Hanuman Chalisa

Adhik Maas 2020 : अधिकमास पर होगा कोरोना का असर, जानिए शुभ संयोग

Webdunia
पुष्य, सोम, रवि नक्षत्र व सर्वार्थ सिद्धि, द्विपुष्कर व अमृत सिद्धि योग का बन रहा संयोग।
 
अधिकमास 18 सितंबर से शुरू हो रहा है, जिसका 16 अक्टूबर को समापन होगा। इस साल अधिक मास में 15 दिन शुभ योग रहेगा। अधिक मास के दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग 9 दिन, द्विपुष्कर योग 2 दिन, अमृत सिद्धि योग 1 दिन और पुष्य नक्षत्र का योग दो दिन बन रहा है। पुष्य नक्षत्र भी रवि और सोम पुष्य होंगे। 
 
पौराणिक सिद्धांतों के अनुसार इस मास के दौरान यज्ञ-हवन के अलावा श्रीमद् देवीभागवत, श्री भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण, पठन, मनन विशेष रूप से फलदायी होता है। अधिक मास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु जी हैं, इसीलिए इस पूरे समय में भगवान विष्णु जी के मंत्रों का जाप विशेष लाभकारी होता है।
 
शुक्ल नाम के शुभ योग में अधिक मास की शुरुआत
 
अधिक मास की शुरुआत 18 सितंबर को शुक्रवार, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और शुक्ल नाम के शुभ योग में होगी। ये दिन काफी शुभ रहेगा। इस महीने में 26 सितंबर एवं 1, 2, 4, 6, 7, 9, 11, 17 अक्टूबर सर्वार्थसिद्धि योग भी होने से लोगों की मनोकामनाएं पूरी होंगी। इसके अलावा 19 व 27 सितंबर को द्विपुष्कर योग भी है। इस योग में किए गए किसी भी काम का दोगुना फल मिलता है। इस बार अधिक मास में दो दिन पुष्य नक्षत्र भी पड़ रहा है। 10 अक्टूबर को रवि पुष्य और 11 अक्टूबर को सोम पुष्य नक्षत्र रहेगा। यह ऐसी तारीखें होंगी, जब कोई भी आवश्यक शुभ काम किया जा सकता है। यह तिथियां खरीदार इत्यादि के लिए शुभ मानी जाती हैं। इसलिए इन तिथियों में की गई खरीदारी शुभ फलकारी होती है।
 
कोरोना का असर देगा दिखाई
 
दान, पुण्य, पूजा-पाठ व श्रीमद् भागवत कथा के लिए मास पुरुषोत्तम पवित्र महीना माना जाता है। इस महीने में भक्ति की गंगा बहती है। देशभर में श्रीमद् भागवत कथा प्रसंगों की गूंज सुनाई देती है, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के कारण कथा प्रसंगों की गूंज सुनाई देगी, ऐसी संभावना कम ही लग रही है। वहीं कुछ लोग तीर्थ यात्रा भी करते हैं, उनकी यात्रा में कोरोना संक्रमण बाधा बन सकता है। 
 
19 वर्ष बाद ऐसा संयोग बना है, जब अश्विन मास में पुरुषोत्तम मास मनाया जाएगा। इसके पहले यह संयोग वर्ष 2001 में बना था। यह महीना भगवान विष्णु जी की भक्ति, आराधना के लिए जाना जाता है। भगवान विष्णु जी की भक्ति, उपासना और श्रीमद्भ भागवत कथा सुनने से कई गुना फल की प्राप्ति होती है।
 
अधिक मास की यह है कथा
 
पौराणिक कथाओं के अनुसार मलमास होने के कारण कोई इस मास का स्वामी होना नहीं चाहता था, तब इस मास ने भगवान विष्णु से अपने उद्घार के लिए प्रार्थना की। प्रार्थना से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु जी ने उन्हें अपना श्रेष्ठ नाम पुरषोत्तम प्रदान किया। साथ ही यह आशीर्वाद दिया कि जो इस माह में भागवत कथा श्रवण, मनन, भगवान शंकर का पूजन, धार्मिक अनुष्ठान, दान आदि करेगा, वह अक्षय फल प्रदान करने वाला होगा। इसलिए यह माह दान-पुण्य अक्षय फल देने वाला माना जाएगा।
ALSO READ: अधिक मास में क्या करना चाहिए और क्या नहीं, जानिए

ALSO READ: अधिकमास में कौन से काम करना वर्जित है, किस दिन आ रहे हैं शुभ संयोग

सम्बंधित जानकारी

Show comments

ज़रूर पढ़ें

सोमवार से रविवार तक करें ये अचूक उपाय, हर दिन चमकेगी किस्मत

देवगुरु बृहस्पति का कर्क राशि में महागोचर: किस्मत चमकाने और गुरु दोष दूर करने के लिए जरूर करें ये 7 अचूक उपाय

साल का सबसे बड़ा महागोचर: 2 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति का कर्क राशि में प्रवेश, जानें सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल

Lunar Eclipse 2026: साल के दूसरे चंद्र ग्रहण की 5 बड़ी और रोचक बातें

Bada Mangal 2026: बड़ा मंगल: नवाबों के शहर से कैसे शुरू हुई बजरंगबली की ये खास परंपरा, पढ़ें गौरव गाथा

सभी देखें

नवीनतम

केतु का सिंह राशि में चल रहा है गोचर, 3 राशियां रहेंगी टॉप पर, अभी भी कर लें ये 5 उपाय

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (09 जून, 2026)

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 9 जून 2026: मंगलवार का पंचांग और शुभ समय

09 June Birthday: आपको 9 जून, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

शनि की साढ़ेसाती के प्रथम चरण में मेष राशि, क्या बढ़ेंगी मुश्किलें या मिलेगा लाभ?

अगला लेख