खरमास विशेष : इस माह में करें सूर्य देव की उपासना, मिलेगा सर्वश्रेष्ठ फल

आचार्य राजेश कुमार
क्यों खरमास में मंगल कार्यों (शादी-विवाह, मुंडन, जनेऊ संस्कार, नूतन गृह प्रवेश इत्यादि) को करना उत्तम नहीं बताया गया है। गुरु का ध्यान सूर्य देव पर रहता है। खरमास में धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, किंतु मंगल शहनाई नहीं बजती।
 
सूर्य देव के गुरु की धनु राशि में प्रवेश करते ही 16 दिसंबर 2018 को सायं 6.39 से खरमास प्रारंभ हो जाएगा एवं 15 जनवरी 2019 की रात 2.39 तक रहेगा। काशी पंचांग के अनुसार सूर्य जब गुरु की राशि धनु या मीन में विराजमान रहते हैं, तो उस घड़ी को खरमास माना जाता है और खरमास में मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं।
 
इस माह में सूर्य देव की उपासना से मिलता है सर्वश्रेष्ठ फल : 
 
खरमास की इस अवधि में जनेऊ संस्कार, मुंडन संस्कार, नव गृह प्रवेश, विवाह आदि नहीं करना चाहिए। इसे शुभ नहीं माना गया है, वहीं विवाह आदि शुभ संस्कारों में गुरु एवं शुक्र की उपस्थिति आवश्यक बताई गई है। ये सुख और समृद्धि के कारक माने गए हैं। खरमास में धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, किंतु मंगल शहनाई नहीं बजती। इस माह में सभी राशि वालों को सूर्य देव की उपासना अवश्य करनी चाहिए।
 
गुरु का ध्यान सूर्य देव पर :
 
इसका एक धार्मिक पक्ष यह भी माना जाता है कि सूर्य देव जब बृहस्पति के घर में प्रवेश करते हैं, तो देव गुरु का ध्यान एवं संपूर्ण समर्पण उन पर ही केंद्रित हो जाता है। इससे मांगलिक कार्यों पर उनका प्रभाव सूक्ष्म ही रह जाता है जिससे कि इस दौरान शुभ कार्यों का विशेष लाभ नहीं होता इसलिए भी खरमास में मंगल कार्यों को करना उत्तम नहीं बताया गया है।

ALSO READ: 16 दिसंबर से शुरू होगा खरमास, नहीं करें फिर किसी भी तरह के मंगल कार्य, जानिए क्यों

सम्बंधित जानकारी

Show comments

ज़रूर पढ़ें

इस साल क्यों खास है राम नवमी? जानिए कैसे भगवान राम की कृपा से जीवन में आ सकती है समृद्धि

मंगल का कर्क राशि में गोचर: 5 राशियों के लिए रहेगा 45 दिनों तक चुनौती भरा समय

राहु का कुंभ राशि में गोचर: 3 राशियों को रहना होगा सतर्क

रावण को मारने के लिए श्री राम को क्यों चलाने पड़े 32 बाण, जानिए रामायण के 32 बाणों का रहस्य

नरेंद्र मोदी के बाद इन 3 में से कौन बन सकता है अगला प्रधानमंत्री, किसके सितारे हैं बुलंदी पर?

सभी देखें

नवीनतम

वास्तु के अनुसार कैसे घर की नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में बदलें?

हनुमान जी के पान के बीड़े में क्या क्या होता है, क्यों करते हैं बीड़ा अर्पित?

यदि आपके जीवन में कुछ भी अच्‍छा नहीं चल रहा है तो करें ये 3 अचूक उपाय, तुरंत मिलेगा आराम

कब मनाया जाएगा श्रीराम जन्मोत्सव, जानें पूजन के मुहूर्त, विधि और महत्व

चैत्र नवरात्रि व्रत के पारण का समय और व्रत खोलने का तरीका

अगला लेख