ही लगे थे। इसके बाद 13 सितंबर को आंशिक सूर्य ग्रहण और 28 सितंबर को पूर्ण चंद्र ग्रहण था। यह दोनों ग्रहण भी 15 दिनों के अंतराल में थे जिसके चलते नेपाल और चीली में भयानक भूकंप आया।   
 
2. 26 दिसंबर 2004 में सुमात्रा में भूकंप आया था जिसके चलते भयानक सुनामी आई थी। साल का पहला चंद्र ग्रहण 25 मार्च को और पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण 8 अप्रैल को लगा था। दोनों ग्रहण 15 दिनों के अंदर ही हुए थे। इसके बाद साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 18 सितंबर को और दूसरे सूर्य ग्रहण 2 अक्टूबर को लगा था। यह दोनों ग्रहण भी 15 दिनों के अंदर लगे थे। इसी के चलते सुनामी आई थी। 
वर्ष 2025 में आने वाले भूकंप का आधार क्या है?
1. शनि का गोचर और ग्रहण : ज्योतिष के अनुसार 29 मार्च 2024 को शनि ग्रह कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में गोचर करेगा। उस दिन अमावस्या के दिन वर्ष का पहले सूर्य ग्रहण भी रहेगा। इससे पहले 14 मार्च को चंद्र ग्रहण रहेगा। यह दोनों ही ग्रहण 15 दिनों के भीतर लगने वाले हैं। इसके बाद दूसरा चंद्र ग्रहण 07 सितंबर को और दूसरा सूर्य ग्रहण 21 सितंबर को लगेगा। यह ग्रहण भी 15 दिनों के भीतर लगने वाले हैं। यह स्थित पहले दो ग्रहण के 4 दिनों के भीतर बड़ी सुनामी या भूकंप का संकेत देती है। यानी ग्रहण के 40 दिन पहले या ग्रहण के 40 दिनों के भीतर यह घटना घटने की संभावना है।
 
2. अतिचारी हो रहे हैं बृहस्पति : 14 मई 2025 से गुरु ग्रह वृषभ से निकलकर मिथुन राशि में 3 गुना अतिचारी हो रहे हैं। अतिचारी यानी वे अब तेज गति से एक राशि को बहुत कम समय में पार करके पुन: उसी राशि में वक्री लौटेंगे और फिर मार्गी होकर पुन: अगली राशि में चले जाएंगे। ऐसे वे 8 वर्षों तक करेंगे। बृहस्पति की इस असामान्य गति से धरती पर हलचल बढ़ जाएगी, क्योंकि बृहस्पति की मीन राशि में शनि और राहु की युति मई 18 मई 2025 तक रहेगी। बृहस्पति ग्रह जीवन, शीतलता, सुख, समृद्धि, उन्नति और बुद्धि प्रदान करता है परंतु जब इसकी चाल बिगड़ जाए तो भारी नुकसान देखने को मिलते हैं। बड़े पैमाने पर जलवायु परिवर्तन के चलते धरती के मौसम और तापमान में बदलाव हो जाएगा।
 
भविष्य में आने वाले भूकंप पर क्या कहता है विज्ञान:-
1. वैज्ञानिकों का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत में शिलांग मैसिफ पहाड़ों के आसपास एक भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र है, जहां भारतीय टेक्टोनिक प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है। दूसरा बांग्लादेश, म्यांमार और पूर्वोत्तर भारत के नीचे हिंद महासागर की परत का सबडक्शन है। यहां पर फिर से किसी बड़े भूकंप के आने की आशंका बनी हुई है। इसके अलावा अमेरिका के समुद्र के भीतर भी हलचलें बढ़ रही है।
 
2. होलकर विज्ञान महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रो. राम श्रीवास्तव वेबदुनिया से बातचीत में कहते हैं कि पृथ्वी पर भूकंप हमेशा आते ही रहते हैं। धरती पर 30 से 35 तक की संख्या में रोज 2.3 की तीव्रता वाले भूकंप आते रहते हैं। प्रो. श्रीवास्तव कोलोराडो यूनिवर्सिटी के रॉजर विलहम एवं सिंगापुर यूनिवर्सिटी के पॉल टपोलियर के हवाले से कहते हैं इन दोनों ने ही हिमालय क्षेत्र में भूकंप को लेकर काफी काम किया है। इससे जुड़ी जानकारी नेचर नामक पत्रिका में भी प्रकाशित हुई है। इन वैज्ञानिकों के मुताबिक 1000 साल में हिमालय की तराई में एक 'मेगा भूकंप' आता है, जो कि अब ड्यू हो गया है। रिक्टर पैमाने पर यह भूकंप 8-9 तीव्रता का हो सकता है। यदि ऐसा हुआ तो गंगा के मैदान में बहुमंजिला मकान जमींदोज हो जाएंगे। इससे काफी नुकसान हो सकता है। प्रोफेसर कहते हैं कि चूंकि भूकंप की भविष्यवाणी नहीं हो सकती, लेकिन समय रहते हमें खतरनाक क्षेत्रों का ऑडिट करना चाहिए कि कोई मकान कितना झटका झेल सकता है। इसके लिए हमें किसी भूकंप का इंतजार नहीं करना चाहिए।
 
डिस्क्लेमर : उपरोक्त जानकारी विभिन्न स्रोत पर आधारित है। इसकी आधिकारिक पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है।

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