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US-Iran War: अमेरिका-इजराइल vs ईरान युद्ध कब रुकेगा? ज्योतिष के संकेत चौंकाने वाले

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The AI ​​image features the flags of Israel and the United States on one side, and the flag of Iran on the other, with soldiers and tanks engaged in battle in the background.
US-Israel-Iran War: दुनिया इस समय बारूद के ढेर पर बैठी है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच का यह त्रिकोणीय संघर्ष केवल सरहदों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर आपकी रसोई के बजट, पेट्रोल की कीमतों और एलपीजी सिलेंडर पर भी पड़ रहा है। हर कोई एक ही सवाल पूछ रहा है- क्या यह बर्बादी थमेगी? जब कूटनीति फेल हो जाती है, तो नजरें आसमान के सितारों और प्राचीन भविष्यवाणियों पर टिक जाती हैं। आइए, 2026 के इस 'महा-संकट' का ज्योतिषीय और भविष्यवाणियों के आइने में विश्लेषण करते हैं।
 

ग्रहों की टेढ़ी चाल और 'खप्पर योग' का साया

आकाशीय मंडल में इस समय ग्रहों का ऐसा 'विस्फोटक' जमावड़ा लगा है जो शांति के पक्ष में बिल्कुल नहीं दिख रहा। मीन राशि में शनि और मंगल की युति ने एक ऐसा ज्वालामुखी दहका रखा है, जो युद्ध, भीषण भूकंप और जनविद्रोह का कारण बन रहा है।
सबसे चिंताजनक मोड़ 11 अप्रैल 2026 को आने वाला है, जब शनि का उदय होगा। 11 अप्रैल से 11 मई तक का समय दुनिया के लिए किसी 'अग्निपरीक्षा' से कम नहीं होगा क्योंकि मंगल और शनि एक-दूसरे के बेहद करीब होंगे। 14 अप्रैल को सूर्य का मेष राशि में प्रवेश और साथ में सक्रिय 'कालसर्प दोष' यह साफ संकेत दे रहे हैं कि शांति की तमाम कोशिशें फिलहाल नाकाम साबित होंगी। इसके अलावा, 21 जून से 2 अगस्त तक चलने वाला 'खप्पर योग' जलती आग में घी डालने का काम करेगा।
 

युद्ध विराम की समय सीमा: कब थमेगी तबाही?

ईरान की जन्मकुंडली का विश्लेषण डराने वाला है। 14 फरवरी से 3 जुलाई 2026 के बीच वहां गुरु की महादशा में राहु का अंतर और शनि का प्रत्यंतर चल रहा है। राहु की यही चाल इस युद्ध में 'अदृश्य हथियारों' और 'ड्रोन अटैक्स' को बढ़ावा दे रही है।
 
11 मई तक या 21 जुलाई के पहले। हालांकि राहत की उम्मीद जुलाई 2026 के बाद दिखती है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, जुलाई के बाद ग्रहों की क्रूरता में कुछ कमी आएगी, जिससे बड़े पैमाने पर चल रहा यह संघर्ष कूटनीति या समझौतों की तरफ मुड़ सकता है। हालांकि, पूरी तरह शांति बहाल होने में अभी लंबा वक्त लगेगा।

समंदर में आग और सत्ता का पलटवार

ग्रहों की चाल यह भी बता रही है कि 2 अप्रैल के बाद युद्ध का केंद्र जमीन से शिफ्ट होकर समंदर (Sea) की ओर बढ़ेगा। अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की सप्लाई ठप होने की आशंका है। भारत के लिए भी समय चुनौतीपूर्ण है; अगस्त 2026 में सीमा पर तनाव और सितंबर-अक्टूबर 2026 के दौरान राजनीति में बड़े फेरबदल या किसी दिग्गज नेता पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं।
 

नास्त्रेदमस और बाबा वेंगा की रोंगटे खड़े करने वाली भविष्यवाणियाँ

इतिहास के पन्नों में दफन भविष्यवाणियाँ आज हकीकत बनकर सामने आ रही हैं। 16वीं सदी के भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस ने '7 महीने के महान युद्ध' की बात की थी। अगर यह फरवरी-मार्च में शुरू हुआ है, तो इसका निर्णायक अंत सितंबर-अक्टूबर 2026 के आसपास ही होगा। उन्होंने जिस 'लाल शत्रु' और 'आसमान से बरसती आग' का जिक्र किया था, वह आज की मिसाइलों और युद्धपोतों की याद दिलाता है।
 
वहीं, बुल्गारिया की बाबा वेंगा ने 2026 को 'महायुद्ध का वर्ष' बताया था। उनके द्वारा बताया गया 'मधुमक्खियों का झुंड' आज के 'ड्रोन स्वाम' (Drone Swarms) के रूप में आसमान से मौत बरसा रहा है। साथ ही, उन्होंने एक बड़े मुस्लिम देश के 'सुप्रीम लीडर' के पतन की जो बात कही थी, वह आज के ईरान के हालातों को देखते हुए दुनिया को चिंता में डाल रही है।
 
सितारों की चाल और महान भविष्यवक्ताओं के संकेत एक ही दिशा में इशारा कर रहे हैं- जुलाई तक का समय बेहद नाजुक है। दुनिया एक नए युग में प्रवेश कर रही है, जहाँ सत्ता के केंद्र और जीने के तरीके पूरी तरह बदल सकते हैं। सतर्क रहना ही समझदारी है।

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